Mann Ki Baat : मन की बात में पीएम मोदी ने जैविक खेती, नदी संरक्षण और स्वास्थ्य सेवाओं की सराहना की

मन की बात के 139वें एपिसोड में पीएम मोदी ने देशभर की प्रेरक पहलें साझा कीं। कहीं प्राकृतिक खेती से कपास उगाई जा रही है, तो कहीं नदी को नया जीवन मिला। दूरदराज के मरीजों को ऑनलाइन इलाज और भारतीय उत्पादों को विदेशी बाजार भी मिल रहे हैं। जानिए इन कहानियों की खासियत।

Mann Ki Baat

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अक्टूबर 25, 2026

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Mann Ki Baat : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 139वें एपिसोड में देशवासियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि 12 साल पहले विजयदशमी के शुभ अवसर पर इस कार्यक्रम की शुरुआत हुई थी और तब से यह यात्रा लगातार जारी है। प्रधानमंत्री ने श्रोताओं को इस सफर का सहयात्री और मार्गदर्शक बताया। उनके मुताबिक, ‘मन की बात’ देश के आम लोगों के परिश्रम, साहस, समर्पण और सेवा भावना को सामने लाने का माध्यम है। उन्होंने इस कार्यक्रम को तीर्थयात्रा जैसा अनुभव बताते हुए लोगों के योगदान को नमन किया।

पंजाब में प्राकृतिक कपास की खेती को बढ़ावा

प्रधानमंत्री ने पंजाब की संस्था ‘खेती विरासत मिशन’ की पहल का उल्लेख किया, जो जैविक खेती और पारंपरिक कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित कर रही है। मालवा क्षेत्र में ‘नव-त्रिन्जन’ पहल के तहत प्राकृतिक तरीके से कपास उगाई जा रही है। इस प्रक्रिया में रासायनिक पदार्थों के इस्तेमाल से बचने पर जोर दिया जाता है। प्राकृतिक रंगों वाली कपास से तैयार धागे और कपड़ों को रंगने के लिए अलग से रासायनिक रंगों की जरूरत भी कम हो सकती है। यह पहल टिकाऊ खेती और पर्यावरण के अनुकूल उत्पादन का उदाहरण है।

उत्तराखंड में हेवल नदी को मिला नया जीवन

मोदी ने उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल में हेवल नदी को बचाने के लिए स्थानीय लोगों और प्रशासन के संयुक्त प्रयासों की सराहना की। उन्होंने बताया कि नदी में पानी कम होने और आसपास के प्राकृतिक जलस्रोत सूखने की समस्या सामने आई थी। इसके बाद वर्षा जल को रोकने, पानी को जमीन के भीतर पहुंचाने और पौधारोपण जैसे कदम उठाए गए। इन प्रयासों से नदी के पुनर्जीवन में मदद मिली और कई प्राकृतिक जलस्रोतों को भी नया जीवन देने का रास्ता खुला। यह उदाहरण सामुदायिक भागीदारी और जल संरक्षण के महत्व को रेखांकित करता है।

वोकल फॉर लोकल से भारतीय उत्पादों को वैश्विक पहचान

प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना भारतीय उत्पादों को विदेशी बाजारों तक पहुंचाने में मदद कर रही है। बिहार के पूर्णिया का मखाना ग्रीस तक पहुंच रहा है, जबकि कर्नाटक के कलबुर्गी की अरहर दाल मालदीव भेजी जा रही है। महाराष्ट्र में आदिवासी समुदायों के उत्पादों की पैकेजिंग पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। ‘शबरी नेचुरल्स’ के माध्यम से शहद, महुआ, चिरौंजी और बांस से बने उत्पाद बाजार में लाए जा रहे हैं। आदिवासी कला से सजी इस पैकेजिंग को जापान का प्रतिष्ठित ‘गुड डिजाइन अवॉर्ड’ मिला है।

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ई-संजीवनी से दूरदराज के मरीजों को विशेषज्ञ इलाज

मोदी ने टेलीमेडिसिन सेवा ई-संजीवनी के जरिए मरीजों को मिली मदद के उदाहरण भी साझा किए। अंडमान-निकोबार के बाराटांग द्वीप में जारवा समुदाय के सात वर्षीय बच्चे को तेज बुखार और सांस लेने में परेशानी हुई। स्थानीय स्वास्थ्यकर्मियों ने विशेषज्ञ डॉक्टरों से संपर्क किया और बच्चे में निमोनिया की पहचान हुई। विशेषज्ञों की निगरानी में उसकी हालत में सुधार हुआ। इसी तरह लक्षद्वीप के कल्पेनी में कुन्ही कोया की तबीयत बिगड़ने पर कवरत्ती के डॉक्टरों ने स्थानीय चिकित्सा टीम को मार्गदर्शन दिया।

आईआईटी मद्रास में मस्तिष्क अनुसंधान की नई पहल

प्रधानमंत्री ने आईआईटी मद्रास में स्थापित ‘सुधा गोपाल कृष्णन ब्रेन सेंटर’ का भी जिक्र किया। इस केंद्र ने मानव मस्तिष्क की उच्च गुणवत्ता वाली डिजिटल त्रिआयामी तस्वीरें तैयार करने वाला तकनीकी मंच विकसित किया है। इसका लक्ष्य भविष्य में 100 मानव मस्तिष्कों की 3D मैपिंग कर उनका विस्तृत अध्ययन करना है। प्रधानमंत्री के संदेश में इन उदाहरणों के जरिए नवाचार, स्थानीय प्रयासों, स्वास्थ्य सेवाओं और पर्यावरण संरक्षण में लोगों की भूमिका को प्रमुखता दी गई।

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