UP News: हिजाब विवाद में मायावती की एंट्री, बोली- संकीर्ण राजनीति का मौका न मिले

बसपा सुप्रीमो मायावती ने हिजाब और पर्दा विवाद को संवेदनशीलता से देखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि स्कूलों में यूनिफॉर्म, हिजाब, चादर या पर्दे से जुड़े मामलों को कोर्ट-कचहरी का विवाद बनाने के बजाय स्कूल प्रबंधन और प्रशासन की आपसी समझ से सुलझाया जाए। मायावती ने बदायूं के आंबेडकर प्रतिमा विवाद का शांतिपूर्ण समाधान निकालने की भी मांग की।

UP News

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

अगस्त 26, 2026

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UP News: बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने महिलाओं की अस्मिता, सम्मान और आत्मसम्मान से जुड़े मुद्दों को संवेदनशीलता के साथ देखने की अपील की है। बुधवार को जारी बयान में उन्होंने स्कूलों में यूनिफॉर्म, पर्दा, चादर और हिजाब जैसे पहनावे से जुड़े विवादों को लेकर कहा कि ऐसे मामलों को अनावश्यक रूप से तूल देने के बजाय आपसी समझ से सुलझाया जाना चाहिए।

स्कूलों में हिजाब और यूनिफॉर्म विवाद को लेकर मायावती की अपील

मायावती ने कहा कि स्कूलों में यूनिफॉर्म, पर्दा, चादर या हिजाब पहनने को लेकर विवाद पैदा होने पर उसे तुरंत राजनीतिक या कानूनी टकराव का विषय बनाने के बजाय स्कूल प्रबंधन, शासन और प्रशासन के बीच बातचीत से समाधान तलाशना चाहिए। उनका कहना है कि इससे किसी भी पक्ष को इस मुद्दे की आड़ में संकीर्ण राजनीति करने का अवसर नहीं मिलेगा।

बसपा सुप्रीमो ने महिलाओं के आत्मसम्मान और स्वाभिमान से जुड़े मामलों को गंभीरता से लेने की बात कही। उन्होंने कहा कि किसी भी संवेदनशील विषय पर फैसला लेते समय संबंधित पक्षों की भावनाओं और अधिकारों का ध्यान रखा जाना जरूरी है।

धार्मिक स्वतंत्रता और संविधान पर मायावती ने क्या कहा?

मायावती ने अपने बयान में संविधान का हवाला देते हुए कहा कि भारतीय संविधान देश के लोगों को एकता के सूत्र में जोड़कर मजबूत भारत बनाने की गारंटी देता है। उन्होंने कहा कि देश में सभी धर्मों के लोगों को अपने धार्मिक ग्रंथों, रीति-रिवाजों और मान्यताओं के आधार पर शांतिपूर्ण जीवन जीने का अधिकार प्राप्त है।

सभी धर्मों की मान्यताओं का सम्मान जरूरी: बसपा प्रमुख

बसपा अध्यक्ष ने कहा कि धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं के मामलों में अनावश्यक दखल देने के बजाय उनकी पवित्रता और भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने लोगों से अपील की कि धर्म, धार्मिक ग्रंथों और धार्मिक प्रचलनों से जुड़े संवेदनशील विषयों पर टिप्पणी करने से बचना देश और जनहित में बेहतर होगा।

मायावती ने बसपा को सर्वसमाज के सम्मान, जान-माल की सुरक्षा और धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी देने वाली आंबेडकरवादी पार्टी बताया। उन्होंने कहा कि पार्टी सभी समुदायों के अधिकारों और सम्मान की सुरक्षा की बात करती है।

धर्म और धार्मिक मान्यताओं पर टिप्पणी से बचने की अपील

मायावती ने कहा कि भारत जैसे विविधता वाले देश में अलग-अलग धर्मों और समुदायों की अपनी मान्यताएं और परंपराएं हैं। ऐसे संवेदनशील मुद्दों को राजनीतिक बयानबाजी या विवाद का विषय बनाने से सामाजिक तनाव बढ़ सकता है।

मायावती बोलीं- संवेदनशील मामलों में संयम जरूरी

बसपा सुप्रीमो ने कहा कि किसी भी धर्म, धार्मिक ग्रंथ या धार्मिक प्रचलन से जुड़े मामलों पर सभी पक्षों को संयम बरतना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि विवादों को बढ़ाने के बजाय संवाद और आपसी सहमति के जरिए समाधान निकालना ज्यादा उचित रास्ता है।उनके मुताबिक, ऐसे मामलों में जिम्मेदार रवैया अपनाने से समाज में शांति और भाईचारे का माहौल बनाए रखने में मदद मिलेगी।

बदायूं की घटना पर भी मायावती ने सरकार से की अपील

मायावती ने अपने बयान में बदायूं में डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा स्थापित करने को लेकर चल रहे विवाद का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस मामले में तनाव की स्थिति को देखते हुए शासन और प्रशासन को तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए।

आंबेडकर प्रतिमा विवाद का शांतिपूर्ण समाधान निकालने की मांग

बसपा अध्यक्ष ने बदायूं प्रशासन से विवाद का उचित और शांतिपूर्ण समाधान निकालने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रशासन को ऐसा रास्ता तलाशना चाहिए जिससे तनाव समाप्त हो और किसी भी पक्ष की भावनाएं आहत न हों।

मायावती ने कहा कि संवेदनशील मामलों में प्रशासन की भूमिका निष्पक्ष और प्रभावी होनी चाहिए। उनका जोर इस बात पर रहा कि विवाद को बढ़ाने के बजाय बातचीत और उचित प्रशासनिक कार्रवाई के जरिए समाधान निकाला जाए।

मायावती के बयान से क्या संदेश गया?

मायावती के बयान में एक तरफ स्कूलों में हिजाब, पर्दा और यूनिफॉर्म विवाद को बातचीत के जरिए सुलझाने पर जोर दिया गया, वहीं दूसरी तरफ धार्मिक मान्यताओं और संवेदनशील सामाजिक मुद्दों पर संयम बरतने की अपील की गई। साथ ही बदायूं में आंबेडकर प्रतिमा से जुड़े विवाद को भी शांतिपूर्ण तरीके से हल करने की मांग उठाई गई।

बसपा प्रमुख ने अपने बयान के जरिए संवेदनशील धार्मिक और सामाजिक मामलों को राजनीतिक टकराव से दूर रखते हुए प्रशासनिक स्तर पर संवाद और समाधान की जरूरत पर जोर दिया है।

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