Mojtaba Khamenei Injured: ईरान युद्ध के बीच मुजतबा खामेनेई घायल !, बहरीन तेल कंपनी ने घोषित किया फोर्स मेज्योर

ईरान के नए सर्वोच्च नेता मुजतबा खामेनेई पर इजराइली हमले की खबरों के बीच बहरीन से डराने वाली खबर आई है। बहरीन की सरकारी तेल कंपनी ने युद्ध के खतरों को देखते हुए 'फोर्स मेज्योर' लागू कर दिया है, जिसका मतलब है कि तेल आपूर्ति अब अनिश्चितकाल के लिए बाधित होगी। क्या यह वैश्विक आर्थिक मंदी की शुरुआत है?

Mojtaba Khamenei Injured

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मार्च 9, 2026

Mojtaba Khamenei Injured: मध्य पूर्व में जारी युद्ध के बीच ईरान से एक अहम खबर सामने आई है। ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता Ali Khamenei के बेटे Mojtaba Khamenei के घायल होने की जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट्स के अनुसार वे मौजूदा सैन्य संघर्ष के दौरान जख्मी हुए हैं। इस संबंध में ईरान के सरकारी टेलीविजन ने उन्हें “जानबाज” बताया है, जिसका अर्थ है कि वे दुश्मन के हमले में घायल हुए हैं। हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि वे किस घटना या हमले के दौरान घायल हुए।

परिवार पर पहले भी हुआ था बड़ा हमला

रिपोर्टों के मुताबिक, हाल के दिनों में खामेनेई परिवार पर बड़ा आघात पड़ा था। 28 फरवरी को हुए हमले में Mojtaba Khamenei की पत्नी, बेटी और उनके पिता Ali Khamenei की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद पूरे ईरान में शोक की लहर फैल गई थी। मौजूदा हालात में देश के राजनीतिक और सुरक्षा हालात भी बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं।

नए सुप्रीम लीडर के रूप में नाम सामने आने के बाद बढ़ा तनाव

युद्ध शुरू होने के बाद से Mojtaba Khamenei सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं दिए थे। हाल ही में उन्हें ईरान का नया सर्वोच्च नेता घोषित किए जाने की खबर सामने आई थी। इस घोषणा के बाद क्षेत्रीय तनाव और भी बढ़ गया। इजराइल और अमेरिका की ओर से यह चेतावनी दी गई थी कि यदि बिना सहमति के किसी को नया सुप्रीम लीडर बनाया जाता है, तो उसे निशाना बनाया जा सकता है।

इजराइल की कड़ी चेतावनी

इजराइल की ओर से यह बयान भी सामने आया था कि ईरान का जो भी नया सुप्रीम लीडर बनेगा, उसे खत्म कर दिया जाएगा, चाहे वह कहीं भी क्यों न छिपा हो। इस बयान के बाद से मध्य पूर्व में राजनीतिक और सैन्य तनाव और बढ़ गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान क्षेत्र में चल रहे संघर्ष को और भड़का सकता है।

35 वर्षों तक ईरान के सर्वोच्च नेता रहे अली खामेनेई

ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei लगभग 35 वर्षों तक देश की सत्ता के सबसे ऊंचे पद पर रहे। 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हमले में उनकी मौत हो गई थी। वे 1989 से ईरान के सुप्रीम लीडर के पद पर काबिज थे और इस दौरान उन्होंने देश की राजनीति, विदेश नीति और धार्मिक नेतृत्व में अहम भूमिका निभाई।

इस्लामिक क्रांति में निभाई थी महत्वपूर्ण भूमिका

Ali Khamenei ने 1979 की ईरानी इस्लामिक क्रांति में भी सक्रिय भूमिका निभाई थी। उस समय क्रांति के दौरान ईरान के शाह Mohammad Reza Pahlavi को सत्ता से हटाया गया था। इस क्रांति के बाद देश में एक नई इस्लामिक राजनीतिक व्यवस्था स्थापित हुई थी।

राष्ट्रपति पद से सुप्रीम लीडर तक का सफर

इस्लामिक क्रांति के बाद Ali Khamenei को 1981 में ईरान का राष्ट्रपति बनाया गया था। उन्होंने लगभग आठ वर्षों तक इस पद पर काम किया। 1989 में ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता Ruhollah Khomeini की मृत्यु के बाद उन्हें उनका उत्तराधिकारी घोषित किया गया और वे देश के सुप्रीम लीडर बन गए।

सुप्रीम लीडर बनने के लिए धार्मिक पदवी जरूरी

ईरान के इस्लामिक कानून के अनुसार देश का सर्वोच्च नेता बनने के लिए अयातुल्ला की धार्मिक पदवी होना जरूरी है। अयातुल्ला एक उच्च धार्मिक उपाधि मानी जाती है, जो प्रमुख इस्लामिक विद्वानों को दी जाती है। इस नियम के कारण ईरान में सुप्रीम लीडर का पद केवल किसी धार्मिक नेता को ही मिल सकता है।

बहरीन की तेल कंपनी ने घोषित किया फोर्स मेज्योर

इसी बीच मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का असर ऊर्जा क्षेत्र पर भी पड़ रहा है। बहरीन की सरकारी तेल कंपनी Bapco Energies ने अपनी गतिविधियों पर “फोर्स मेज्योर” घोषित कर दिया है। इसका मतलब है कि अगर युद्ध या किसी बाहरी परिस्थिति के कारण तेल की सप्लाई बाधित होती है, तो कंपनी को इसके लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जाएगा क्योंकि हालात उसके नियंत्रण से बाहर हैं।

ड्रोन हमले के बाद लिया गया फैसला

यह फैसला तब लिया गया जब देश की मुख्य तेल रिफाइनरी के पास घना धुआं उठता हुआ देखा गया। बहरीन सरकार ने बताया कि Sitra इलाके में ईरानी ड्रोन हमले की वजह से कुछ लोगों के घायल होने और नुकसान होने की खबर है। Bapco Energies बहरीन की मुख्य तेल रिफाइनरी संचालित करती है और यह देश के ऊर्जा क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण सुविधा मानी जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि क्षेत्र में संघर्ष जारी रहा तो इसका असर वैश्विक तेल आपूर्ति और कीमतों पर भी पड़ सकता है।