MP BJP OBC Survey : मध्यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी अब पिछड़ा वर्ग यानी OBC की सामाजिक और राजनीतिक हिस्सेदारी का विस्तृत आकलन करने की तैयारी में जुट गई है। पार्टी संगठन के स्तर पर एक आंतरिक सर्वे कराया जाएगा, जिसके जरिए यह समझने की कोशिश होगी कि पिछड़ा वर्ग की किन जातियों को राजनीति, संगठन और सत्ता में पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिला है और कौन-सी जातियां अब भी पीछे हैं। इस कवायद को भविष्य की राजनीतिक रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
93 OBC जातियों का जुटाया जाएगा पूरा डेटा
प्रस्तावित सर्वे के दौरान मध्यप्रदेश की OBC सूची में शामिल सभी 93 जातियों से जुड़ी जानकारी जुटाई जाएगी। इसमें प्रत्येक जाति के प्रमुख नेताओं, राजनीतिक भागीदारी, संगठन में मौजूदगी और सरकार में मिले प्रतिनिधित्व का रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। साथ ही जिन समुदायों को अपेक्षाकृत कम हिस्सेदारी मिली है, उनकी पहचान भी की जाएगी। पार्टी इस जानकारी का इस्तेमाल सामाजिक समीकरणों को समझने के लिए कर सकती है।
लीडरशिप मैप से सामने आएगा प्रतिनिधित्व का गैप
बीजेपी इस पूरी कवायद को एक तरह के ‘लीडरशिप मैप’ और ‘गैप एनालिसिस’ के रूप में देख रही है। सर्वे से यह पता लगाने की कोशिश होगी कि OBC की अलग-अलग जातियों में राजनीतिक नेतृत्व की स्थिति कैसी है। किन समुदायों के नेता लगातार चुनाव जीत रहे हैं और किन जातियों की संगठनात्मक मौजूदगी सीमित है, इसका भी आकलन किया जाएगा। इससे पार्टी को जमीनी स्तर पर सामाजिक प्रतिनिधित्व की तस्वीर समझने में मदद मिल सकती है।
सांसद-विधायक से संगठन तक होगी प्रतिनिधित्व की पड़ताल
सर्वे में OBC की विभिन्न जातियों से आने वाले सांसदों और विधायकों की संख्या भी दर्ज की जाएगी। इसके अलावा बीजेपी के संगठन में इन समुदायों की हिस्सेदारी का भी आकलन किया जाएगा। पार्टी यह जानने की कोशिश करेगी कि राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर किन जातियों को राजनीतिक अवसर अधिक मिले हैं और किन समूहों की मौजूदगी कम है। इसी आधार पर भविष्य की संगठनात्मक रणनीति तैयार की जा सकती है।
टिकट वितरण में सामाजिक संतुलन पर रहेगा जोर
जातीय प्रतिनिधित्व से जुड़ा यह डेटा आने वाले समय में टिकट वितरण और संगठनात्मक नियुक्तियों के लिए भी उपयोगी हो सकता है। यदि किसी जाति का राजनीतिक प्रतिनिधित्व अपेक्षाकृत कम पाया जाता है तो पार्टी भविष्य में उसे अधिक अवसर देने पर विचार कर सकती है। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि सर्वे के निष्कर्षों के आधार पर किन नेताओं या समुदायों को सीधे तौर पर राजनीतिक लाभ मिलेगा। फिलहाल इसे संगठनात्मक अध्ययन के तौर पर देखा जा रहा है।
दिवाली से पहले सर्वे पूरा करने की तैयारी
जानकारी के अनुसार बीजेपी इस सर्वे का डेटा दिवाली से पहले जुटाने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रही है। इसके लिए OBC मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष पवन पाटीदार ने प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की सहमति के बाद जिलावार जिम्मेदारियां तय की हैं। अलग-अलग जिलों में संगठन से जुड़े पदाधिकारियों को सर्वे का काम सौंपे जाने की तैयारी है, ताकि प्रदेशभर से जानकारी एकत्र कर उसका विश्लेषण किया जा सके।
2028 विधानसभा चुनाव के लिए अहम माना जा रहा सर्वे
मध्यप्रदेश में 2028 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए इस कवायद की राजनीतिक अहमियत बढ़ जाती है। OBC मतदाता राज्य की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में पार्टी अलग-अलग पिछड़ी जातियों की राजनीतिक भागीदारी और प्रभाव का अध्ययन करके भविष्य की रणनीति को अधिक लक्षित बनाने की कोशिश कर सकती है। संगठन में जिम्मेदारियों से लेकर संभावित चुनावी समीकरणों तक, सर्वे की रिपोर्ट कई स्तरों पर उपयोगी हो सकती है।
प्रस्तावित जातीय जनगणना की पृष्ठभूमि में भी कवायद
बीजेपी के इस आंतरिक सर्वे को केंद्र की प्रस्तावित जातीय जनगणना की पृष्ठभूमि में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जातियों से जुड़ा विस्तृत डेटा राजनीतिक दलों के लिए सामाजिक समीकरण समझने में मददगार हो सकता है। हालांकि पार्टी का यह सर्वे सरकारी जनगणना का विकल्प नहीं होगा। इसका मुख्य उद्देश्य संगठन के भीतर OBC समुदायों के प्रतिनिधित्व और नेतृत्व की स्थिति का आकलन करना बताया जा रहा है।
सरकारी सेवाओं में OBC हिस्सेदारी पर पहले उठे सवाल
मध्यप्रदेश में OBC प्रतिनिधित्व का मुद्दा पहले भी चर्चा में रहा है। पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग की रिपोर्ट के अनुसार सरकारी सेवाओं में OBC कर्मचारियों की हिस्सेदारी 28.16 प्रतिशत बताई गई थी। वहीं, उच्च प्रशासनिक पदों पर पिछड़े वर्ग की भागीदारी अपेक्षाकृत कम होने की बात सामने आई थी। यही वजह है कि सामाजिक और प्रशासनिक प्रतिनिधित्व को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं।
सर्वे के नतीजों से तय हो सकती है आगे की रणनीति
बीजेपी के इस प्रयास का अंतिम असर सर्वे पूरा होने और उसके आंकड़ों के विश्लेषण के बाद ही स्पष्ट होगा। फिलहाल पार्टी अलग-अलग OBC जातियों की राजनीतिक और संगठनात्मक स्थिति का डेटा तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। यदि यह कवायद तय समयसीमा के भीतर पूरी होती है, तो इसके निष्कर्ष आगामी वर्षों में संगठन विस्तार, नेतृत्व चयन और चुनावी रणनीति को प्रभावित कर सकते हैं।
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