Makrana News: राजस्थान के मकराना स्थित अरावली पॉलीगॉन क्षेत्र का कालानाडा खनन इलाका गुरुवार तड़के भीषण प्राकृतिक और मानव-जनित आपदा का गवाह बना। मूसलाधार बारिश और लंबे समय से चल रहे बेलगाम अवैध खनन के कारण यहाँ विनाश का ऐसा खौफनाक मंजर देखने को मिला, जिसने सबको हिलाकर रख दिया। देखते ही देखते एक के बाद एक करीब 6 खदानें ताश के पत्तों की तरह ढह गईं। इस भयानक हादसे की चपेट में आकर जाखली जाने वाला मुख्य कालानाडा-कटाणी मार्ग पूरी तरह ध्वस्त हो गया और सैकड़ों फीट गहरे खदान के खौफनाक गड्ढों में हमेशा के लिए समा गया।
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टला बड़ा हादसा, पर 10 गांवों की बढ़ी मुश्किलें
इस विनाशकारी घटना में सबसे बड़ी राहत की बात यह रही कि हादसे के वक्त खदानों में कामकाज बंद था और मुख्य मार्ग पर भी किसी वाहन या व्यक्ति की आवाजाही नहीं हो रही थी। अन्यथा, सैकड़ों फीट गहरे खदान के गर्त में सड़क समाने से एक बहुत बड़ा दर्दनाक नरसंहार हो सकता था।
हालांकि, जनहानि तो टल गई, लेकिन इस तबाही का सीधा खामियाजा ग्रामीण इलाकों की जनता को भुगतना पड़ रहा है। सड़क का वजूद मिट जाने के कारण मकराना से सटे करीब 10 गांवों का मुख्य मार्ग से सीधा संपर्क पूरी तरह कट चुका है। ग्रामीण अब पूरी तरह से ठप पड़े यातायात और परिवहन संकट से जूझ रहे हैं।
प्रशासनिक सुस्ती और अवैध खनन के गंभीर आरोप
घटना के बाद से स्थानीय निवासियों और किसानों में शासन-प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीणों का स्पष्ट आरोप है कि पॉलीगॉन क्षेत्र की खदानों (विशेषकर संख्या 4 से 10 तक) में पिछले डेढ़ साल से खनन माफिया नियमों को ताक पर रखकर धड़ल्ले से अवैध खनन को अंजाम दे रहे थे।
खोखली होती जमीन: मुनाफा कमाने की अंधी हवस में माफियाओं ने सड़क के बिल्कुल करीब और कृषि भूमि के नीचे से भी अवैध रूप से मिनरल्स निकाल लिए, जिससे पूरी जमीन भीतर से खोखली हो गई थी।
अनदेखी का नतीजा: कुछ समय पूर्व उपखंड अधिकारी ने खनिज अभियंता को आधिकारिक नोटिस जारी कर सुरक्षा के कड़े प्रबंध करने के सख्त निर्देश दिए थे। परंतु, प्रशासनिक सुस्ती, सुस्त रवैये और विभागीय अनदेखी का नतीजा आज पूरे रास्ते के मलबे में तब्दील होने के रूप में सामने आया है।
अधिकारियों का दौरा और लीपापोती का खेल
हादसे की सूचना मिलते ही वृत्ताधिकारी विक्की नागपाल और थाना प्रभारी पंकज विश्नोई भारी पुलिस बल के साथ तुरंत मौके पर पहुंचे और पूरे दुर्घटनाग्रस्त क्षेत्र को सील कर दिया।
दूसरी ओर, प्रशासनिक महकमे में अपनी गर्दन बचाने और जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने के लिए आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो चुका है। खनिज विभाग के अभियंता ललित मंगल अपनी नाकामी छिपाते हुए अजीब तर्क दे रहे हैं कि नगर परिषद की सीवरेज पाइपलाइन में लीकेज और बारिश के कटाव के कारण जमीन धंसी है।
इसके विपरीत, पंचायत समिति प्रधान सुमिता खींचड़ ने खुलकर आरोप लगाया है कि खनिज विभाग की सीधी मिलीभगत के बिना क्षेत्र में इतना बड़ा अवैध खनन फल-फूल ही नहीं सकता था। उन्होंने इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच तथा दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। भले ही प्रशासन अब जांच के नाम पर लीपापोती करने में जुटा हो, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्रशासनिक लापरवाही और माफियाओं की भूख का शिकार आम जनता कब तक बनती रहेगी?
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