Milk Price Hike: जम्मू-कश्मीर के लोगों को जून महीने की शुरुआत महंगाई के एक और झटके के साथ करनी पड़ी है। डेयरी उत्पादों की बढ़ती लागत और पशुपालन से जुड़े खर्चों में लगातार हो रही वृद्धि को देखते हुए दूध की कीमतों में इजाफा कर दिया गया है। अब उपभोक्ताओं को दूध खरीदने के लिए पहले की तुलना में अधिक राशि खर्च करनी होगी। नई दरें 1 जून से प्रभावी हो गई हैं और पूरे क्षेत्र में लागू की जा रही हैं।
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डेयरी किसानों पर बढ़ते खर्च का असर
दूध की कीमतों में यह बढ़ोतरी जम्मू-कश्मीर डेयरी फार्मर्स एसोसिएशन (JKDFA) द्वारा की गई है। एसोसिएशन का कहना है कि बीते कुछ समय में पशुओं के चारे, दवाइयों, परिवहन और अन्य आवश्यक संसाधनों की लागत में लगातार वृद्धि हुई है। इन बढ़ते खर्चों के कारण डेयरी किसानों और दूध आपूर्तिकर्ताओं के लिए पुराने रेट पर कारोबार जारी रखना कठिन हो गया था।
इसी स्थिति को ध्यान में रखते हुए सभी प्रकार के दूध की कीमत में समान रूप से 5 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी करने का फैसला लिया गया। एसोसिएशन के अनुसार यह निर्णय डेयरी उद्योग से जुड़े लोगों के हितों को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक था।
नई कीमतों के अनुसार कितना महंगा हुआ दूध?
नई दरों के लागू होने के बाद जम्मू शहर में विभिन्न श्रेणियों के दूध की कीमतें बढ़ गई हैं। अब फुल क्रीम दूध 72 रुपये प्रति लीटर में मिलेगा। वहीं गाय के दूध की कीमत बढ़कर 62 रुपये प्रति लीटर हो गई है। इसके अलावा टोन्ड दूध के लिए उपभोक्ताओं को 60 रुपये प्रति लीटर चुकाने होंगे, जबकि डबल टोन्ड दूध की नई कीमत 54 रुपये प्रति लीटर निर्धारित की गई है। इन नई दरों के साथ आम लोगों के दैनिक खर्च में बढ़ोतरी होना तय माना जा रहा है।
अलग-अलग क्षेत्रों में कीमतें हो सकती हैं भिन्न
एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि जम्मू और कश्मीर संभाग के विभिन्न क्षेत्रों में दूध की कीमतें स्थानीय परिस्थितियों, परिवहन लागत और आपूर्ति व्यवस्था के आधार पर कुछ अलग हो सकती हैं। इसलिए ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में उपभोक्ताओं को अलग-अलग दरों का सामना करना पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि दुर्गम क्षेत्रों में परिवहन खर्च अधिक होने के कारण वहां दूध की कीमतों में और ज्यादा अंतर देखने को मिल सकता है।
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ग्रामीण और शहरी उपभोक्ताओं पर पड़ेगा प्रभाव
कश्मीर घाटी में इस बढ़ोतरी से पहले दूध की औसत कीमत लगभग 54 रुपये प्रति लीटर थी। ग्रामीण इलाकों में दूध अपेक्षाकृत सस्ता मिलता था, जबकि शहरों और बड़े कस्बों में इसकी कीमत अधिक रहती थी। अब नई दरें लागू होने के बाद ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के लोगों को अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ेगा। विशेष रूप से ऐसे परिवार जिनमें बच्चों और बुजुर्गों की संख्या अधिक है, उनके मासिक बजट पर इसका सीधा असर पड़ सकता है क्योंकि दूध उनकी दैनिक जरूरत का अहम हिस्सा है।
बढ़ती महंगाई के बीच उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ी
दूध की कीमतों में यह वृद्धि ऐसे समय पर हुई है जब आम जनता पहले से ही बढ़ती महंगाई का सामना कर रही है। खाद्य सामग्री, ईंधन, दवाइयों और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतें पहले ही लोगों की जेब पर बोझ बढ़ा चुकी हैं। ऐसे में दूध जैसी रोजमर्रा की जरूरत की वस्तु का महंगा होना उपभोक्ताओं के लिए नई चुनौती बन सकता है। कई परिवारों को अब अपने घरेलू बजट में बदलाव करना पड़ सकता है ताकि बढ़े हुए खर्चों का संतुलन बनाया जा सके।
डेयरी क्षेत्र के लिए जरूरी
हालांकि डेयरी किसान इस फैसले को अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए जरूरी बता रहे हैं, लेकिन उपभोक्ताओं के लिए यह फैसला राहत की खबर नहीं है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि दूध की बढ़ी हुई कीमतों का बाजार और उपभोक्ताओं की खरीदारी पर कितना असर पड़ता है।
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