Nepal Flood Update: नेपाल और चीन ने हिमालयी क्षेत्र में एक बार फिर अचानक बाढ़ आने की आशंका जताई है। इस सप्ताह आई विनाशकारी बाढ़ से अभी दोनों देश पूरी तरह उबर भी नहीं पाए हैं कि सीमा के दोनों ओर बनी दो झीलों ने नई चिंता पैदा कर दी है। आशंका है कि यदि इन झीलों का पानी अचानक बाहर निकलता है तो निचले इलाकों में फिर भारी तबाही हो सकती है। नेपाल की आपदा प्रबंधन एजेंसी ने लोगों और राहत टीमों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है।
मलबे से नदी का रास्ता बाधित होने के बाद बनी झील
नेपाल के अधिकारियों के मुताबिक, बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में भारी मात्रा में जमा मलबे के कारण नदी का प्राकृतिक बहाव बाधित हो गया है। इसके परिणामस्वरूप एक झील जैसी जलराशि बन गई है और उसका जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। अधिकारियों ने निचले इलाकों में रहने वाले लोगों, यात्रियों और राहत-बचाव अभियान में जुटे कर्मियों से नदी के किनारों और जोखिम वाले क्षेत्रों से दूर रहने की अपील की है।
विशेषज्ञ ने जताई कभी भी दूसरी बाढ़ आने की आशंका
काठमांडू स्थित इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट के जलवायु विशेषज्ञ कियांगगोंग झांग ने स्थिति को बेहद गंभीर बताया है। उनके अनुसार नेपाल-चीन सीमा के ऊपरी हिस्से में नदी के प्रवाह को रोकने वाला मलबा अभी भी मौजूद है। ऐसे में पानी का दबाव बढ़ने पर दूसरी बाढ़ अचानक आ सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों को लगातार निगरानी और प्रशासन की चेतावनियों का पालन करना चाहिए।
भीषण बाढ़ में सैकड़ों लोगों की मौत
इस प्राकृतिक आपदा में मृतकों की संख्या लगातार बढ़ने की जानकारी सामने आई है। नेपाल और तिब्बत में बचाव दल अब भी लापता लोगों की तलाश में जुटे हैं। अचानक आई बाढ़ और मलबे के तेज बहाव ने घरों, सड़कों और पुलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। कई इलाकों में संपर्क मार्ग बाधित होने से राहत अभियान भी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
30 से ज्यादा देशों के नागरिक लापता
आपदा का असर केवल स्थानीय आबादी तक सीमित नहीं रहा। नेपाल-तिब्बत सीमा के आसपास मौजूद बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक भी लापता बताए जा रहे हैं। इनमें पर्यटक, ट्रेकिंग समूहों के सदस्य, गाइड और धार्मिक यात्रा पर गए लोग शामिल हैं। अलग-अलग देशों की सरकारें और दूतावास अपने नागरिकों की जानकारी जुटाने में लगे हैं।
नेपाल में सैकड़ों लोग अब भी लापता
नेपाल के आपदा प्रबंधन अधिकारियों के अनुसार बड़ी संख्या में नेपाली और विदेशी नागरिकों का अब तक पता नहीं चल सका है। कई विदेशी नागरिकों को हेलीकॉप्टर के जरिए सुरक्षित निकाला गया है। लापता लोगों में पर्यटकों के साथ सेना और पुलिस के जवान भी शामिल बताए गए हैं। रसुवा और आसपास के जिलों में राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है।
चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी भारी नुकसान
चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी बाढ़ और भूस्खलन ने गंभीर स्थिति पैदा की है। सरकारी रिपोर्टों के मुताबिक ग्यिरोंग काउंटी में लोगों की मौत हुई है और बड़ी संख्या में नागरिक लापता हैं। इनमें विदेशी नागरिक भी शामिल बताए गए हैं। चीन के विदेश मंत्रालय ने नेपाल की तरफ मौजूद कई चीनी नागरिकों के लापता होने की जानकारी भी दी है।
भारत के 288 नागरिकों से संपर्क नहीं
भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार नेपाल और आसपास के प्रभावित क्षेत्रों में 288 भारतीय नागरिकों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। इनमें एक पावर प्रोजेक्ट में काम करने वाले लोग भी शामिल हैं। इसके अलावा कई भारतीय श्रद्धालु माउंट कैलाश की यात्रा पर गए थे। भारतीय अधिकारी नेपाली प्रशासन के साथ समन्वय कर लापता नागरिकों की जानकारी जुटाने में लगे हैं।
अमेरिका समेत कई देशों के नागरिक प्रभावित
अमेरिका ने भी नेपाल और चीन में अपने नागरिकों के लापता होने की जानकारी दी है। इसके अलावा मलेशिया, यूक्रेन, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, कनाडा, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, जर्मनी, रूस और दक्षिण अफ्रीका समेत कई देशों के नागरिकों का पता नहीं चल पाया है। जापान, न्यूजीलैंड, फ्रांस, बेल्जियम और स्पेन के नागरिक भी लापता बताए गए हैं।
राहत अभियान के साथ नई चुनौती
नेपाल और चीन के सामने अब दोहरी चुनौती है। एक ओर बचाव दल मलबे और बाढ़ में फंसे लोगों की तलाश कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर नई झीलों के बढ़ते जलस्तर ने दूसरी बाढ़ का खतरा पैदा कर दिया है। प्रशासन ने लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक नदी का अवरोध पूरी तरह खत्म नहीं होता, तब तक प्रभावित क्षेत्रों में खतरा बना रह सकता है।
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