
UP Election 2027: उत्तर प्रदेश की राजनीति को समझने का पहला नियम है कि,यहां लोकतंत्र का महासमर केवल नारों या वादों पर नहीं, बल्कि हर एक विधानसभा सीट के ऐतिहासिक मिजाज और वहां के सूक्ष्म जातीय गणित से तय होता है। 403 सीटों वाली इस विधानसभा के इतिहास पर नजर डालें तो साफ दिखता है……प्रदेश की सियासी जमीन पर कोई भी जीत किसी एक बड़े लहर के भरोसे नहीं आती; बल्कि पूर्वांचल के बाहुबल और गोलबंदी से लेकर पश्चिम उत्तर प्रदेश के किसान आंदोलन और गैर-यादव ओबीसी (OBC) समीकरणों तक—हर क्षेत्र का अपना एक अलग सामाजिक और ऐतिहासिक इतिहास रहा है।
BJP का सोशल इंजीनियरिंग फॉर्मूला बनाम SP का PDA दांव,
आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों ने अपने-अपने पारंपरिक और नए सामाजिक फॉर्मूलों को धार देनी शुरू कर दी है। एक तरफ भारतीय जनता पार्टी अपने हिंदुत्व के व्यापक छतरी तंत्र, विकास के दावों, चुस्त कानून-व्यवस्था और गैर-यादव ओबीसी तथा गैर-जाटव दलितों के सोशल इंजीनियरिंग गठबंधन के बल पर अपनी बढ़त को दोहराने का दांव चल रही है। वहीं दूसरी तरफ, समाजवादी पार्टी अपने ‘PDA’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले और सीट-वार सटीक जातिगत आंकड़ों के जरिए बीजेपी के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगाकर 2024 लोकसभा चुनाव के नतीजों को विधानसभा में तब्दील करने की पूरी ताकत झोंक रही है।

पश्चिम उत्तर प्रदेश के राजनीति के केंद्र ‘मेरठ जिला’ की मेरठ दक्षिण राजनीतिक रूप से काफी संवेदनशील और महत्वपूर्ण मानी जाती है।आगामी 2027 उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के परिदृश्य में यह सीट भाजपा और विपक्षी ‘इंडिया गठबंधन’ (सपा-कांग्रेस) दोनों के लिए साख का विषय बनी हुई है।
भौगोलिक क्षेत्र और बुनियादी स्थिति
मेरठ दक्षिण सीट का स्वरूप मिला-जुला है। जहां मेरठ शहर की दो अन्य सीटें (शहर और कैंट) पूरी तरह शहरी हैं, वहीं मेरठ दक्षिण में शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्र शामिल हैं।
शहरी व ग्रामीण अनुपात: लगभग 88.16% मतदाता शहरी और 11.84% ग्रामीण क्षेत्रों से आते हैं।
मुख्य क्षेत्र: मेरठ नगर निगम के 18 वार्ड, मेरठ कानूनगो सर्कल के अंतर्गत आने वाले कई प्रमुख गांव और हाल ही में विकसित हुए रिहायशी इलाके इसमें शामिल हैं।
मतदाताओं की कुल संख्या

यह सीट मेरठ जिले की सबसे बड़ी विधानसभा सीटों में से एक है। हालिया मतदाता सूचियों के अनुसार मतदाता आंकड़े इस प्रकार हैं:
| वर्ष/चुनाव | कुल मतदाता | पुरुष मतदाता | महिला मतदाता | मतदान प्रतिशत (%) |
| 2012 विधानसभा | ~3,54,863 | 1,95,930 | 1,58,914 | 61.57% |
| 2017 विधानसभा | ~4,28,854 | 2,37,111 | 1,91,722 | 63.15% |
| 2022 विधानसभा | ~4,81,365 | 2,61,661 | 2,19,682 | 62.01% |
| 2024 (लोकसभा अनुमान) | ~4,97,855 | — | — | 57.36% |
पिछले तीन विधानसभा चुनावों का चुनावी लेखा–जोखा (2012 से 2022)
परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई इस सीट पर भारतीय जनता पार्टी का लगातार वर्चस्व रहा है, हालांकि 2022 में जीत का अंतर काफी कम हो गया।
- [2012: भाजपा जीती (+9,784 वोट)]
- [2017: भाजपा जीती (+35,395 वोट)]
- [2022: भाजपा जीती (+7,942 वोट)]
2012 विधानसभा चुनाव
विजेता: रवींद्र भड़ाना (BJP) – 71,584 वोट (32.79%)
उपविजेता: हाजी राशिद अखलाक (BSP) – 61,800 वोट (28.31%)
तीसरा स्थान: आदिल (SP) – 49,103 वोट (22.49%)
2017 विधानसभा चुनाव
विजेता: डॉ. सोमेंद्र सिंह तोमर (BJP) – 1,13,225 वोट (41.81%)
उपविजेता: हाजी मोहम्मद याकूब (BSP) – 77,830 वोट (28.74%)
तीसरा स्थान: मोहम्मद आजाद सैफी (INC – सपा गठबंधन) – 69,117 वोट (25.52%)
2022 विधानसभा चुनाव
विजेता: डॉ. सोमेंद्र सिंह तोमर (BJP) – 1,29,667 वोट (43.46%)
उपविजेता: मोहम्मद आदिल (SP) – 1,21,725 वोट (40.79%)
तीसरा स्थान: दिलशाद अली (BSP) – 39,857 वोट (13.36%)
भारतीय जनता पार्टी
डॉ. सोमेंद्र सिंह तोमर: योगी सरकार में राज्य मंत्री और वर्तमान विधायक सोमेंद्र तोमर लगातार दो बार (2017, 2022) यहां से चुनाव जीत चुके हैं। टिकट के लिए वह स्वाभाविक रूप से पहले दावेदार हैं।

