Manipur News: मणिपुर में नई सरकार की तैयारी! दिल्ली पहुंचे BJP और NDA विधायक, बड़ी बैठक आज

मणिपुर में 12 फरवरी को राष्ट्रपति शासन खत्म होने वाला है, जिससे राज्य में लोकतांत्रिक सरकार की वापसी की उम्मीदें बढ़ गई हैं। बीजेपी आलाकमान ने एनडीए के सभी विधायकों को दिल्ली बुलाया है। जातीय हिंसा के बीच, क्या एन. बीरेन सिंह फिर से मुख्यमंत्री बनेंगे या राज्य को नया नेतृत्व मिलेगा? जानें मणिपुर विधानसभा का पूरा समीकरण

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Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

फ़रवरी 2, 2026

Manipur News: मणिपुर में पिछले एक साल से जारी राजनीतिक अनिश्चितता अब खत्म होने की ओर है। 12 फरवरी को राष्ट्रपति शासन की अवधि समाप्त हो रही है, जिसे देखते हुए केंद्र सरकार और भाजपा नेतृत्व ने राज्य में लोकतांत्रिक व्यवस्था बहाल करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। इसी सिलसिले में दिल्ली में एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई गई है, जिसमें मणिपुर के भविष्य और नई सरकार की रूपरेखा पर मंथन किया जाएगा।

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एनडीए विधायकों का दिल्ली दौरा

बताते चले कि, मणिपुर में राष्ट्रपति शासन हटने की आहट के बीच भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने एनडीए के सभी विधायकों को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली तलब किया है। सोमवार, 2 फरवरी को होने वाली इस महत्वपूर्ण बैठक के लिए भाजपा की प्रदेश अध्यक्ष शारदा देवी और 20 से अधिक विधायक पहले ही दिल्ली पहुंच चुके हैं। इस चर्चा में केवल भाजपा ही नहीं, बल्कि गठबंधन सहयोगी नेशनल पीपुल्स पार्टी (NPP) और नागा पीपुल्स फ्रंट (NPF) के नेताओं को भी शामिल किया गया है, ताकि एक समावेशी और स्थिर शासन सुनिश्चित किया जा सके।

मुख्यमंत्री के चयन और नए नेता की तलाश पर गहन मंथन

आपको बता दे कि, राज्य की कमान किसके हाथ में होगी, इसे लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हैं। हालांकि पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने बैठक को लेकर सकारात्मक रुख दिखाया है, लेकिन नए ‘नेता’ के चयन पर अंतिम मुहर भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व ही लगाएगा। विधायक एस. राजेन सिंह के अनुसार, केंद्रीय आलाकमान मणिपुर की वर्तमान संवेदनशील परिस्थितियों का गहन विश्लेषण करने के बाद ही कोई निर्णय लेगा। बीरेन सिंह ने अपने पिछले कार्यकाल के प्रयासों को रेखांकित करते हुए उम्मीद जताई है कि सभी सहयोगियों के साथ आने से राज्य को एक नई दिशा मिलेगी।

जातीय हिंसा की चुनौतियां

सरकार गठन की यह प्रक्रिया एक बेहद चुनौतीपूर्ण दौर में हो रही है। मई 2023 से मैतेई और कुकी समुदायों के बीच भड़की जातीय हिंसा ने राज्य को गहरे जख्म दिए हैं, जिसमें 260 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। हजारों विस्थापितों का पुनर्वास और समुदायों के बीच विश्वास बहाली नई सरकार के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी। पिछले साल 13 फरवरी को एन. बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद से ही विधानसभा निलंबित है, जिसका कार्यकाल 2027 तक शेष है।

60 सदस्यीय सदन में एनडीए का बहुमत और समीकरण

60 सदस्यीय मणिपुर विधानसभा में सत्ता के समीकरण फिलहाल एनडीए के पक्ष में मजबूत दिखाई देते हैं। आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति कुछ इस प्रकार है:

दल विधायकों की संख्या

  • भारतीय जनता पार्टी (BJP) 37
  • नेशनल पीपुल्स पार्टी (NPP) 06
  • नागा पीपुल्स फ्रंट (NPF) 05

भले ही एनपीपी के राज्य अध्यक्ष लोरहो एस. पफोजे ने अभी किसी भी निश्चित फैसले से इनकार किया हो, लेकिन 12 फरवरी की समयसीमा से पहले दिल्ली में होने वाली यह बैठक मणिपुर की राजनीतिक स्थिरता के लिए निर्णायक साबित होने वाली है।

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