Mamata Banerjee Slams Center: ‘चुनाव के बाद छिन जाएगी नागरिकता’, ममता बनर्जी ने NRC और जनगणना पर किया बड़ा दावा

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस का चुनावी घोषणापत्र जारी करते हुए केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के बाद NRC और जनगणना के जरिए लोगों की नागरिकता छीनी जा सकती है। ममता ने राज्य में 'अनौपचारिक राष्ट्रपति शासन' और निर्वाचन आयोग द्वारा भाजपा के इशारे पर अधिकारियों के तबादले का भी दावा किया।

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

मार्च 21, 2026

Mamata Banerjee Slams Center: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी ने केंद्र की भाजपा सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी का चुनावी घोषणापत्र जारी करने के दौरान उन्होंने आगाह किया कि आगामी चुनावों के संपन्न होते ही देश में नागरिकता संशोधन और पहचान निर्धारण के नाम पर बड़ी साजिश रची जा सकती है। ममता बनर्जी ने दावा किया कि केंद्र सरकार लोकतांत्रिक संस्थाओं का दुरुपयोग कर बंगाल में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है।

ममता ने NRC और डेटा संग्रह पर उठाए सवाल

तृणमूल कांग्रेस की मुखिया ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्र सरकार की मंशा चुनाव के ठीक बाद NRC (राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर) और जनगणना (Census) की आड़ में आम लोगों की नागरिकता खत्म करने की है। उन्होंने जनता को सचेत करते हुए कहा कि डेटा इकट्ठा करने के बहाने लोगों के अधिकारों पर हमला किया जा सकता है। ममता बनर्जी ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार बंगाल में किसी भी कीमत पर विभाजनकारी नीतियों को लागू नहीं होने देगी और लोगों से अपील की कि वे अपनी पहचान और अस्तित्व की रक्षा के लिए सतर्क रहें।

बंगाल में ‘अघोषित राष्ट्रपति शासन’ का दावा

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य की मौजूदा स्थिति को ‘अनौपचारिक राष्ट्रपति शासन’ (Unofficial President’s Rule) जैसा करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार और भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) मिलकर राज्य प्रशासन को पंगु बना रहे हैं। ममता के अनुसार, आदर्श चुनाव आचार संहिता की आड़ में लिए जा रहे फैसले सीधे तौर पर संघीय ढांचे पर प्रहार हैं। उन्होंने दावा किया कि चुनाव से पहले राज्य में ऐसा माहौल बनाया गया है जहाँ लोकतांत्रिक चुनी गई सरकार की शक्तियाँ सीमित कर दी गई हैं, जो पूरी तरह असंवैधानिक है।

सीटों का परिसीमन और चुनावी हेरफेर की आशंका

ममता बनर्जी ने आगामी चुनावों को प्रभावित करने के लिए निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन (Delimitation Process) को लेकर भी भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि केंद्र सरकार निर्वाचन आयोग के साथ सांठगांठ कर रही है ताकि सीटों का बँटवारा इस तरह किया जा सके जिससे भाजपा को राजनीतिक लाभ मिले। उनके अनुसार, यह पूरी कवायद विपक्षी दलों को कमजोर करने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को अपने पक्ष में मोड़ने की एक सुनियोजित चुनावी साजिश का हिस्सा है।

प्रशासनिक अधिकारियों के तबादले पर विवाद

राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों के तबादलों (Transfer of Officers) पर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि निर्वाचन आयोग भाजपा के निर्देश पर काम कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि निष्पक्ष अधिकारियों को हटाकर ऐसे लोगों को तैनात किया जा रहा है जो सत्ताधारी दल के प्रति नरम रुख रखते हों। ममता बनर्जी ने यहाँ तक आशंका जताई कि इन अचानक हुए तबादलों के कारण सीमावर्ती इलाकों में धन और हथियारों की अवैध तस्करी (Smuggling) को बढ़ावा मिल सकता है, जिससे राज्य की कानून-व्यवस्था प्रभावित होगी।

मतदाता सूची से नामों को हटाने पर गंभीर आपत्ति

मुख्यमंत्री ने SIR (Special Investigation Report) प्रक्रिया के दौरान एक विशेष समुदाय को निशाना बनाए जाने का मुद्दा भी जोर-शोर से उठाया। उन्होंने चौंकाने वाला दावा किया कि लगभग 60 लाख मामलों में से 22 लाख का निपटारा हो चुका है, लेकिन करीब 10 लाख नाम सूची से हटा दिए गए हैं। ममता बनर्जी ने इन नामों को हटाए जाने को अन्यायपूर्ण बताते हुए इनकी दोबारा जांच (Re-verification) की मांग की। उन्होंने केंद्र पर आरोप लगाया कि यह कदम विशेष रूप से एक वर्ग को मताधिकार से वंचित करने के लिए उठाया गया है।