Mathura Jalabhishek: उत्तर प्रदेश के धार्मिक और ऐतिहासिक शहर मथुरा में एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर हलचल तेज हो गई है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन के नाम पर सोशल मीडिया पर वायरल हुए कुछ भड़काऊ पोस्ट और शाही मस्जिद ईदगाह पर जलाभिषेक के एलान के बाद मथुरा पुलिस और जिला प्रशासन पूरी तरह से सतर्क हो गया है। शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस ने कई प्रमुख संतों को नोटिस जारी किए हैं। आइए जानते हैं इस पूरे घटनाक्रम और प्रशासन द्वारा उठाए गए कदमों के बारे में विस्तार से।
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सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट से मचा हड़कंप
विवाद की शुरुआत तब हुई जब सोशल मीडिया पर श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन के समर्थन में कुछ पोस्ट तेजी से वायरल होने लगे।
वायरल संदेश: राधाकुंड के जुलैंदी स्थित श्रीचित्रगुप्त पीठ के पीठाधीश्वर डॉ. स्वामी सच्चिदानंद चित्रगुप्त महाराज का एक पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें लिखा था— “आ रहे भगवाधारी, खाली करो कृष्ण जन्मभूमि हमारी… आओ मिलकर संकल्प लें, कृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति लेकर रहेंगे।”
प्रशासनिक हलचल: इस संदेश के वायरल होने और इसके साथ अन्य संतों के नाम जुड़ने से पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया। इंटेलिजेंस और सोशल मीडिया सेल को तुरंत सक्रिय कर दिया गया ताकि किसी भी प्रकार की अफवाह या माहौल को बिगाड़ने वाली गतिविधियों पर रोक लगाई जा सके।
12 प्रमुख संतों और धर्माचार्यों को रेड कार्ड नोटिस
कानून-व्यवस्था और सांप्रदायिक सौहार्द को सुरक्षित रखने के लिए पुलिस ने कड़ी निरोधात्मक कार्रवाई की है।
नोटिस जारी: पुलिस ने कथावाचक ठाकुर देवकीनंदन, साध्वी ऋतंभरा और स्वामी सच्चिदानंद महाराज सहित कुल 12 प्रमुख संतों व धर्माचार्यों को ‘रेड कार्ड नोटिस’ जारी किया है।
पुलिस की चेतावनी: नोटिस में स्पष्ट रूप से चेतावनी दी गई है कि चित्रगुप्त पीठाधीश्वर द्वारा सोशल मीडिया पर धार्मिक भावनाओं को उत्तेजित करने वाले पोस्टर व ट्वीट साझा किए गए हैं। श्रीकृष्ण जन्मस्थान या उसके आसपास ऐसी किसी भी गतिविधि से दूर रहने को कहा गया है। यदि इसके बावजूद कोई नियम तोड़ता है, तो उसके खिलाफ बेहद सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
जलाभिषेक का एलान और प्रशासन की मुस्तैदी
चित्रगुप्त पीठ के पीठाधीश्वर स्वामी सच्चिदानंद महाराज ने 9 अगस्त को श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन के तहत शंखनाद करने और मंदिर निर्माण के लिए पत्थर तराशने का कार्य आरंभ करने का एलान किया था। इसके लिए राजस्थान के भरतपुर स्थित बंशी पहाड़पुर से गुलाबी पत्थरों की पहली खेप भी मंगाई गई थी। इसके अलावा, शाही मस्जिद ईदगाह पर जलाभिषेक करने की घोषणा भी की गई थी।
अतिरिक्त फोर्स की तैनाती: राष्ट्रीय हनुमान दल का पत्र मिलने के बाद पुलिस-प्रशासन ने किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए अन्य जिलों से भी अतिरिक्त पुलिस बल बुलवा लिया था। संवेदनशील इलाकों में फ्लैग मार्च निकालकर शांति व्यवस्था कायम रखने का कड़ा संदेश दिया गया।
कार्यक्रम स्थगित होने पर राहत: हालांकि, बाद में संबंधित संगठन ने अपने इस कार्यक्रम को फिलहाल स्थगित करते हुए इसे सावन माह के बाद आयोजित करने का निर्णय लिया। इस घोषणा के बाद स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने राहत की सांस ली। प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि मथुरा में शांति और सौहार्द बिगाड़ने की अनुमति किसी को नहीं दी जाएगी और हर गतिविधि पर कड़ी नजर रखी जा रही है।
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