Manipur Violence 2026: मणिपुर एक बार फिर हिंसा और अस्थिरता की चपेट में आ गया है। इस बार राज्य के उखरुल जिले में हालात अचानक बिगड़ गए, जहां दो आदिवासी समुदायों के बीच हुआ एक मामूली विवाद देखते ही देखते बड़े हिंसक संघर्ष में बदल गया। ताजा घटनाओं में सशस्त्र उग्रवादियों द्वारा मकानों और वाहनों को आग के हवाले किए जाने की खबरें सामने आई हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में भय और अनिश्चितता का माहौल बन गया है।
लिटान गांव से शुरू हुआ विवाद
हिंसा की चिंगारी उखरुल जिले के लिटान गांव से भड़की, जहां तंगखुल नगा समुदाय के एक व्यक्ति पर कुछ लोगों द्वारा हमला किए जाने की सूचना मिली। शुरुआत में यह मामला स्थानीय स्तर पर सुलझता हुआ दिखाई दे रहा था। दोनों पक्ष पारंपरिक सामाजिक प्रक्रियाओं के तहत विवाद सुलझाने पर सहमत भी हुए थे और इसके लिए एक बैठक तय की गई थी।
सुलह की जगह भड़की आगजनी
रविवार को जब विवाद सुलझाने के लिए बैठक होनी थी, तब हालात ने अचानक हिंसक मोड़ ले लिया। आरोप है कि पास के सिकिबुंग गांव के कुछ लोगों ने लिटान सारेइखोंग के मुखिया के आवास पर हमला कर दिया। इसके बाद स्थिति तेजी से बिगड़ती चली गई और मध्यरात्रि में सशस्त्र कुकी उग्रवादियों द्वारा तंगखुल नगा समुदाय के कई घरों में आग लगाए जाने की घटनाएं सामने आईं।
दोनों पक्षों से हुआ प्रतिशोध
आगजनी की घटनाओं के बाद तनाव और बढ़ गया। प्रतिशोध की भावना में दूसरे पक्ष की ओर से भी कुकी समुदाय के घरों को निशाना बनाए जाने की खबरें आईं। इस आपसी हिंसा ने पूरे इलाके को संघर्ष के मैदान में बदल दिया, जहां आम लोग सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं।
सोशल मीडिया पर वायरल हुए भयावह दृश्य
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो हालात की भयावहता को साफ दिखा रहे हैं। इन वीडियो में हथियारबंद लोग खुलेआम आधुनिक हथियारों से हवाई फायरिंग करते और घरों व गाड़ियों को आग लगाते नजर आ रहे हैं। इन दृश्यों ने न सिर्फ स्थानीय लोगों में दहशत फैलाई है, बल्कि पूरे राज्य में चिंता का माहौल पैदा कर दिया है।स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उखरुल के जिला मजिस्ट्रेट आशीष दास ने जिले में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लगाने का आदेश दिया है। रविवार शाम से ही लोगों के घरों से बाहर निकलने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है। प्रशासन का कहना है कि शांति बहाल होने तक सख्त कदम उठाए जाते रहेंगे।
संवेदनशील इलाकों में बढ़ाई गई सुरक्षा
कानून-व्यवस्था को नियंत्रण में रखने के लिए महादेव, लंबुई और शांगकाई जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। उपद्रवियों को तितर-बितर करने के लिए सुरक्षा बलों को आंसू गैस के गोले भी दागने पड़े। फिलहाल पूरे इलाके में सघन निगरानी रखी जा रही है।
नुकसान का आकलन और हालात पर नजर
प्रशासनिक अधिकारी अब हिंसा से हुए नुकसान का आकलन कर रहे हैं। जले हुए घरों, वाहनों और संपत्ति का विवरण जुटाया जा रहा है। साथ ही, संदिग्ध गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जा रही है ताकि हालात और न बिगड़ें।मणिपुर की सबसे बड़ी नगा जनजाति तंगखुल और कुकी समुदाय के बीच बढ़ता यह तनाव राज्य में शांति बहाल करने की कोशिशों के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। लगातार हो रही हिंसक घटनाओं ने यह साफ कर दिया है कि मणिपुर में स्थायी शांति के लिए संवाद और भरोसे की बहाली अब भी सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।