विकल्प व अन्य दावेदार: स्थानीय स्तर पर गुटबाजी रोकने या एंटी-इंकंबेंसी से निपटने के लिए भाजपा किसी अन्य ओबीसी या क्षत्रिय/वैश्य चेहरे पर भी विचार कर सकती है।
समाजवादी पार्टी (SP – इंडिया गठबंधन)
मोहम्मद आदिल: 2022 में बेहद नजदीकी मुकाबले (मात्र 7.9k वोटों का अंतर) में हारने वाले आदिल का दावा सबसे मजबूत माना जा रहा है।
स्थानीय मुस्लिम व दलित चेहरे: यदि पार्टी गठबंधन के तहत या पीडीए रणनीति के आधार पर किसी हिंदू चेहरे (जैसे जाट या गुर्जर प्रत्याशी) को उतारती है, तो समीकरण बदल सकते हैं।
बहुजन समाज पार्टी
बसपा का यहां अपना पारंपरिक कैडर वोट (लगभग 40 हजार से 75 हजार) रहा है। बसपा 2027 में किसी मजबूत मुस्लिम या दलित प्रत्याशी पर दांव लगा सकती है जो मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने का काम करेगा।
मेरठ दक्षिण विधानसभा की प्रमुख समस्याएं
मेरठ दक्षिण सीट से भाजपा के डॉ. सोमेंद्र तोमर लगातार दूसरी बार विधायक हैं और वर्तमान में योगी सरकार में राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) हैं। हालांकि, स्थानीय जनता को आज भी कई गंभीर समस्याओं से जूझना पड़ रहा है:
जलभराव और उफनते नाले

दिल्ली रोड, माधवपुरम (सेक्टर-3) और स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स/मोहकमपुर औद्योगिक क्षेत्र में मामूली बारिश होते ही जलभराव की स्थिति बन जाती है। नाले-नालियां जर्जर और ओवरफ्लो हैं। बारिश के समय औद्योगिक इकाइयों में पानी भरने से लाखों रुपये का नुकसान होता है।
पेयजल संकट और दूषित पानी

लिसाड़ी, जयभीम नगर और प्रताप विहार जैसे इलाकों में गर्मियों में पेयजल का भीषण संकट गहरा जाता है। काली नदी के तटवर्ती क्षेत्रों में रहने वाली बड़ी आबादी दूषित पानी पीने को मजबूर है। सीवर निकासी का कोई ठोस इंतजाम नहीं होने से बीमारियां फैलने का डर बना रहता है।
बिजली बंबा बाईपास रोड चौड़ीकरण अटका

लंबे समय से बिजली बंबा बाईपास रोड के चौड़ीकरण का वादा किया जा रहा है। संकरी सड़क होने और भारी यातायात के कारण यहां रोज दुर्घटनाएं और भीषण जाम की स्थिति बनती है।
प्रस्तावित इनर रिंग रोड का अधूरा काम
वेदव्यासपुरी से हापुड़ रोड (जुर्रानपुर होते हुए) तक प्रस्तावित इनर रिंग रोड का निर्माण कार्य धरातल पर शुरू नहीं हो पाया है। जागृति विहार एक्सटेंशन रोड का अधूरा निर्माण भी राहगीरों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है।
औद्योगिक व ग्रामीण विकास की उपेक्षा
परतापुर, रिठानी, शंकर नगर और पूठा जैसे क्षेत्र शहरी सीमा में आने के बाद भी बुनियादी नागरिक सुविधाओं (स्ट्रीट लाइट, सीवर लाइन, पक्की सड़कें) के लिए तरस रहे हैं।
2027 में किसका पलड़ा भारी?
वोटर प्रोफाइल: मेरठ दक्षिण एक मिला-जुला (88% शहरी, 12% ग्रामीण) इलाका है। यहाँ हिंदू-मुस्लिम आबादी का संतुलन है, जहाँ लगभग 20.78% अनुसूचित जाति (SC) के मतदाता हैं। साथ ही वैश्य, जाट और गुर्जर मतदाताओं का प्रभाव भी निर्णायक साबित होता है।
2022 का परिणाम: 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के डॉ. सोमेंद्र तोमर ने सपा के मोहम्मद आदिल को 7,942 वोटों के बहुत कड़े मुकाबले में हराया था।
2027 का रुझान: 2027 में मुकाबला बेहद दिलचस्प होगा। यदि बसपा या ओवैसी की AIMIM प्रत्याशी उतारकर मुस्लिम या दलित वोटों में सेंध लगाती है, तो भाजपा को सीधा फायदा मिल सकता है। वहीं, अगर सपा-कांग्रेस गठबंधन एंटी-इन्कंबेंसी और स्थानीय विकास के मुद्दों को एकजुट होकर भुनाने में सफल रहता है, तो सीट का नतीजा पलट भी सकता है।











