UP Politics: ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के समर्थन में मायावती, सरकारों को दी सख्त चेतावनी

बसपा प्रमुख मायावती ने देशभर में चल रहे ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान का समर्थन करते हुए सरकारी स्कूलों की बदहाली पर केंद्र और राज्य सरकारों को घेरा। उन्होंने भवन, शिक्षक, पानी, शौचालय और साफ-सफाई जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी पर चिंता जताई। मायावती ने सरकारों से बच्चों की मांगें सुनने और आंदोलन के दौरान बल प्रयोग से बचने की अपील की।

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Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अगस्त 20, 2026

UP Politics: बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने देशभर में चल रहे ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान का समर्थन किया है। उन्होंने सरकारी स्कूलों की मौजूदा स्थिति को लेकर केंद्र और राज्य सरकारों पर सवाल उठाते हुए तत्काल सुधार की जरूरत बताई। मायावती ने कहा कि जेन-अल्फा यानी वर्ष 2013 के बाद जन्मे बच्चों की शिक्षा और उनके स्कूलों की बुनियादी सुविधाएं अब गंभीर चिंता का विषय बन गई हैं। खासकर उत्तर प्रदेश और उत्तर भारत के कई राज्यों में सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर उन्होंने चिंता जताई।

सरकारी स्कूलों की बदहाली पर मायावती ने जताई चिंता

बताते चले कि, मायावती ने कहा कि जिन बच्चों की उम्र पढ़ने, सीखने और अपने भविष्य को संवारने की है, उन्हें स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। कई जगहों पर स्कूल भवन, पर्याप्त शिक्षक, पीने का पानी, शौचालय और साफ-सफाई जैसी जरूरी सुविधाओं की कमी की शिकायतें सामने आती रही हैं। बसपा प्रमुख के मुताबिक, बच्चों को इन मूलभूत जरूरतों के लिए आंदोलन और प्रदर्शन का रास्ता अपनाना पड़े, यह किसी भी सभ्य समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

बच्चों की शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं से खिलवाड़ न करने की अपील

बसपा प्रमुख ने राज्य सरकारों से अपील की कि बच्चों की शिक्षा और उनकी मूलभूत जरूरतों को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि छोटे बच्चों और उनके माता-पिता को स्कूलों की खराब व्यवस्था के खिलाफ सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। मायावती ने सरकारों से संवेदनशीलता और गंभीरता के साथ इस समस्या का समाधान करने की मांग की, ताकि बच्चों को बेहतर शैक्षणिक माहौल मिल सके।

डॉ. अंबेडकर के ‘शिक्षित बनो’ संदेश का मायावती ने किया जिक्र

मायावती ने बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के ‘शिक्षित बनो’ के संदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा बहुजन समाज के लिए हमेशा महत्वपूर्ण रही है। उन्होंने दावा किया कि बसपा सरकारों के कार्यकाल में उत्तर प्रदेश में शिक्षा को विशेष प्राथमिकता दी गई थी। उनका कहना है कि वंचित, कमजोर और शोषित वर्ग के बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराना सामाजिक बराबरी और सम्मान की दिशा में अहम कदम है।

सरकारी स्कूलों की अनदेखी पर केंद्र और राज्य सरकारों को घेरा

मायावती ने आरोप लगाया कि केंद्र और विभिन्न राज्यों की सरकारों ने सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधारने के बजाय लंबे समय तक उनकी अनदेखी की है। उन्होंने कहा कि सरकारी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के बजाय इसे कमजोर किए जाने की स्थिति दिखाई दे रही है। बसपा प्रमुख ने दावा किया कि इसका सबसे ज्यादा असर गरीब और वंचित परिवारों के बच्चों पर पड़ता है, जिनके लिए सरकारी स्कूल शिक्षा का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम हैं।

सरकारी स्कूल बंद होने के आरोप पर मायावती का हमला

बसपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि देश में बड़ी संख्या में सरकारी स्कूलों को बंद किया जा रहा है। उन्होंने इस प्रक्रिया की तुलना आरक्षण व्यवस्था को कमजोर करने के कथित प्रयासों से करते हुए कहा कि शिक्षा व्यवस्था को भी निष्क्रिय करने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। मायावती ने कहा कि बसपा ने सरकारी स्कूलों को बंद करने के किसी भी प्रयास का हमेशा विरोध किया है और आगे भी शिक्षा के अधिकार से जुड़े मुद्दों पर आवाज उठाती रहेगी।

जेन-अल्फा बच्चों के आंदोलन को मायावती ने बताया महत्वपूर्ण संकेत

मायावती ने कहा कि अब जेन-अल्फा के बच्चे खुद स्कूलों की बदहाल व्यवस्था को लेकर आवाज उठा रहे हैं। उनके मुताबिक, बच्चों और उनके अभिभावकों का सड़कों पर आना सरकारों के लिए एक गंभीर संकेत है। उन्होंने कहा कि इसे केवल प्रदर्शन के तौर पर देखने के बजाय सरकारों को इसके पीछे की वास्तविक समस्याओं को समझना चाहिए और स्कूलों की व्यवस्था में ठोस सुधार करना चाहिए।

‘स्कूल ठीक करो’ आंदोलन में बल प्रयोग से बचें सरकारें

मायावती ने यूपी समेत सभी राज्य सरकारों से आंदोलन कर रहे बच्चों और उनके अभिभावकों के खिलाफ बल प्रयोग नहीं करने की अपील की। उन्होंने कहा कि शिक्षा से जुड़ी मांगों को सहानुभूति और सकारात्मक सोच के साथ सुना जाना चाहिए। उनके मुताबिक, लोकतंत्र में शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रखना नागरिकों का अधिकार है और सरकारों को संविधान की भावना के अनुरूप संवेदनशील रवैया अपनाना चाहिए।

सरकारी शिक्षा व्यवस्था पर बढ़ा दबाव, अब सरकारों की परीक्षा

मायावती के इस बयान के बाद सरकारी स्कूलों की स्थिति और बच्चों की शिक्षा का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गया है। ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के जरिए उठाए जा रहे सवालों के बीच सरकारों के सामने स्कूल भवन, शिक्षक, पानी, शौचालय और स्वच्छता जैसी बुनियादी सुविधाओं को लेकर जवाबदेही का सवाल खड़ा हो गया है। अब देखना होगा कि सरकारें इन मांगों पर क्या कदम उठाती हैं।