UP Politics: लखनऊ स्थित जय प्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर (JPNIC) को निजी कंपनियों को 30 साल की लीज पर देने के उत्तर प्रदेश सरकार के फैसले के बाद सियासी विवाद तेज हो गया है। योगी आदित्यनाथ सरकार के कैबिनेट ने जेपीएनआईसी को निजी हाथों में सौंपने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इस फैसले पर समाजवादी पार्टी ने कड़ा विरोध जताते हुए सरकार की नीयत पर सवाल उठाए हैं।
शिवपाल यादव ने JPNIC लीज फैसले पर उठाए सवाल
बताते चले कि, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल सिंह यादव ने जेपीएनआईसी को निजी कंपनियों को लीज पर देने के फैसले का विरोध किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट के जरिए योगी सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि सरकार निजीकरण के नाम पर सरकारी संपत्ति से निजी लाभ का रास्ता तैयार कर रही है।
शिवपाल यादव ने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा सरकार का दावा है कि JPNIC को बेचा नहीं गया, बल्कि 30 साल के लिए ‘अपनों’ को सौंप दिया गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि जनता के पैसे से तैयार की गई संपत्ति का संचालन निजी हाथों में सौंपना आखिर किस तरह का विकास मॉडल है।
JPNIC पर शिवपाल यादव का हमला
आपको बता दे कि, शिवपाल यादव ने अपने बयान में कहा कि जनता के पैसे से बनी संपत्ति और जनता के नाम पर तैयार की गई व्यवस्था से होने वाले लाभ का रास्ता निजी हाथों के लिए खोला जा रहा है। उन्होंने सरकार के इस फैसले पर सवाल उठाते हुए इसे निजीकरण की आड़ में भ्रष्टाचार से जुड़ा मॉडल बताया।
‘सरकारी संपत्ति, निजी कमाई’ मॉडल पर सपा का निशाना
सपा नेता ने सवाल किया कि क्या सरकारी संपत्ति को लंबे समय के लिए निजी कंपनियों को सौंप देना ही विकास है। उन्होंने कहा कि जनता सरकार के फैसलों को देख रही है और भ्रष्टाचार के खिलाफ जागरूक भी हो रही है। शिवपाल यादव के इस बयान के बाद JPNIC को लेकर सत्तारूढ़ भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच राजनीतिक बहस और तेज होने के आसार हैं।
इकरा हसन ने भी JPNIC को निजी हाथों में देने का किया विरोध
कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन ने भी JPNIC को निजी कंपनियों को सौंपने के फैसले पर आपत्ति जताई है। उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार खुद विकास कार्य करने के बजाय कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को निजी हाथों में देने का रास्ता अपना रही है।
सपा सांसद इकरा हसन ने योगी सरकार पर साधा निशाना
इकरा हसन ने आरोप लगाया कि केंद्र और राज्य सरकार के स्तर पर इस तरह के फैसले लगातार देखने को मिल रहे हैं। उन्होंने JPNIC के निजीकरण के फैसले को लेकर सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और कहा कि जनता से जुड़ी महत्वपूर्ण संपत्तियों के संबंध में पारदर्शिता जरूरी है।
अखिलेश यादव का ड्रीम प्रोजेक्ट है JPNIC
लखनऊ का जय प्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की सरकार के कार्यकाल में विकसित किया गया था। सपा इसे अखिलेश यादव के ड्रीम प्रोजेक्ट के तौर पर पेश करती रही है। यही वजह है कि JPNIC को लीज पर देने का फैसला समाजवादी पार्टी के लिए खास तौर पर राजनीतिक मुद्दा बन गया है।
अखिलेश यादव ने पूछा- सरकार है या दुकानदार?
अखिलेश यादव भी इससे पहले JPNIC को निजी हाथों में सौंपे जाने के फैसले पर सवाल उठा चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार सरकारी संपत्तियों को निजी हाथों में देने की दिशा में आगे बढ़ रही है. सपा प्रमुख ने तंज कसते हुए कहा था कि अब सरकार को ही ठेके पर देने या बेचने की बात बाकी रह गई है। उन्होंने सवाल किया कि यह भाजपा की सरकार है या कोई दुकानदार?
JPNIC लीज डील में निजी कंपनियों को मिली जिम्मेदारी
योगी सरकार के कैबिनेट फैसले के मुताबिक, JPNIC को निजी कंपनियों वृंदावन बॉटलर्स और रॉकवुड होटल्स को 30 साल की लीज पर देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। समझौते के तहत इन कंपनियों को सेंटर के बचे हुए निर्माण कार्य को पूरा कर इसका संचालन शुरू करना होगा।
दो साल में बाकी काम पूरा करने की शर्त
प्रस्ताव के अनुसार, निजी कंपनियों को लीज मिलने के बाद दो साल के भीतर JPNIC के बचे हुए कार्य पूरे करने होंगे। इसके बाद सेंटर का संचालन शुरू किया जाएगा। संचालन शुरू होने के बाद कंपनियों की ओर से लखनऊ विकास प्राधिकरण यानी LDA को हर साल 6 करोड़ रुपये का भुगतान किया जाएगा।
JPNIC को लेकर आगे भी जारी रह सकता है सियासी घमासान
JPNIC को 30 साल के लिए निजी कंपनियों को लीज पर देने का फैसला अब उत्तर प्रदेश की राजनीति में नया विवाद बन गया है। सपा के कई बड़े नेता इस फैसले का विरोध कर चुके हैं, जबकि सरकार की ओर से इसे परियोजना के अधूरे काम को पूरा कराकर उसके बेहतर संचालन की दिशा में उठाया गया कदम बताया जा सकता है।
फिलहाल, JPNIC लीज विवाद ने एक बार फिर भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच राजनीतिक टकराव बढ़ा दिया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर दोनों दलों के बीच बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।










