Kulgam Attack: कुलगाम आतंकी हमले पर महबूबा मुफ्ती का फूटा गुस्सा, सुरक्षा व्यवस्था पर उठाए गंभीर सवाल

कुलगाम में प्रवासी मजदूरों पर हुए आतंकी हमले के बाद पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने कड़ी निंदा की है। उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाते हुए स्वतंत्र जांच की मांग की है और कहा कि छत्तीसगढ़ के मजदूरों की हत्या अकल्पनीय क्रूरता है।

कुलगाम आतंकी हमले पर महबूबा मुफ्ती की कड़ी प्रतिक्रिया

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

अगस्त 1, 2026

Kulgam Attack: जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले में प्रवासी मजदूरों के ऊपर हुए कायराना आतंकी हमले के विरोध में पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने बेकसूर और गरीब प्रवासी मजदूरों को चुनकर निशाना बनाए जाने की घटना को अकल्पनीय रूप से क्रूर करार दिया है तथा इसके साथ ही सुरक्षा तंत्र में भारी चूक होने का गंभीर आरोप लगाकर उच्चस्तरीय स्वतंत्र जांच की पुरजोर मांग की है।

छत्तीसगढ़ के मजदूरों की मौत पर दुख

मीडियाकर्मियों से बातचीत करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने छत्तीसगढ़ राज्य के रहने वाले दो मजदूरों की इस दर्दनाक मौत पर बेहद गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने अफसोस जताते हुए कहा कि इस जघन्य और कायरतापूर्ण हमले की कड़ी आलोचना करने के लिए उनके पास पर्याप्त शब्द नहीं हैं, क्योंकि निहत्थे नागरिकों पर हुआ यह प्रहार अत्यंत पीड़ादायक है।

पेट पालने आए मजदूरों पर क्रूरता

महबूबा ने अपनी बात आगे बढ़ाते हुए कहा कि ये मजदूर अपने दूर-दराज के घरों को छोड़कर केवल अपने परिवार का दो वक्त का पेट पालने और जीविका चलाने के लिए कश्मीर में मेहनत-मजदूरी करने आते हैं। ऐसे सीधे-साधे और गरीब लोगों को इस तरह आतंकवाद का निशाना बनाना पूरी तरह से अमानवीय, क्रूर और शर्मनाक कृत्य है।

सुरक्षा व्यवस्था पर खड़े किए सवाल

पीडीपी प्रमुख ने सरकार और प्रशासन पर सवाल उठाते हुए कहा कि मौजूदा समय में अमरनाथ यात्रा के चलते पूरे क्षेत्र में चप्पे-चप्पे पर भारी सुरक्षा बलों की तैनाती रहती है, जिसकी वजह से आम नागरिकों को भी भारी असुविधाओं का सामना करना पड़ता है। इसके बावजूद इस तरह का बड़ा आतंकी हमला हो जाना सीधे तौर पर सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलता है और गंभीर सवाल खड़े करता है।

हिरासत और उत्पीड़न का आरोप

उन्होंने सरकार की कार्यप्रणाली पर तंज कसते हुए कहा कि पिछले कुछ समय में हजारों लोगों को हिरासत में लिया गया है और ओवर ग्राउंड वर्कर (OGW) तथा आतंकवाद से संबंध होने के झूठे या संदिग्ध नामों पर आम जनता को परेशान किया जा रहा है। महबूबा ने स्पष्ट किया कि कश्मीरी अवाम भी इन खौफनाक आतंकी वारदातों से उतनी ही आहत और स्तब्ध है, लेकिन जांच के नाम पर निर्दोष नागरिकों का उत्पीड़न नहीं होना चाहिए।

स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग

अपनी बात के अंत में महबूबा मुफ्ती ने मांग उठाई कि इस बात की पूरी तरह स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए कि आखिर इतनी कड़ी सुरक्षा घेराबंदी होने के बावजूद आतंकवादी इस तरह का हमला करने में कैसे कामयाब हो गए। उन्होंने जोर देकर कहा कि घाटी में खून-खराबे और हिंसा का यह काला दौर अब हर हाल में रुकना चाहिए, क्योंकि इसकी सबसे बड़ी कीमत वे बेकसूर लोग चुकाते हैं जो ईमानदारी से अपना जीवन बिताने का प्रयास कर रहे हैं।