Mathura Janmashtami: आधी रात जन्म लेंगे कान्हा, 50 लाख भक्तों की अगवानी को तैयार ब्रज

जन्माष्टमी पर मथुरा-वृंदावन भक्ति में डूबा है। 50 लाख से अधिक श्रद्धालु कान्हा के जन्मोत्सव में शामिल होने पहुंचे हैं। मध्यरात्रि शंखनाद के साथ श्रीकृष्ण का प्राकट्य होगा।

Mathura Janmashtami

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

सितम्बर 4, 2026

Mathura Janmashtami: उत्तर प्रदेश की पावन नगरी मथुरा में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का उल्लास इस समय अपने चरम पर है। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के लिए मथुरा-वृंदावन को दुल्हन की तरह सजाया गया है। देश-विदेश से करीब 50 लाख से अधिक श्रद्धालुओं का सैलाब ब्रजभूमि पहुंच चुका है। हर कोई उस दिव्य और अलौकिक पल का इंतजार कर रहा है, जब शुक्रवार की मध्यरात्रि भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य के साथ ही मंदिरों में शंखनाद गूंजेगा और पूरा ब्रज ‘हाथी-घोड़ा पालकी, जय कन्हैयालाल की’ के जयघोष से सराबोर हो जाएगा। श्रीकृष्ण जन्मस्थान से लेकर बांकेबिहारी मंदिर तक आस्था का ऐसा जनसैलाब उमड़ा है कि पैर रखने तक की जगह नहीं बची है।

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ब्रज में उमड़ा 50 लाख श्रद्धालुओं का सैलाब

जन्माष्टमी के इस महाआयोजन को लेकर मथुरा और वृंदावन में भारी संख्या में भक्तों का आगमन हुआ है। रिपोर्टों के अनुसार, इस साल के उत्सव में 50 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के जुटने का अनुमान लगाया गया है। श्रद्धालुओं की इस असीम आस्था और भारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए जिला प्रशासन ने सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के पुख्ता इंतजाम किए हैं। पूरे मथुरा-वृंदावन क्षेत्र को विभिन्न जोन और सेक्टरों में विभाजित करके चप्पे-चप्पे पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।

सुरक्षा का कड़ा पहरा और पुख्ता इंतजाम

लाखों श्रद्धालुओं की मौजूदगी को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता बनाया गया है। प्रमुख मंदिरों और संवेदनशील स्थानों पर भारी पुलिस बल, पीएसी और सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है। यातायात को सुचारू रूप से चलाने और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए विशेष कार्ययोजना लागू की गई है, ताकि किसी भी भक्त को असुविधा न हो। प्रशासन ने सभी आगंतुकों से शांति और व्यवस्था बनाए रखने की अपील की है।

श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर रहेगा मुख्य आकर्षण

मथुरा का श्रीकृष्ण जन्माष्टमी उत्सव पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है और इसका मुख्य केंद्र श्रीकृष्ण जन्मस्थान है। यहां दिनभर विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान, भजन-कीर्तन और भगवान श्रीकृष्ण की विशेष पूजा-अर्चना का दौर जारी है। हालांकि, सबसे बड़ा आकर्षण मध्यरात्रि 12 बजे होने वाला भगवान का प्राकट्य दर्शन और महाआरती है, जिसके साक्षी बनने के लिए देश के कोने-कोने से भक्त खिंचे चले आए हैं।

बांकेबिहारी से लेकर द्वारिकाधीश तक गूंज रहे भजन

मथुरा और वृंदावन के हर एक मंदिर में जबर्दस्त उत्साह देखा जा रहा है। श्रीकृष्ण जन्मस्थान के अलावा ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर, ऐतिहासिक द्वारिकाधीश मंदिर, प्रेम मंदिर और इस्कॉन मंदिर में भक्तों का तांता लगा हुआ है। मंदिरों को भव्य रंग-बिरंगी विद्युत झालरों और विदेशी तथा देशी फूलों से बेहद मनमोहक तरीके से सजाया गया है। रोशनी से जगमगाते यह मंदिर श्रद्धालुओं के मन को मोह रहे हैं और पूरा ब्रज मंडल एक उत्सव नगरी के रूप में नजर आ रहा है।

मध्यरात्रि में गूंजेगा ‘जय कन्हैयालाल की’ का जयघोष

जैसे-जैसे रात का वक्त नजदीक आएगा, कान्हा के जन्मोत्सव की उत्सुकता अपने चरम पर पहुंच जाएगी। ठीक मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म लेते ही मंदिरों में शंख, घंटे और घड़ियालों की गूंज सुनाई देगी। मंगल बधाई गीतों और अटूट भक्ति के माहौल के बीच पूरा ब्रज उत्सव में डूब जाएगा। यह भव्य आयोजन उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक और धार्मिक महत्ता को एक बार फिर वैश्विक पटल पर स्वर्णिम अक्षरों में अंकित कर रहा है।

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