Sukesh Chandrasekhar Convicted : केस प्रभावित करने की कोशिश पड़ी भारी, सुकेश चंद्रशेखर को कोर्ट ने दोषी ठहराया

दिल्ली की तीस हजारी अदालत ने सुकेश चंद्रशेखर को एक न्यायिक अधिकारी को प्रभावित करने की कोशिश और सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में पहचान बताने के मामले में दोषी ठहराया है। अदालत ने IPC की धारा 170, 189 और 507 के तहत दोष सिद्ध माना। सजा पर सुनवाई 27 अगस्त को होगी।

Sukesh Chandrasekhar

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अगस्त 26, 2026

Sukesh Chandrasekhar Convicted : दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने ठगी के मामलों में आरोपी सुकेश चंद्रशेखर को एक अन्य गंभीर मामले में दोषी ठहराया है। यह मामला न्यायिक व्यवस्था को प्रभावित करने की कथित कोशिश से जुड़ा है। अभियोजन के अनुसार, सुकेश ने खुद को सुप्रीम कोर्ट का जज बताकर भ्रष्टाचार मामले की सुनवाई कर रहे एसीबी के विशेष जज को प्रभावित करने का प्रयास किया था। अदालत ने सुनवाई के बाद उसे भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराओं 170, 189 और 507 के तहत दोषी माना है।

सुप्रीम कोर्ट के जज बनकर किया संपर्क

अभियोजन पक्ष के मुताबिक, यह घटना उस समय की है जब सुकेश चंद्रशेखर न्यायिक हिरासत में था। आरोप है कि इसी दौरान उसने कांस्टेबल मनजीत के मोबाइल फोन तक पहुंच हासिल कर ली। इस फोन का इस्तेमाल करते हुए उसने भ्रष्टाचार से जुड़े एक मामले की सुनवाई कर रहे एसीबी के विशेष न्यायाधीश के आधिकारिक लैंडलाइन नंबर पर संपर्क किया।

पहले सचिव, फिर खुद को बताया जज

अदालत में पेश किए गए अभियोजन के मामले के अनुसार, फोन पर बातचीत के दौरान सुकेश ने पहले खुद को सुप्रीम कोर्ट के एक जज का सचिव बताया। इसके बाद उसने कथित तौर पर खुद को वही जज बताते हुए बातचीत की। आरोप है कि इस तरीके से उसने अपनी पहचान और पद का गलत इस्तेमाल करते हुए विशेष न्यायाधीश पर प्रभाव डालने की कोशिश की।

जमानत देने के लिए दबाव बनाने का आरोप

मामले में अभियोजन ने आरोप लगाया कि सुकेश का उद्देश्य भ्रष्टाचार के मामले में सुनवाई कर रहे विशेष जज को प्रभावित करना था। कथित तौर पर उसने जमानत देने के लिए दबाव बनाने और न्यायिक प्रक्रिया के संभावित परिणाम को अपने पक्ष में प्रभावित करने की कोशिश की। अभियोजन ने इसे सामान्य फोन कॉल नहीं, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप का प्रयास बताया।

अदालत ने साजिश को बताया सुनियोजित प्रयास

तीस हजारी कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि यह मामला केवल गलत पहचान बताने या एक फोन कॉल तक सीमित नहीं था। अदालत के अनुसार, उपलब्ध परिस्थितियां एक ऐसी सुनियोजित और सोच-समझकर की गई कोशिश की ओर इशारा करती हैं, जिसका उद्देश्य न्यायिक व्यवस्था पर प्रभाव डालना था। कोर्ट ने माना कि किसी न्यायाधीश का रूप धारण करना न्यायिक संस्था की प्रतिष्ठा, अधिकार और विश्वसनीयता को चुनौती देने जैसा है।

सबूतों की कड़ी ने मजबूत किया अभियोजन का मामला

अदालत ने अभियोजन की ओर से पेश किए गए साक्ष्यों का भी आकलन किया। कोर्ट के मुताबिक, मामले में सामने आए सबूत एक-दूसरे की पुष्टि करते हैं और घटनाओं की एक सुसंगत कड़ी बनाते हैं। इन साक्ष्यों को देखने के बाद अदालत ने माना कि वे आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों की ओर स्पष्ट रूप से संकेत करते हैं। इसी आधार पर सुकेश को संबंधित धाराओं के तहत दोषी ठहराया गया।

कांस्टेबल मनजीत की भूमिका भी जांच के घेरे में

फैसले के साथ अदालत ने दिल्ली पुलिस को कांस्टेबल मनजीत की भूमिका की दोबारा जांच करने का निर्देश भी दिया है। जांच का मुख्य सवाल यह है कि आखिर सुकेश चंद्रशेखर को कांस्टेबल के मोबाइल फोन तक पहुंच कैसे मिली। इसके अलावा पुलिस को यह भी पता लगाना होगा कि फोन उपलब्ध कराने या उस तक पहुंच बनाने में कांस्टेबल की कोई भूमिका थी या नहीं।

साजिश में फोन की भूमिका बनी अहम कड़ी

मामले की जांच में मोबाइल फोन से जुड़े पहलू को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अभियोजन के अनुसार, इसी फोन के माध्यम से सुकेश ने एसीबी के विशेष जज के आधिकारिक नंबर पर संपर्क साधा था। इसलिए पुलिस की आगे की जांच इस बात पर केंद्रित होगी कि जेल या न्यायिक हिरासत की परिस्थितियों में फोन तक उसकी पहुंच कैसे बनी और क्या इसमें किसी अन्य व्यक्ति की भी भूमिका थी।

न्यायिक व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुड़ा मामला

इस मामले में अदालत की टिप्पणी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि आरोप सीधे न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने के प्रयास से जुड़े हैं। किसी संवैधानिक न्यायालय के न्यायाधीश की पहचान का कथित तौर पर इस्तेमाल कर निचली अदालत के जज पर दबाव बनाने की कोशिश को कोर्ट ने गंभीरता से लिया। फैसले ने न्यायिक संस्थाओं की स्वतंत्रता और उनकी विश्वसनीयता बनाए रखने के महत्व को भी रेखांकित किया है।

अब आगे की जांच पर रहेगी नजर

सुकेश चंद्रशेखर को दोषी ठहराए जाने के बाद अब मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। साथ ही कांस्टेबल मनजीत की भूमिका को लेकर दिल्ली पुलिस की दोबारा जांच भी निगरानी में रहेगी। जांच से यह स्पष्ट हो सकता है कि मोबाइल फोन तक सुकेश की पहुंच किन परिस्थितियों में बनी और कथित साजिश में अन्य लोगों की कोई भूमिका थी या नहीं।

Read More  :  UP News: अखिलेश यादव का बड़ा ऐलान, महिलाओं को सालाना 40 हजार; जानें सपा की पूरी योजना