Congress Mallikarjun Kharge: कर्नाटक कांग्रेस में अनुशासन को लेकर रविवार का दिन बेहद नाटकीय रहा। प्रदेश कांग्रेस के नए अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का गुस्सा फूट पड़ा। कार्यक्रम के बीच जब कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के समर्थन में जोरदार नारेबाजी शुरू की, तो खरगे ने मंच से ही उन्हें कड़ी फटकार लगाई। खरगे ने कार्यकर्ताओं को ‘यूजलेस फैलो’ (बेकार लोग) कहते हुए सख्त लहजे में शांत रहने का निर्देश दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मंच किसी व्यक्ति विशेष के महिमामंडन के लिए नहीं, बल्कि पार्टी को संगठनात्मक स्तर पर मजबूत करने के लिए है। खरगे ने चेतावनी दी कि अनुशासनहीनता कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी और नारेबाजी का वीडियो रिकॉर्ड कर लिया गया है, जिस पर भविष्य में अनुशासनात्मक कार्रवाई तय है।
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की मौजूदगी में बिगड़ा माहौल
बताते चले कि, कार्यक्रम के दौरान स्थिति उस समय और अधिक असहज हो गई, जब मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को स्वयं भीड़ को नियंत्रित करने का प्रयास करना पड़ा। एक ओर खरगे अनुशासन का पाठ पढ़ा रहे थे, तो दूसरी ओर समर्थकों का उत्साह कम होने का नाम नहीं ले रहा था। खरगे ने तंज कसते हुए कहा, “चुप रहो! बैठ जाओ। ऐसा लग रहा है जैसे पूरा देश तुम्हारे हाथ में आ गया है।” यह घटना उस समय हुई जब पार्टी को एक नई दिशा में ले जाने का प्रयास किया जा रहा था। खरगे का यह कड़ा रुख पार्टी के भीतर अनुशासन का संदेश देने के लिए था, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कार्यकर्ता व्यक्तिगत भक्ति के बजाय सामूहिक लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करें।
कर्नाटक की सत्ता का रोटेशन और अंदरूनी राजनीतिक खींचतान
यह पूरी घटना कर्नाटक कांग्रेस के भीतर लंबे समय से चली आ रही आंतरिक गुटबाजी और सत्ता के समीकरणों का परिणाम है। 2023 के विधानसभा चुनाव के बाद से ही सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के खेमों के बीच मुख्यमंत्री पद को लेकर खींचतान बनी रही थी। समझौते के तहत पहले सिद्धारमैया ने मुख्यमंत्री के रूप में कमान संभाली, जबकि डीके शिवकुमार को उपमुख्यमंत्री की जिम्मेदारी दी गई थी। राज्य में एक ‘रोटेशन फॉर्मूला’ की चर्चा लगातार बनी रही, जिसके चलते राजनीतिक गलियारों में हमेशा हलचल रही। आखिरकार, 28 मई को सिद्धारमैया द्वारा पद छोड़े जाने के बाद, डीके शिवकुमार ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।
भविष्य की राजनीति पर अनुशासन का असर
कर्नाटक कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन के बावजूद कार्यकर्ताओं के बीच शक्ति प्रदर्शन की होड़ बनी हुई है। सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के समर्थकों के बीच राजनीतिक दबाव बनाने की यह प्रतिस्पर्धा अब पार्टी आलाकमान के लिए सिरदर्द बन गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि मल्लिकार्जुन खरगे का यह सार्वजनिक रूप से दिया गया कड़ा बयान पार्टी में अनुशासन बहाल करने की एक बड़ी कोशिश है। यदि पार्टी को आगामी चुनौतियों के लिए एकजुट रहना है, तो कार्यकर्ताओं के इस अनियंत्रित उत्साह को नियंत्रित करना अनिवार्य है। खरगे की यह फटकार यह दर्शाती है कि आलाकमान अब गुटबाजी को दरकिनार कर पार्टी की साख बचाने के लिए सख्त कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा।










