Manipur Violence : मणिपुर में फिर बढ़ा तनाव, कुकी समुदाय के 2 लोगों की हत्या, 30 घर जलने से हड़कंप

क्या मणिपुर एक बार फिर कभी न खत्म होने वाली जातीय हिंसा की आग में झुलसने लगा है? कामजोंग जिले के कुलतुह कुकी गांव में सशस्त्र हमलावरों ने सो रहे लोगों पर गोलियां बरसाकर दो नागरिकों को मार डाला और देखते ही देखते पूरा गांव राख कर दिया, जानिए पूरी इनसाइड स्टोरी।

Manipur Violence

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जून 11, 2026

Manipur Violence :  पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में शांति बहाली की कोशिशों के बीच एक बार फिर हिंसा भड़क उठी है। राज्य के कामजोंग जिले के कुलतूह कुकी गांव में गुरुवार सुबह संदिग्ध उग्रवादियों ने कायराना हमला करते हुए दो स्थानीय नागरिकों की गोली मारकर बेरहमी से हत्या कर दी। पुलिस नियंत्रण कक्ष से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार, भारी हथियारों से लैस उग्रवादियों ने सुबह करीब 4:55 बजे गांव पर धावा बोला और अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। इस खूनी हमले को अंजाम देने के बाद हमलावरों ने गांव के कई मासूम लोगों के घरों को आग के हवाले कर दिया, जिससे पूरे इलाके में दहशत और भयंकर तनाव का माहौल पैदा हो गया है।

सुरक्षा बल अलर्ट पर

इस वीभत्स घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, असम राइफल्स और केंद्रीय सुरक्षा बलों की अतिरिक्त टुकड़ियों को तुरंत मौके पर रवाना किया गया। सुरक्षा बलों ने पूरे प्रभावित गांव और उसके आसपास के जंगली इलाकों को चारों तरफ से घेर लिया है। आगजनी और हत्या की इस घटना के बाद कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी संख्या में जवानों की तैनाती की गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फरार आरोपियों और संदिग्ध उग्रवादी गुटों की धरपकड़ के लिए इलाके में एक सघन तलाशी अभियान (सर्च ऑपरेशन) शुरू किया गया है, ताकि स्थिति को नियंत्रण से बाहर जाने से रोका जा सके।

कांगपोकपी में छह नगा नागरिकों के शव मिलने से बढ़ा गुस्सा

कामजोंग जिले में हुई यह ताजा हिंसक वारदात कांगपोकपी जिले से छह नगा नागरिकों के शव बरामद होने के ठीक एक दिन बाद सामने आई है। सुरक्षा एजेंसियों को अंदेशा है कि ये बरामद शव उन्हीं छह बदनसीब लोगों के हैं, जिन्हें बीते 13 मई को लीलोन वैफेई गांव वाले इलाके से अज्ञात हथियारबंद बदमाशों द्वारा अगवा कर लिया गया था। अपहरण के पूरे 29 दिनों के बाद इस तरह संदिग्ध परिस्थितियों में शवों का मिलना राज्य की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। इस घटना के बाद से ही मैतेई, कुकी और नगा समुदायों के बीच पहले से जारी जातीय तनाव और ज्यादा गहरा गया है।

शवों की शिनाख्त की प्रक्रिया जारी

कांगपोकपी जिले के कराम वैफेई गांव के पास के जंगलों से इन सभी छह शवों को बरामद किया गया था। हालांकि, स्थानीय जिला प्रशासन और पुलिस ने कानून-व्यवस्था बिगड़ने के डर से अभी तक आधिकारिक तौर पर इन शवों की पहचान की पुष्टि नहीं की है। मामले की संवेदनशीलता, अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से जुड़ाव और इसके व्यापक असर को देखते हुए केंद्र सरकार ने इस पूरे मामले की कमान संभाल ली है। सरकार ने छह नगा नागरिकों की हत्या और अपहरण के इस बेहद उलझे हुए मामले की विस्तृत जांच अब राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंप दी है, ताकि सच सामने आ सके।

JNIMS अस्पताल में भारी बवाल

बरामद किए गए सभी छह शवों को गुरुवार की सुबह पोस्टमार्टम और शिनाख्त के लिए राज्य की राजधानी इम्फाल स्थित जवाहरलाल नेहरू आयुर्विज्ञान संस्थान (JNIMS) लाया गया। जैसे ही शवों के अस्पताल पहुंचने की खबर फैली, बड़ी संख्या में मृतकों के परिजन, नगा समुदाय के शीर्ष नेता और स्थानीय आक्रोशित लोग अस्पताल परिसर में इकट्ठा हो गए। देखते ही देखते अस्पताल के बाहर भारी हंगामा शुरू हो गया। उग्र हो रही भीड़ को नियंत्रित करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए वहां तैनात सुरक्षा बलों को अंततः बल प्रयोग करना पड़ा और प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले दागने पड़े।

नगा बहुल इलाकों में भारी आगजनी

इस घटना के विरोध में सेनापति जिले में प्रदर्शनकारियों का गुस्सा फूट पड़ा। आक्रोशित भीड़ ने नगा पीपुल्स फ्रंट (NPF) के एक स्थानीय दफ्तर को आग के हवाले कर दिया, जिससे पूरी इमारत जलकर खाक हो गई। इसके अलावा, प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रीय राजमार्ग पर चल रहे कई वाणिज्यिक ट्रकों को भी निशाना बनाया और उनमें तोड़फोड़ की। घाटी में बढ़ते आक्रोश को देखते हुए यूनाइटेड नागा काउंसिल (UNC) ने मणिपुर के सभी नगा बहुल क्षेत्रों में 24 घंटे के पूर्ण बंद (बंद का आह्वान) की घोषणा की है, जिससे जनजीवन पूरी तरह ठप हो गया है।

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