MP Rolling Budget : मध्यप्रदेश में चार साल के बजट की तैयारी, वित्त विभाग ने जारी किया शेड्यूल

मध्यप्रदेश सरकार ने आने वाले वर्षों की वित्तीय योजना पर बड़ा कदम उठाया है। 2026-27 के पुनरीक्षित अनुमान, 2027-28 के बजट अनुमान और 2028-29 व 2029-30 के रोलिंग बजट की तैयारी शुरू हो गई है। वित्त विभाग ने विभागवार चर्चा का कार्यक्रम जारी किया है। आखिर इस योजना से प्रदेश की प्राथमिकताएं कैसे बदलेंगी?

MP Rolling Budget

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

सितम्बर 5, 2026

MP Rolling Budget : मध्य प्रदेश सरकार ने आने वाले वर्षों की वित्तीय योजनाओं को लेकर अपनी तैयारियां काफी तेज कर दी हैं। राज्य के वित्त विभाग ने वर्ष 2026-27 के लिए पुनरीक्षित अनुमान यानी Revised Estimates, वर्ष 2027-28 के लिए नया बजट अनुमान यानी Budget Estimates, और इसके साथ ही 2028-29 व 2029-30 के लिए रोलिंग बजट (Rolling Budget) तैयार करने की पूरी प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस महत्वपूर्ण संबंध में बजट चर्चा के पहले चरण के लिए तमाम संबंधित विभागों की ओर से विभागवार समय-सारणी भी जारी कर दी गई है। इससे सरकार की भावी वित्तीय प्राथमिकताओं को बजट में जगह मिलेगी।

वर्ष 2026-27 के पुनरीक्षित अनुमान

मौजूदा बजट प्रक्रिया के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए विशेष रूप से Revised Estimates तैयार किए जा रहे हैं। इसके अंतर्गत पहले से स्वीकृत बजट के मुकाबले पूरे वर्ष के दौरान संभावित वास्तविक आय और खर्च का सटीक आकलन किया जाएगा। विभिन्न सरकारी योजनाओं पर हुए खर्च, राज्य के राजस्व की वर्तमान स्थिति और बदलती हुई वित्तीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर मौजूदा अनुमानों में आवश्यक संशोधन किए जाने की पूरी संभावना है।

वर्ष 2027-28 का नया बजट अनुमान

आगामी वित्तीय वर्ष 2027-28 के लिए नया बजट अनुमान तैयार किया जाना बेहद जरूरी है। यह अगले वित्तीय वर्ष के दौरान सरकार की कुल अनुमानित आय और प्रस्तावित खर्च का एक शुरुआती खाका साबित होगा। इसमें विभिन्न विभागों की महत्वपूर्ण योजनाओं, नई विकास परियोजनाओं और मौजूदा कार्यक्रमों के लिए आवश्यक वित्तीय संसाधनों का पूरा ध्यान रखा जाएगा। अलग-अलग विभागों से मिलने वाले प्रस्ताव इस संपूर्ण प्रक्रिया का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होंगे।

रोलिंग बजट से लंबी अवधि की योजना

मध्य प्रदेश सरकार ने केवल अगले वित्तीय वर्ष तक ही सीमित रहने के बजाय, आगे के वर्षों यानी 2028-29 और 2029-30 के लिए भी रोलिंग बजट की तैयारी शुरू कर दी है। इसका मुख्य उद्देश्य भविष्य की वित्तीय जरूरतों और योजनाओं को समय से पहले ध्यान में रखना है। इस अनूठी व्यवस्था के माध्यम से सरकार को आने वाले समय में संभावित खर्च, संसाधनों और विकास कार्यों के लिए एक लंबी अवधि की स्पष्ट वित्तीय दिशा तय करने में काफी मदद मिलेगी।

विभागों से मांगे जाएंगे वित्तीय प्रस्ताव

वित्त विभाग द्वारा हाल ही में जारी किए गए विभागवार शेड्यूल के अनुसार अब बजट चर्चा के पहले चरण को सुचारू रूप से आगे बढ़ाया जाएगा। सभी संबंधित विभाग अपनी योजनाओं, प्रस्तावित खर्च, नई जरूरतों और वित्तीय आवश्यकताओं से जुड़े सभी विवरण प्रस्तुत करेंगे। इन सभी प्रस्तावों की बारीकी से समीक्षा करने के बाद वित्त विभाग आगामी बजट की प्राथमिकताओं और संसाधनों के उचित आवंटन को अंतिम रूप देने की दिशा में तेजी से काम करेगा।

रिवाइज्ड और बजटEstimates में अंतर

रिवाइज्ड एस्टीमेट्स का सीधा अर्थ किसी चालू वित्तीय वर्ष के दौरान पहले से स्वीकृत बजट के मुकाबले संभावित वास्तविक आय और खर्च का संशोधित रूप है। वहीं दूसरी ओर, बजट एस्टीमेट्स अगले वित्तीय वर्ष के लिए सरकार की अनुमानित आय और प्रस्तावित व्यय का एक प्रारंभिक खाका होता है। सरल शब्दों में समझें तो रिवाइज्ड एस्टीमेट्स वर्तमान वर्ष की वित्तीय स्थिति को दर्शाता है, जबकि बजट एस्टीमेट्स आने वाले वर्ष की आर्थिक योजना तय करता है।

रोलिंग बजट से विभागों को फायदा

रोलिंग बजट की यह आधुनिक व्यवस्था सरकार को तात्कालिक जरूरतों के साथ-साथ भविष्य की वित्तीय आवश्यकताओं पर भी पैनी नजर रखने का अवसर प्रदान करती है। मध्य प्रदेश में इन वर्षों के लिए इसका उपयोग इसी उद्देश्य से किया जा रहा है ताकि विभिन्न विभाग अपनी भावी योजनाओं और खर्च की जरूरतों को पहले ही बजट प्रक्रिया का हिस्सा बना सकें।

विभागवार टाइमटेबल से बढ़ेगी प्रक्रिया

वित्त विभाग द्वारा विभागवार समय-सारणी जारी होने के बाद अब बजट चर्चा पूरी तरह से निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार ही आगे बढ़ेगी। सभी संबंधित विभाग तय की गई समय-सीमा के भीतर अपने जरूरी प्रस्ताव और वित्तीय आवश्यकताएं प्रस्तुत करेंगे। इसके बाद वित्त विभाग इन प्रस्तावों की समीक्षा करके आगे की प्रक्रिया को आकार देगा।

वित्तीय प्राथमिकताओं पर टिकी नजर

एक साथ चार वित्तीय वर्षों को ध्यान में रखकर बजट प्रक्रिया शुरू करने से सरकार को दीर्घकालिक जरूरतों का आकलन करने में मदद मिलेगी। फिलहाल शेड्यूल जारी होने के साथ ही मध्य प्रदेश में आगामी बजट और दीर्घकालिक वित्तीय प्लानिंग की औपचारिक शुरुआत हो चुकी है।

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