Manipur Violence: पूर्वोत्तर का राज्य मणिपुर एक बार फिर बेहद संवेदनशील और हिंसक हालातों से गुजर रहा है। पिछले 24 घंटों से राज्य के कई हिस्सों में तनाव और हिंसा का माहौल बना हुआ है। ताजा विवाद और आक्रोश उस समय भड़का, जब पिछले दिनों किडनैप (अपहरण) किए गए नागा समुदाय के 6 नागरिकों के क्षत-विक्षत शव बरामद हुए।
इस घटना के बाद से पूरे राज्य में स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई है और जगह-जगह उग्र विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। कानून व्यवस्था और शांति बनाए रखने के लिए मणिपुर के पुलिस महानिदेशक (DGP) मुकेश सिंह ने बताया कि स्थानीय पुलिस, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) और असम राइफल्स के करीब 450 जवानों ने स्निफर डॉग्स की मदद से सघन सर्च ऑपरेशन चलाकर इन शवों को बरामद किया है। वहीं, घटना के विरोध में ‘यूनाइटेड नागा काउंसिल’ (UNC) ने पूरे मणिपुर में 24 घंटे के पूर्ण बंद का ऐलान किया है।
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नागा काउंसिल का फूटा गुस्सा
इस नृशंस हत्याकांड को लेकर नागा समुदाय के संगठनों में भारी आक्रोश है। लियांगमाई नागा काउंसिल के अध्यक्ष टिमोथी विजुनामेई ने बेहद तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि गत 13 मई को कांगपोकपी जिले के लेइलोन वाइफेई गांव से कुल 48 लोगों का अपहरण किया गया था। आरोप है कि इस अपहरण के पीछे कुकी नार्को-आतंकवादी गुटों का हाथ था।
इन्हीं बंधकों में से नागा समुदाय के 6 लोगों के शव बरामद किए गए हैं, जिन्हें इंफाल के जवाहरलाल नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (JNIMS) के मुर्दाघर में रखा गया है। विजुनामेई ने बताया कि बरामद हुए शव इतनी बुरी और क्षत-विक्षत हालत में हैं कि उनकी सामान्य रूप से पहचान कर पाना भी बेहद मुश्किल हो रहा है। नागा संगठनों ने उग्रवादियों के इस कृत्य को बेहद शर्मनाक, कायरतापूर्ण और अमानवीय बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की है।
क्यों उठी डिप्टी CM नेमचा किपगेन को पद से हटाने की मांग?
इस पूरे हत्याकांड के बाद ‘यूनाइटेड नागा काउंसिल’ (UNC) ने राज्य की राजनीति और सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। UNC ने राज्य की वर्तमान डिप्टी सीएम (Deputy CM) नेमचा किपगेन को उनके पद से तुरंत हटाने की कड़ी मांग की है। नागा काउंसिल का रुख इतना सख्त है कि उन्होंने मांगें पूरी न होने तक मृतकों के शवों को स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया है।
डिप्टी CM से जुड़े विवाद का मुख्य कारण
पारिवारिक और विद्रोही कनेक्शन: दरअसल, डिप्टी सीएम नेमचा किपगेन कुकी विद्रोही गुट ‘कुकी नेशनल फ्रंट-पी’ (KNF-P) के अध्यक्ष सेमटिनथांग किपगेन की पत्नी हैं।
SoO समझौते पर सवाल: KNF-P वह विद्रोही संगठन है जो राज्य और केंद्र सरकार के साथ हुए ‘सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस’ (SoO) समझौते का हिस्सा है।
हत्या का संदेह: यूनाइटेड नागा काउंसिल को गहरा अंदेशा है कि नागा नागरिकों के अपहरण और इस क्रूर हत्याकांड के पीछे इसी गुट का हाथ है। राजनीतिक प्रभाव के कारण जांच प्रभावित न हो, इसलिए डिप्टी सीएम को हटाने और कुकी विद्रोहियों के साथ हुए SoO समझौते को तत्काल रद्द करने की मांग की जा रही है।
13 मई को कांगपोकपी जिले में क्या हुआ था?
इस ताजा विवाद की जड़ें गत 13 मई को कांगपोकपी जिले में हुए एक घात लगाकर किए गए हमले से जुड़ी हैं। उस दिन थाडौ (Thadou) जनजाति के दो प्रमुख चर्च नेताओं (पादरियों) की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड के तुरंत बाद, जवाबी कार्रवाई और तनाव के बीच दो पादरियों सहित 6 नागा नागरिकों और उनके परिवारों का अपहरण कर लिया गया।
कांगपोकपी और सेनापति जिलों की सीमाओं से कुल 48 लोगों को बंधक बनाया गया था। हालांकि, बाद में उग्रवादियों ने इनमें से 12 महिलाओं और बच्चों को सुरक्षित छोड़ दिया था। इसके बाद मंगलवार को कुकी समुदाय के 14 अन्य लोगों को भी रिहा किया गया, लेकिन बुधवार को 6 नागा नागरिकों के शव मिलने से पूरा समीकरण बदल गया और शांति की कोशिशों को बड़ा झटका लगा। इस अमानवीय घटना की मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड संगमा और नागालैंड के मुख्यमंत्री नेफियू रियो ने भी कड़ी निंदा करते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
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