UP Election 2027: यूपी में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष दमदार गठबंधन बनाने में जुटे हुआ है। जहां भाजपा अपने गठबंधन एनडीए के लिए अपना दल, रालोद, सुभासपा और निषाद पार्टी जैसे सहयोगियों के साथ मैदान में है। यूपी में मुख्य विपक्षी दल सपा का कांग्रेस के साथ संभावित गठबंधन में सीटों के बंटवारे को लेकर लगातार रस्साकशी सामने आ रही है। कांग्रेस जहां बराबरी से सीटों का बंटवारा करने की बात कह रही है तो वही सपा मुखिया अखिलेश यादव जीतने की क्षमता की बात कह रहे है। प्रदेश कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम 200 सीटों पर दावा कर रहे है। गौतम के बयान सियासी पारे को लगातार बढ़ा रहे है। गौतम साफ कह रहे है कि अगर अखिलेश को गठबंधन नहीं करना है तो साफ मना कर दें।
100 कमजोर सीटों के साथ 86 सुरक्षित सीटों पर कांग्रेस का बड़ा दावा

अब कांग्रेस ने सपा मुखिया की बात को ही आधार बनाते हुए कहा है कि वर्ष 2007 से लेकर अब तक यूपी की 100 विधानसभा सीटे ऐसी है जहां सपा लगातार हार रही हैं। कांग्रेस इन 100 सीटों पर दावेदारी कर रही है। इसके साथ ही कांग्रेस यूपी में 86 सुरक्षित विधानसभा सीटों पर भी अपना दावा कर रही है। इनमे से 84 अनुसूचित जाति और 2 अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है। वर्ष 2022 के चुनाव में सपा इनमे से केवल 16 सीटे सपा के खाते में आयी थी। जबकि भाजपा ने 65 विधानसभा सीटे अपने नाम कर ली थी। कांग्रेस का दावा है कि बीते लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के कारण ही दलित वोट गठबंधन को मिला था। जिसका नतीजा यह हुआ कि सपा को 37 लोकसभा सीटों पर जीत मिली।
2027 से 2029 तक कांग्रेस का मिशन

सपा और कांग्रेस के इस चुनावी गठबंधन केवल यूपी विधानसभा चुनाव का पेंच ही नहीं है बल्कि आगामी लोकसभा चुनाव से जुड़ा पेंचोखम भी है। कांग्रेस इन सीटों पर दावा केवल सीट बंटवारे के लिए नहीं कर रही है। उसका निशाना 2029 के लोकसभा चुनाव के लिए यूपी में कांग्रेस का आधार मजबूत करना है। दरअसल, कांग्रेस रणनीतिकारों का मानना है कि मायावती के सियासी तौर पर सक्रिय न होने के कारण दलितों का एक बड़ा वर्ग असमंजस की स्थिति में है। यूपी के गांव-देहात में दलितों के ज्यादातर विवाद यादव या मुस्लिमों के साथ ही है।
ये दोनों ही सपा का आधार वोट बैंक है। ऐसे में दलित सपा के पाले में जाने से गुरेज करता हैं। अगर प्रदेश में कांग्रेस ने अपनी मजबूती नहीं की तो यह दलित वोट भाजपा का रूख कर लेगा। इन हालातों में अगर कांग्रेस मजबूती के साथ इन सुरक्षित सीटों पर चुनाव लड़ती है तो यूपी में खो चुकी अपनी सियासी जमीन भी वापस पा सकती हैं और 2029 के लोकसभा चुनाव में यूपी में भाजपा को चुनौती देने की हैसियत में आ सकती है।










