मंत्री विजय शाह का मामला: मध्यप्रदेश सरकार का असमंजस, आदिवासी वोट या कोर्ट का फैसला?

 भोपाल  मध्य प्रदेश के जनजातीय कार्य विभाग के मंत्री विजय शाह के कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर दिए गए अमर्यादित बयान के मामले में सुप्रीम कोर्ट के ताजा निर्देश ने प्रदेश सरकार के लिए दुविधा की स्थिति बना दी है। एक तरफ आदिवासी वोट बैंक की चिंता हैं, जो सत्ता के समीकरण बनाने-बिगाड़ने में बड़ी भूमिका निभाता है, तो दूसरी तरफ न्यायपालिका के निर्देश हैं। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार विधि विभाग और महाधिवक्ता से सलाह लेगी। आरोपित मंत्री भी सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू अपील कर सकते हैं। मंत्री को पार्टी ने फटकार भी लगाई बता दें

Wrriten By :

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Published On :

जनवरी 21, 2026

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 भोपाल
 मध्य प्रदेश के जनजातीय कार्य विभाग के मंत्री विजय शाह के कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर दिए गए अमर्यादित बयान के मामले में सुप्रीम कोर्ट के ताजा निर्देश ने प्रदेश सरकार के लिए दुविधा की स्थिति बना दी है। एक तरफ आदिवासी वोट बैंक की चिंता हैं, जो सत्ता के समीकरण बनाने-बिगाड़ने में बड़ी भूमिका निभाता है, तो दूसरी तरफ न्यायपालिका के निर्देश हैं।

इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार विधि विभाग और महाधिवक्ता से सलाह लेगी। आरोपित मंत्री भी सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू अपील कर सकते हैं।

मंत्री को पार्टी ने फटकार भी लगाई

बता दें कि विजय शाह ने ऑ परेशन सिंदूर में सेना के पराक्रम की जानकारी देश-दुनिया के सामने रखने वाली सेना की अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर अमर्यादित बयान दिया था। इससे भाजपा की किरकिरी हुई। मंत्री को पार्टी ने फटकार भी लगाई। उन्होंने पार्टी के निर्देश पर माफी भी मांग ली।

हाई कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया था

इस मामले का हाई कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया था। बाद में मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित एसआइटी ने पूरे मामले की जांच की। अगस्त 2025 में रिपोर्ट सौंपी। एसआइटी की इसी रिपोर्ट में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को दो सप्ताह में अभियोजन पर निर्णय लेने का निर्देश दिया है।

सरकार के स्तर पर दुविधा की स्थिति

इसके साथ ही शाह के अन्य विवादित बयानों की जांच करने के लिए भी कहा गया। सूत्रों का कहना है कि सरकार के स्तर पर अभी इस मामले में दुविधा की स्थिति है। कोर्ट के निर्देशानुसार यदि अभियोजन के मामले में कार्रवाई बढ़ाई जाती है तो सरकार के लिए अजीब स्थिति बन जाएगी। उन्हें मंत्रिमंडल में बनाए रखना परेशानी का कारण बनेगा, इसलिए इस संबंध में पहले सभी कानूनी पहलुओं को देखा जाएगा।

यही कारण है कि कानूनी सलाह के लिए प्रकरण विधि विभाग और महाधिवक्ता के पास भेज रहा है। दोनों के अभिमत के आधार पर आगामी निर्णय लिया जाएगा। वहीं, आरोपित मंत्री मंत्री विजय शाह भी सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के विरुद्ध अपील करने के लिए कानूनी मशविरा ले रहे हैं।

महिलाओं के सम्मान से कोई समझौता स्वीकार नहीं विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सोशल मीडिया पर लिखा- सेना की अधिकारी, देश की बेटी और राष्ट्र के सम्मान पर हमला हुआ, लेकिन भाजपा सरकार महीनों तक SIT की रिपोर्ट दबाए बैठी रही। यह कोई एक बयान नहीं, बल्कि सत्ता संरक्षण में पनपती असंवेदनशील और घृणित मानसिकता का उदाहरण है।

देश की सुरक्षा में तैनात हमारी बहन के प्रति ऐसी ओछी सोच रखने वाले मंत्री विजय शाह से मुख्यमंत्री को तत्काल इस्तीफा लेकर पार्टी के सभी दायित्वों से मुक्त करना चाहिए। देश की सेना और महिलाओं के सम्मान से कोई समझौता स्वीकार नहीं। कानून सबके लिए बराबर है, मंत्री के लिए भी।

विजय शाह ने पिछले साल महू में दिया था बयान 11 मई को इंदौर के महू के रायकुंडा गांव में आयोजित कार्यक्रम में मंत्री विजय शाह संबोधित कर रहे थे। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर कहा था- 'उन्होंने (आतंकियों ने) कपड़े उतार-उतार कर हमारे हिंदुओं को मारा और मोदी जी ने उनकी बहन को उनकी ऐसी की तैसी करने उनके घर भेजा।'

शाह ने आगे कहा- 'अब मोदी जी कपड़े तो उतार नहीं सकते। इसलिए उनकी समाज की बहन को भेजा कि तुमने हमारी बहनों को विधवा किया है, तो तुम्हारे समाज की बहन आकर तुम्हें नंगा करके छोड़ेगी। देश का मान-सम्मान और हमारी बहनों के सुहाग का बदला तुम्हारी जाति, समाज की बहनों को पाकिस्तान भेजकर ले सकते हैं।'

सत्ता के समीकरण साधने के लिए महत्वपूर्ण है आदिवासी वोट बैंक

प्रदेश में अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए विधानसभा की 47 सीटें और लोकसभा की चार सीटें सुरक्षित हैं। 2018 में जब आदिवासी मतदाताओं का झुकाव भाजपा के स्थान पर कांग्रेस की ओर हुआ था तो 15 वर्ष बाद कमल नाथ के नेतृत्व में सरकार बनी थी।

भाजपा ने इस वर्ग को साधने के लिए काफी प्रयास किए और 2023 में यह भाजपा के पक्ष में लौटा तो पार्टी की सरकार बनी। छिंदवाड़ा जैसा कांग्रेस का किला भी भाजपा ने इन्हीं आदिवासी मतदाताओं के दम पर ढहाया। ऐसे में जब कांग्रेस ने दलित एजेंडे पर काम शुरू कर दिया है तो आदिवासी मंत्री विजय शाह के विरुद्ध कार्रवाई को लेकर सत्ता और संगठन दुविधा में है।

सरकार के पास कोई विकल्प नहीं

पूर्व अतिरिक्त महाधिवक्ता अजय मिश्रा का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर रिव्यू अपील की जा सकती है, लेकिन इसमें राहत मिलने की संभावना नहीं है। सरकार के पास कार्रवाई करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। यदि कार्रवाई नहीं की जाती है तो अवमानना का मामला बन जाएगा।

जहां तक अभियोजन की स्वीकृति पर मंत्री पद छोड़ने की है तो यह नैतिकता से जुड़ा मामला है। उन्होंने जो बयान दिया, वह मंत्री के तौर पर किए गए कार्य से इतर है। 

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