यूपी में स्मार्ट मीटर की गुणवत्ता पर बड़ा अपडेट, 5.22 लाख चेक मीटरों के आंकड़ों से हुआ मिलान

लखनऊ पावर कॉरपोरेशन ने शुक्रवार देर रात स्मार्ट मीटर की गुणवत्ता की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक कर दी है। रिपोर्ट में मीटर मानकों के मुताबिक सटीक पाए गए हैं। मीटर की संयोजकता और सॉफ्टवेयर की जांच अभी प्रचलित है, जिसकी रिपोर्ट 15 दिनों में संभावित है। रिपोर्ट के मुताबिक जांच समिति ने पाया कि मीटर स्मार्ट मीटर की आवश्यकताओं को पूरा करने में सफल हैं। रिपोर्ट में स्मार्ट मीटर की सटीकता अनुमेय सीमा के भीतर है। 218 सैंपल टेस्ट की रिपोर्ट का टेस्ट किया गया था। इसी के आधार पर समिति इस निष्कर्ष तक पहुंची है। इसकी सटीकता का परीक्षण करने

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Published On :

अगस्त 22, 2026

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लखनऊ
पावर कॉरपोरेशन ने शुक्रवार देर रात स्मार्ट मीटर की गुणवत्ता की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक कर दी है। रिपोर्ट में मीटर मानकों के मुताबिक सटीक पाए गए हैं। मीटर की संयोजकता और सॉफ्टवेयर की जांच अभी प्रचलित है, जिसकी रिपोर्ट 15 दिनों में संभावित है। रिपोर्ट के मुताबिक जांच समिति ने पाया कि मीटर स्मार्ट मीटर की आवश्यकताओं को पूरा करने में सफल हैं।

रिपोर्ट में स्मार्ट मीटर की सटीकता अनुमेय सीमा के भीतर है। 218 सैंपल टेस्ट की रिपोर्ट का टेस्ट किया गया था। इसी के आधार पर समिति इस निष्कर्ष तक पहुंची है। इसकी सटीकता का परीक्षण करने के लिए 5.22 लाख चेक मीटरों के आंकड़ों का मिलान किया गया है। समिति ने पाया कि निविदा शर्तों का पूरी तरह पालन किया गया है। उपभोक्ता शिकायतों के आधार पर तीन स्मार्ट मीटरों की जांच गोमतीनगर स्थित हाईटेक प्रयोगशाला में की गई थी। परिणाम सफल रहे।

स्मार्ट मीटरों की गुणवत्ता पर उठ रहे सवालों के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मीटरों की गुणवत्ता की जांच करवाने के आदेश दिए थे। चार सदस्यीय कमेटी गठित करके इसकी जांच करवाई गई थी। मीटरों की शुरुआती जांच मध्यांचल विद्युत वितरण निगम की हाईटेक प्रयोगशाला में करवाई गई थी। हालांकि, इस प्रयोगशाला के पास स्मार्ट मीटर पार्ट-1 व पार्ट-2 की जांच के लिए राष्ट्रीय परीक्षण और अंशशोधन प्रयोगशाला प्रत्यायन बोर्ड (एनएबीएल) से जरूरी मान्यता नहीं मिली है। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद की शिकायत के बाद एनएबीएल ने अपने जवाब में इस बारे में खुद जानकारी दी थी।

बिना स्मार्ट मीटर दिए गए पौने तीन लाख बिजली कनेक्शन
इससे पहले प्रदेश में स्मार्ट मीटर की निर्धारित लागत से अधिक वसूली और कास्ट डाटा बुक के प्रावधानों के उल्लंघन मामले में गुरुवार को विद्युत नियामक आयोग में हुई सुनवाई के दौरान आयोग ने बिजली कंपनियों के रवैये पर कड़ा रुख अपनाया। प्रदेश की पांचों कंपनियों के प्रबंध निदेशकों ने व्यक्तिगत रूप से पेश होकर शपथपत्र प्रस्तुत किए। उन्होंने 92231 उपभोक्ताओं से अधिक वसूले गए 32 करोड़ 75 लाख रुपये बिजली बिलों में लौटाए जाने की जानकारी दी। सुनवाई के दौरान सामने आया कि पावर कारपोरेशन के आदेश के बावजूद करीब 75 फीसदी यानी 2 लाख 80 हजार से अधिक कनेक्शन नॉन स्मार्ट मीटर के दिए गए थे।

3,75 लाख नए कनेक्शनों में केवल 92231 स्मार्ट मीटर
विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने उपभोक्ताओं का पक्ष रखते हुए कहा कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर को नए कनेक्शन में अनिवार्य किए जाने के बाद बिजली कंपनियों के स्तर पर दोहरा मापदंड अपनाया गया। 10 सितंबर 2025 से 31 दिसंबर 2025 तक कुल 3,73,509 नए विद्युत कनेक्शन दिए जाने की जानकारी दी गई थी जबकि 17 अगस्त तक पावर कॉरपोरेशन के अपडेट आंकड़े के अनुसार यह संख्या बढ़कर 3,75,859 हो गई। इनमें से केवल 92,231 उपभोक्ताओं को ही स्मार्ट मीटर के माध्यम से कनेक्शन दिया गया