Modi Cabinet Reshuffle: भारतीय जनता पार्टी की नई संगठनात्मक टीम सामने आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की केंद्रीय मंत्रिपरिषद में संभावित बदलाव को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। आगामी विधानसभा चुनाव, वर्ष 2029 के लोकसभा चुनाव, मंत्रियों का प्रदर्शन, राज्यों का प्रतिनिधित्व और एनडीए के सहयोगी दलों के बीच संतुलन जैसे मुद्दे संभावित फेरबदल में अहम भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि, अभी तक प्रधानमंत्री कार्यालय, केंद्र सरकार या बीजेपी की ओर से मंत्रिमंडल में बदलाव की तारीख और स्वरूप को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद शिक्षा मंत्रालय अतिरिक्त प्रभार में
केंद्रीय मंत्रिपरिषद में हालिया महत्वपूर्ण बदलाव शिक्षा मंत्रालय से जुड़ा है। राष्ट्रपति भवन के आधिकारिक आदेश के अनुसार धर्मेंद्र प्रधान का केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफा 25 जुलाई को स्वीकार किया गया था। इसके बाद प्रह्लाद जोशी को उनके मौजूदा विभागों के साथ शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया। अब उनके पास उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा के अलावा शिक्षा मंत्रालय की भी जिम्मेदारी है। ऐसे में संभावित फेरबदल में शिक्षा मंत्रालय को पूर्णकालिक मंत्री मिलने की संभावना पर भी नजर रहेगी।
कई वरिष्ठ नेताओं के पास एक से अधिक मंत्रालय
मोदी सरकार में कई वरिष्ठ मंत्रियों के पास फिलहाल एक से ज्यादा महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी है। गृह मंत्री अमित शाह के पास सहकारिता मंत्रालय भी है। जेपी नड्डा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के साथ रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय संभाल रहे हैं। शिवराज सिंह चौहान कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्रालय देखते हैं। अश्विनी वैष्णव के पास रेलवे, सूचना एवं प्रसारण और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी जैसे अहम विभाग हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के पास वित्त और कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय हैं, जबकि मनोहर लाल आवास एवं शहरी कार्य तथा बिजली मंत्रालय संभाल रहे हैं। संभावित फेरबदल में कुछ वरिष्ठ मंत्रियों के विभागों का बोझ कम किए जाने की चर्चा है, लेकिन अभी कोई आधिकारिक निर्णय सामने नहीं आया है।
युवा चेहरों और महिलाओं को मिल सकता है प्रतिनिधित्व
बीजेपी की नई संगठनात्मक टीम के गठन के बाद मंत्रिपरिषद में भी नई पीढ़ी के नेताओं को आगे बढ़ाने की अटकलें लगाई जा रही हैं। संभावित बदलाव में युवा नेताओं के साथ महिलाओं और विभिन्न सामाजिक वर्गों को अधिक प्रतिनिधित्व देने पर भी विचार हो सकता है। हालांकि, संभावित मंत्रियों के रूप में जिन नेताओं के नाम राजनीतिक गलियारों में चर्चा में हैं, उन्हें अभी अंतिम नहीं माना जा सकता। आधिकारिक घोषणा होने तक इन नामों को केवल संभावित दावेदारों के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
यूपी से महाराष्ट्र तक राज्यों का समीकरण महत्वपूर्ण
केंद्रीय मंत्रिमंडल में संभावित बदलाव के दौरान क्षेत्रीय संतुलन भी महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकता है। उत्तर प्रदेश देश में सबसे ज्यादा लोकसभा सीटों वाला राज्य है और केंद्र की राजनीति में इसकी भूमिका बेहद अहम है। गुजरात भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक राज्य है। इसके अलावा पंजाब में पार्टी अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है। मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, कर्नाटक और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों के राजनीतिक समीकरण भी संभावित बदलाव को प्रभावित कर सकते हैं। आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए सामाजिक और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व पर विशेष जोर दिए जाने की संभावना है।
NDA सहयोगियों की मांगों पर भी रहेगी नजर
मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी एनडीए के सहयोगी दलों की भूमिका महत्वपूर्ण बनी हुई है। मौजूदा मंत्रिपरिषद में तेलुगु देशम पार्टी के राममोहन नायडू नागरिक उड्डयन मंत्रालय संभाल रहे हैं। जनता दल यूनाइटेड के राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह के पास पंचायती राज तथा मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय हैं। एचडी कुमारस्वामी भारी उद्योग और इस्पात मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, जबकि चिराग पासवान खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री हैं। संभावित मंत्रिमंडल विस्तार में सहयोगी दल अतिरिक्त प्रतिनिधित्व की मांग कर सकते हैं, लेकिन अभी किसी पार्टी को अतिरिक्त मंत्रालय मिलने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
संवैधानिक सीमा के भीतर कितने मंत्री शामिल हो सकते हैं
केंद्रीय मंत्रिपरिषद के आकार को संविधान के अनुच्छेद 75(1A) के तहत निर्धारित सीमा का पालन करना होता है। इसके अनुसार प्रधानमंत्री सहित मंत्रिपरिषद की कुल संख्या लोकसभा के कुल सदस्यों की 15 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती। 543 सदस्यीय लोकसभा के हिसाब से अधिकतम संख्या 81 सदस्यों की बनती है। हालांकि, इस सीमा के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि मंत्रिमंडल में निश्चित रूप से 12 नए मंत्री शामिल किए जाएंगे। वास्तविक संख्या और नियुक्तियों का फैसला प्रधानमंत्री की सलाह और राजनीतिक जरूरतों के आधार पर होगा।
जॉर्ज कुरियन और रवनीत सिंह बिट्टू को लेकर स्थिति साफ
जॉर्ज कुरियन और रवनीत सिंह बिट्टू को लेकर भी मंत्रिपरिषद से बाहर होने की चर्चाएं सामने आई थीं। हालांकि, 25 अगस्त तक अपडेट की गई प्रधानमंत्री कार्यालय की आधिकारिक सूची में दोनों नेता केंद्रीय राज्य मंत्री के रूप में दर्ज हैं। जॉर्ज कुरियन अल्पसंख्यक कार्य तथा मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय में राज्य मंत्री हैं। वहीं रवनीत सिंह बिट्टू खाद्य प्रसंस्करण उद्योग और रेलवे मंत्रालय में राज्य मंत्री के तौर पर जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इसलिए फिलहाल दोनों नेताओं को मंत्रिपरिषद से बाहर बताना सही नहीं होगा।
फेरबदल की तारीख पर अभी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं
केंद्रीय मंत्रिपरिषद में संभावित फेरबदल कब होगा, इसे लेकर फिलहाल कोई निश्चित जानकारी उपलब्ध नहीं है। बीजेपी की नई संगठनात्मक टीम के गठन के बाद राजनीतिक चर्चाओं को जरूर बल मिला है। पिछले कुछ समय से कई नेताओं और संभावित नए चेहरों को मंत्रिमंडल बदलाव से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, राष्ट्रपति भवन, प्रधानमंत्री कार्यालय या बीजेपी ने अब तक फेरबदल की तारीख की घोषणा नहीं की है। ऐसे में फिलहाल इसे तय बदलाव के बजाय संभावित मंत्रिमंडल फेरबदल को लेकर तेज हुई राजनीतिक चर्चा के रूप में देखना ज्यादा उचित होगा।
Read More : R Praggnanandhaa ने रचा इतिहास, Grand Chess Tour जीता, Caruana को हराया छह अंकों से










