MS Dhoni Legal Case: IPL 2026 से पहले एमएस धोनी को झटका, मद्रास हाईकोर्ट ने दिया 10 लाख रुपये जमा करने का आदेश

आईपीएल 2026 की तैयारियों के बीच महेंद्र सिंह धोनी को मद्रास हाई कोर्ट से करारा झटका लगा है। 2013 सट्टेबाजी विवाद से जुड़े मानहानि केस में कोर्ट ने धोनी को ₹10 लाख जमा करने का निर्देश दिया है। क्या सीडी ट्रांसलेशन का यह खर्च धोनी की मुश्किलों को और बढ़ाने वाला है?

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

फ़रवरी 12, 2026

MS Dhoni Legal Case: भारतीय क्रिकेट जगत के सबसे चहेते कप्तानों में से एक महेंद्र सिंह धोनी एक बार फिर चर्चा में हैं। जहाँ एक ओर प्रशंसक आईपीएल 2026 में चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) की पीली जर्सी में उनकी वापसी का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर एक दशक पुराने कानूनी मामले ने उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं। मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में एक आदेश जारी करते हुए धोनी को 10 लाख रुपये की राशि अदालत में जमा करने का निर्देश दिया है। यह आदेश किसी जुर्माने के तौर पर नहीं, बल्कि धोनी द्वारा स्वयं दायर किए गए एक मानहानि मामले की जटिल कागजी कार्रवाई को आगे बढ़ाने के लिए दिया गया है।

2013 के मैच फिक्सिंग विवाद से जुड़ा है पूरा मामला

यह कानूनी लड़ाई साल 2013 के उस बहुचर्चित आईपीएल मैच फिक्सिंग और सट्टेबाजी कांड से शुरू हुई थी, जिसने भारतीय क्रिकेट को झकझोर कर रख दिया था। उस दौरान कुछ मीडिया संस्थानों और एक आईपीएस अधिकारी ने इस मामले में धोनी का नाम घसीटा था। अपनी छवि को धूमिल होते देख धोनी ने इसे चुनौती दी और मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया। धोनी का तर्क था कि उनके ऊपर लगाए गए आरोप निराधार हैं और इससे उनके करियर और प्रतिष्ठा को भारी नुकसान पहुँचा है। तभी से यह मामला अदालत में विचाराधीन है और अब इसके निर्णायक मोड़ पर पहुँचने की उम्मीद जताई जा रही है।

सबूतों के अनुवाद के लिए कोर्ट ने मांगा खर्चा: क्या है कानूनी प्रक्रिया?

मानहानि के इस मामले को पुख्ता करने के लिए धोनी की ओर से सबूत के तौर पर कई न्यूज चैनलों के कार्यक्रमों की सीडी (CD) अदालत में पेश की गई थीं। ये रिपोर्टें मुख्य रूप से हिंदी और अन्य भाषाओं में थीं। हाईकोर्ट की जस्टिस आरएन मंजुला ने स्पष्ट किया कि इन सीडी में मौजूद सामग्री को आधिकारिक रिकॉर्ड का हिस्सा बनाने के लिए उनका सटीक अनुवाद (Translation) और प्रतिलेखन (Transcription) करना अनिवार्य है। चूंकि यह एक विशाल और समय लेने वाला कार्य है, इसलिए इसके लिए विशेष इंटरप्रेटर और टाइपिस्ट की सेवाएं ली जाएंगी। अदालत का मानना है कि इस पूरी प्रक्रिया में लगभग 3-4 महीने का समय लगेगा।

12 मार्च तक जमा करनी होगी राशि: धोनी ने दी अपनी सहमति

अदालत ने अपने आदेश में यह भी साफ किया कि चूंकि यह कार्रवाई शिकायतकर्ता (धोनी) के अनुरोध पर और उनके मामले को आगे बढ़ाने के लिए की जा रही है, इसलिए इसका वित्तीय भार भी उन्हीं को उठाना होगा। कोर्ट ने इसके लिए 10 लाख रुपये की राशि निर्धारित की है। एमएस धोनी ने अदालत के इस आदेश का सम्मान करते हुए यह रकम जमा करने पर अपनी सहमति दे दी है। जानकारी के अनुसार, यह पैसा मद्रास हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रिलीफ फंड में जमा कराया जाएगा। राशि जमा करने की समय सीमा 12 मार्च तय की गई है, जो इस मामले की अगली सुनवाई की तारीख भी है।

मार्च के अंत तक पूरा होगा कागजी काम: क्या होगा अगला कदम?

अदालत की योजना के मुताबिक, 12 मार्च को राशि जमा होने के बाद मार्च के तीसरे हफ्ते तक ट्रांसक्रिप्शन का काम पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद अदालत उन सबूतों का गहन अध्ययन करेगी जो धोनी ने अपनी मानहानि साबित करने के लिए पेश किए हैं। क्रिकेट फैंस के लिए यह खबर थोड़ी हैरान करने वाली जरूर है, लेकिन कानूनी जानकारों का कहना है कि बड़े मामलों में साक्ष्यों के प्रमाणीकरण के लिए इस तरह के आदेश सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं। अब देखना यह होगा कि 12 मार्च की सुनवाई में अदालत इस मामले में और क्या रुख अपनाती है।

आईपीएल 2026 की तैयारियों पर नहीं पड़ेगा असर

भले ही धोनी कानूनी प्रक्रियाओं में उलझे हों, लेकिन खेल के प्रति उनका समर्पण कम नहीं हुआ है। सूत्रों के मुताबिक, धोनी ने आईपीएल 2026 के लिए अपना नेट प्रैक्टिस और फिटनेस रूटीन शुरू कर दिया है। सीएसके के प्रबंधन और प्रशंसकों को पूरा भरोसा है कि ‘थाला’ इस कानूनी मोर्चे पर भी उतनी ही सूझबूझ से जीत हासिल करेंगे, जितनी वो क्रिकेट के मैदान पर अपनी रणनीतियों से करते आए हैं।

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