UP Politics: सपा के ब्राह्मण सम्मेलन पर भड़के कैबिनेट मंत्री मनोज पांडेय, अखिलेश यादव से पूछे तीखे सवाल

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले सपा के ब्राह्मण सम्मेलन पर कैबिनेट मंत्री मनोज पांडेय ने अखिलेश यादव को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पुरानी विवादित घटनाओं और सरनेम विवाद का जिक्र करते हुए पूछा कि चुनाव आते ही प्रबुद्ध वर्ग की याद क्यों आने लगती है?

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Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

जून 19, 2026

UP Politics: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 के नजदीक आते ही सूबे की सियासत में जातीय समीकरणों को साधने की होड़ मच गई है। समाजवादी पार्टी (सपा) द्वारा लखनऊ में आयोजित किए गए हालिया ‘ब्राह्मण सम्मेलन’ को लेकर सूबे की राजनीतिक बयानबाजी और ज्यादा उग्र हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार में कद्दावर कैबिनेट मंत्री मनोज पांडेय ने सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को सीधे कटघरे में खड़ा करते हुए कई चुभते सवाल दागे हैं। उन्होंने सोशल मीडिया मंच पर एक विस्तृत और लंबी पोस्ट साझा करते हुए आरोप लगाया कि ब्राह्मण समाज के प्रति समाजवादी पार्टी का दृष्टिकोण और नीति हमेशा से विरोधाभासी तथा दोहरी रही है। उन्होंने पूछा कि सपा की वास्तविक मंशा क्या है—प्रबुद्ध वर्ग का सच्चा आदर या केवल चुनावी फायदा उठाने के लिए उनका राजनीतिक इस्तेमाल?

अतीत की विवादित घटनाओं का किया उल्लेख

बताते चले कि, कैबिनेट मंत्री मनोज पांडेय ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में समाजवादी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को आईना दिखाते हुए अतीत के एक बेहद चर्चित और पुराने विवादित घटनाक्रम का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने याद दिलाया कि एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अखिलेश यादव ने खुद एक ऑन-ड्यूटी पत्रकार से खुलेआम उसका सरनेम (उपनाम) पूछा था। जब उस मीडियाकर्मी ने अपना सरनेम ‘मिश्रा’ बताया, तो सपा प्रमुख ने उसे भरे मंच से सार्वजनिक रूप से अपमानित और प्रताड़ित किया था। मंत्री ने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि इस प्रकार की पुरानी घटनाएं और मानसिकता प्रबुद्ध समाज के प्रति सपा के असली आचरण को बयां करती हैं और जनता के मन में गहरे सवाल खड़े करती हैं।

सपा प्रवक्ता के आपत्तिजनक बयान पर उठाए गंभीर सवाल

सपा की दोहरी नीतियों पर हमला जारी रखते हुए मनोज पांडेय ने समाजवादी पार्टी के एक आधिकारिक प्रवक्ता के उस पुराने बयान का भी जिक्र किया, जिसमें प्रबुद्ध वर्ग के लिए बेहद अमर्यादित और आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया गया था। कैबिनेट मंत्री ने क्षोभ जताते हुए कहा कि उस बेहद शर्मनाक बयान पर न तो राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया आई और न ही पार्टी ने उस अमर्यादित टिप्पणी का कोई खंडन किया या माफी मांगी। उन्होंने कहा कि शीर्ष नेतृत्व की यह रहस्यमयी चुप्पी इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि क्या पार्टी आंतरिक रूप से उस जातिसूचक और अपमानजनक बयान से पूरी तरह सहमत थी। ऐसे में पहले विरोध करना और फिर चुनाव आते ही प्रबुद्ध वर्ग को रिझाने के लिए आयोजन करना हास्यास्पद है।

लखनऊ के ब्राह्मण महासम्मेलन से खुद गायब रहे सपा अध्यक्ष

हाल ही में लखनऊ में समाजवादी पार्टी द्वारा आयोजित किए गए प्रांतीय प्रबुद्ध सम्मेलन की जमीनी हकीकत पर सवाल उठाते हुए कैबिनेट मंत्री मनोज पांडेय ने इसे एक बड़ा सियासी ढोंग करार दिया। उन्होंने रेखांकित किया कि जब पूरे उत्तर प्रदेश से ब्राह्मण समाज के बड़े नेता और प्रबुद्ध प्रतिनिधि इस आयोजन में हिस्सा लेने पहुंचे थे, तब खुद पार्टी के सर्वेसर्वा अखिलेश यादव ने उस मंच पर जाना तक उचित नहीं समझा और वे पूरे कार्यक्रम से नदारद रहे। मनोज पांडेय ने इसे सीधे तौर पर प्रबुद्ध वर्ग के स्वाभिमान और सम्मान पर चोट बताते हुए पूछा कि क्या इस समाज की याद केवल चुनाव के समय ही वोट बटोरने के लिए आती है? मुख्य अतिथि का ही गायब रहना यह साबित करता है कि यह केवल एक दिखावा था।

जातीय विभाजन की राजनीति के खिलाफ एकजुट हो रहा है सनातन समाज

अपने विस्तृत पोस्ट के अंतिम हिस्से में कैबिनेट मंत्री मनोज पांडेय ने सभी विपक्षी दलों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि आज का जागरूक ब्राह्मण, पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समाज पूरी तरह सतर्क है और वह हर राजनीतिक दल से उनके कर्मों का पूरा हिसाब चाहता है। उन्होंने सपा पर समाज को जोड़ने के बजाय केवल जातीय आधार पर समाज को विखंडित और विभाजित करने की संकीर्ण राजनीति करने का संगीन आरोप लगाया। उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि कोई भी दल ब्राह्मणों को मूक-बधिर वोट बैंक समझने की भूल कतई न करे। जनता अब छलावे और धरातल की हकीकत के अंतर को बखूबी समझ चुकी है। उत्तर प्रदेश का संपूर्ण सनातन समाज अब अपने मान-सम्मान, स्वाभिमान और सामाजिक समरसता के बुनियादी मुद्दे पर पूरी तरह लामबंद और एकजुट हो चुका है।