Bhojshala High Court Verdict : मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने धार की ऐतिहासिक भोजशाला को वाग्देवी (मां सरस्वती) का मंदिर माना है। इस बेहद संवेदनशील और कई साल पुराने विवाद में पांच मुख्य याचिकाओं और तीन इंटरवेंशन (हस्तक्षेप याचिकाओं) पर लंबी सुनवाई पूरी हो चुकी है। दो जजों की खंडपीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। कोर्ट के इस आगामी निर्णय पर पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम और 12 लेयर का सुरक्षा चक्र
इस बड़े फैसले के मद्देनजर इंदौर और धार जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है। शुक्रवार का दिन होने के कारण क्षेत्र में संवेदनशीलता और ज्यादा बढ़ गई है, क्योंकि इसी दिन मुस्लिम समाज भोजशाला परिसर में जुमे की नमाज अदा करता है। शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए धार पुलिस कंट्रोल रूम में जिलेभर से लगभग 1200 अतिरिक्त पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। एसपी सचिन शर्मा ने सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हुए बताया कि धार शहर की सुरक्षा को 12 लेयर (स्तरों) में विभाजित किया गया है। स्थिति से निपटने के लिए रिजर्व पुलिस बल और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) को भी मुस्तैद रखा गया है। प्रशासन ने आम जनता से सोशल मीडिया पर किसी भी प्रकार की अपुष्ट या भ्रामक जानकारी साझा न करने की अपील की है।
वर्ष 2022 में दायर की गई थी मुख्य याचिका
भोजशाला का यह कानूनी विवाद साल 2022 में उस समय दोबारा गरमाया, जब रंजना अग्निहोत्री और अन्य प्रदर्शनकारियों ने ‘हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस’ की ओर से हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की। इस याचिका के माध्यम से कोर्ट से मांग की गई कि भोजशाला का धार्मिक स्वरूप पूरी तरह तय किया जाए और हिंदू समाज को इस परिसर पर पूर्ण अधिकार सौंपा जाए।
याचिकाकर्ताओं की प्रमुख मांगें
हिंदू पक्ष द्वारा दायर की गई इस याचिका में कई महत्वपूर्ण मांगें शामिल हैं। इसमें भोजशाला परिसर में हिंदुओं को नियमित रूप से पूजा-अर्चना करने का अधिकार देने, परिसर के भीतर नमाज पढ़ने पर पूरी तरह रोक लगाने, व्यवस्था संचालन के लिए एक विशेष ट्रस्ट का गठन करने और वर्तमान में ब्रिटिश म्यूजियम (लंदन) में रखी मां वाग्देवी की प्राचीन प्रतिमा को वापस भारत लाने की गुहार लगाई गई है।
ASI का 98 दिनों का विस्तृत वैज्ञानिक सर्वे
मामले की गहराई को देखते हुए साल 2024 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने कोर्ट के आदेश पर भोजशाला परिसर का लगातार 98 दिनों तक अत्याधुनिक और वैज्ञानिक सर्वे किया था। इसके बाद, 23 जनवरी 2026 को वसंत पंचमी के पावन अवसर पर सुप्रीम कोर्ट ने हिंदुओं को दिनभर निर्बाध रूप से पूजा करने की विशेष अनुमति दी थी। इसके बाद हाईकोर्ट में 6 अप्रैल से इस मामले पर नियमित सुनवाई शुरू हुई, जो 12 मई तक अनवरत चली।
अदालत में हिंदू पक्ष के अकाट्य तर्क
सुनवाई के दौरान हिंदू पक्ष के अधिवक्ताओं ने ऐतिहासिक दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर भोजशाला को मां सरस्वती का मंदिर और एक प्राचीन शिक्षा केंद्र (विश्वविद्यालय) बताया। अधिवक्ता मनीष गुप्ता ने परमार राजवंश के राजा भोज द्वारा रचित ग्रंथ ‘समरांगण सूत्रधार’ का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने तर्क दिया कि भोजशाला की वर्तमान वास्तुकला और संरचना, इस ग्रंथ में वर्णित मंदिर निर्माण के प्राचीन मानकों से पूरी तरह मेल खाती है। इसके अलावा उन्होंने एएसआई की सर्वे रिपोर्ट, वहां मिले शिलालेखों, स्थापत्य कला के अवशेषों और सदियों पुरानी वसंत पंचमी की पूजा परंपरा का भी हवाला दिया।
मुस्लिम पक्ष के प्रतिवाद और सलमान खुर्शीद की दलीलें
दूसरी ओर, मुस्लिम पक्ष ने इन दावों का पुरजोर विरोध किया। उनका तर्क था कि यह परिसर लंबे समय से ‘कमाल मौला मस्जिद’ के रूप में इस्तेमाल होता आ रहा है। उन्होंने कहा कि किसी भी स्थान का धार्मिक स्वरूप तय करने का अधिकार केवल सिविल कोर्ट के पास है। मुस्लिम पक्ष की ओर से पेश हुए सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने एएसआई की वैज्ञानिक सर्वे रिपोर्ट पर ही सवाल उठा दिए। उन्होंने कोर्ट में कहा कि सर्वे के दौरान जो तस्वीरें और वीडियोग्राफी साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत की गई हैं, वे स्पष्ट नहीं हैं। खुर्शीद ने यह भी तर्क दिया कि अयोध्या के मामले के विपरीत, धार की भोजशाला के गर्भगृह में वर्तमान में कोई स्थापित मूर्ति मौजूद नहीं है, इसलिए इसे मंदिर नहीं कहा जा सकता।
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