Women Reservation : कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने शुक्रवार को कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की महत्वपूर्ण बैठक को संबोधित करते हुए केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा प्रहार किया। खरगे ने महिला आरक्षण बिल और प्रस्तावित परिसीमन (Delimitation) को लेकर सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक खामोश रहने के बाद मोदी सरकार अचानक इस मुद्दे पर सक्रिय हो गई है, जो पूरी तरह से राजनीतिक लाभ से प्रेरित है। 16 से 18 अप्रैल के बीच होने वाले संसद के विशेष सत्र को लेकर खरगे ने पार्टी के भीतर गहरी चर्चा की और भविष्य की रणनीति पर जोर दिया।
चुनावी फायदे के लिए आनन-फानन में लाया जा रहा संविधान संशोधन
खरगे ने आरोप लगाया कि सरकार की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई औपचारिक प्रस्ताव विपक्ष को नहीं दिया गया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के लेखों और छनकर आ रही जानकारियों से पता चला है कि सरकार आगामी विधानसभा चुनावों में श्रेय लेने के लिए इस संविधान संशोधन विधेयक को जल्दबाजी में पारित कराना चाहती है। खरगे के अनुसार, यह सत्र केवल नैरेटिव बदलने की एक कोशिश है। विपक्षी दलों ने सरकार से अनुरोध किया था कि पश्चिम बंगाल चुनाव के मतदान के बाद सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए, लेकिन सरकार ने लोकतांत्रिक मर्यादाओं को ताक पर रखकर मनमाने ढंग से सत्र बुला लिया।
लोकसभा सीटों को 816 करने का प्रस्ताव: परिसीमन के गंभीर परिणामों की चेतावनी
कांग्रेस अध्यक्ष ने एक बड़ी जानकारी साझा करते हुए बताया कि सरकार की योजना केवल महिला आरक्षण तक सीमित नहीं है। सरकार लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों को 50% बढ़ाकर 816 करना चाहती है, और विधानसभाओं में भी इसी अनुपात में वृद्धि का प्रस्ताव है। खरगे ने चेतावनी दी कि इस ‘परिसीमन’ (Delimitation) के भारतीय निर्वाचन प्रणाली पर अत्यंत गंभीर और दूरगामी परिणाम होंगे। उन्होंने कहा कि बिना व्यापक विचार-विमर्श के सीटों की संख्या में इतना बड़ा बदलाव करना लोकतंत्र के ढांचे को प्रभावित कर सकता है, इसलिए इस पर गहराई से मंथन की जरूरत है।
आचार संहिता का उल्लंघन और संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका पर सवाल
खरगे ने वर्तमान चुनावी माहौल का हवाला देते हुए कहा कि तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में चुनाव चल रहे हैं और सांसद अपने क्षेत्रों में व्यस्त हैं। ऐसे समय में संसद सत्र बुलाना सांसदों को उनके संवैधानिक दायित्वों से दूर करने जैसा है। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि यह आदर्श चुनाव आचार संहिता का सीधा उल्लंघन है। खरगे ने चुनाव आयोग पर भी निशाना साधते हुए कहा कि आयोग वर्तमान में गृह मंत्रालय के एक अधीनस्थ कार्यालय की तरह व्यवहार कर रहा है, जिससे निष्पक्षता की उम्मीद करना बेमानी लगता है।
महिला सशक्तिकरण का श्रेय: कांग्रेस के ऐतिहासिक योगदान का उल्लेख
महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर कांग्रेस को अग्रणी बताते हुए खरगे ने कहा कि पार्टी को इसके लिए किसी से ‘सर्टिफिकेट’ लेने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने राजीव गांधी के विजन और 73वें व 74वें संविधान संशोधन (1993) का जिक्र किया, जिसके जरिए स्थानीय निकायों में महिलाओं को एक-तिहाई आरक्षण मिला। उन्होंने गर्व से कहा कि आज देश में लगभग 14.5 लाख निर्वाचित महिला प्रतिनिधि इसी ऐतिहासिक पहल की देन हैं। सरोजिनी नायडू से लेकर सोनिया गांधी तक, कांग्रेस ने हमेशा महिलाओं को नेतृत्व की अग्रिम पंक्ति में रखा है।
CWC और विपक्षी एकजुटता के साथ बनेगी सामूहिक रणनीति
अंत में खरगे ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस ने हमेशा महिला आरक्षण बिल का समर्थन किया है और सोनिया गांधी व राहुल गांधी ने इसके लिए सरकार को कई बार पत्र भी लिखे हैं। 2023 के हैदराबाद अधिवेशन में भी इस पर चर्चा हुई थी। हालांकि, सरकार द्वारा इसे जनगणना और परिसीमन के बाद लागू करने की शर्त जोड़ना संदेह पैदा करता है। उन्होंने कहा कि आज की CWC बैठक का उद्देश्य प्रस्तावित संशोधनों पर पार्टी की राय स्पष्ट करना और विपक्षी दलों के साथ मिलकर एक सामूहिक व एकजुट रणनीति तैयार करना है ताकि देश के हितों की रक्षा की जा सके।
Read More : Kal Ka Mausam: मौसम की लुका-छिपी! तपिश के साथ होगी वापसी, जानें किन राज्यों में मंडरा रहे बारिश के बादल










