Maharashtra Language Policy: महाराष्ट्र में सिर्फ मराठी अनिवार्य, अन्य भाषाओं पर कोई बाध्यता नहीं-मुख्यमंत्री फडणवीस

क्या महाराष्ट्र के स्कूलों में अब हिंदी पढ़ना जरूरी नहीं होगा? सतारा में आयोजित 99वें मराठी साहित्य सम्मेलन के मंच से मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एक ऐसी घोषणा की है, जिसने भाषा को लेकर चल रही दशकों पुरानी बहस को नया मोड़ दे दिया है। जानिए, सीएम ने अन्य भाषाओं पर क्या कहा।

Maharashtra Language Policy

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जनवरी 2, 2026

Maharashtra Language Policy: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शुक्रवार को भाषा को लेकर चल रही बहस पर बड़ा और स्पष्ट बयान दिया। सतारा में आयोजित 99वें अखिल भारतीय मराठी साहित्य सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में केवल मराठी भाषा ही अनिवार्य है, इसके अलावा किसी अन्य भाषा को अनिवार्य नहीं किया गया है। मुख्यमंत्री ने यह भी साफ किया कि राज्य में भाषा के नाम पर भ्रम फैलाने की कोशिशें गलत हैं और सरकार का रुख पूरी तरह स्पष्ट है।

Maharashtra Language Policy : विदेशी भाषाओं का स्वागत, भारतीय भाषाओं का विरोध गलत

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि अंग्रेजी, फ्रेंच और स्पेनिश जैसी विदेशी भाषाओं को लोग खुले दिल से अपनाते हैं, लेकिन जब बात भारतीय भाषाओं की आती है तो विरोध किया जाता है, जो कि दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि भारतीय भाषाओं को भी वही सम्मान मिलना चाहिए, जो अंतरराष्ट्रीय भाषाओं को मिलता है। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि भाषा सीखना एक अवसर होना चाहिए, बाध्यता नहीं।

Maharashtra Language Policy: हिंदी को तीसरी भाषा बनाने पर हुआ था विरोध

मुख्यमंत्री ने याद दिलाया कि पिछले वर्ष भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार ने पहली कक्षा से हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में शुरू करने का निर्णय लिया था। हालांकि, इस फैसले के खिलाफ राज्यभर में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए। जनता की भावनाओं को देखते हुए सरकार ने इस निर्णय को वापस ले लिया और पूरे मामले की समीक्षा के लिए एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया।

भाषा की अनिवार्यता पर जारी रही व्यापक बहस

देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि महाराष्ट्र में भाषा को लेकर अनिवार्यता का मुद्दा लंबे समय से बहस का विषय रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया, “मुख्यमंत्री के तौर पर मैं फिर दोहराना चाहता हूं कि महाराष्ट्र में केवल मराठी ही अनिवार्य है। कोई अन्य भाषा अनिवार्य नहीं है।” उन्होंने यह भी कहा कि तीन-भाषा प्रणाली को लेकर मतभेद केवल इस बात पर थे कि तीसरी भाषा किस कक्षा से पढ़ाई जानी चाहिए।

छात्रों को अपनी पसंद की भाषा सीखने की आज़ादी

सीएम फडणवीस ने कहा कि राज्य में छात्रों को यह पूरी स्वतंत्रता है कि वे अपनी पसंद की कोई भी भारतीय भाषा सीख सकते हैं। सरकार का उद्देश्य किसी भाषा को थोपना नहीं, बल्कि बहुभाषी संस्कृति को प्रोत्साहित करना है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का मकसद ज्ञान बढ़ाना है, न कि विवाद खड़ा करना।

एमवीए सरकार की रिपोर्ट का भी किया जिक्र

विवाद के संदर्भ में मुख्यमंत्री ने बताया कि महाविकास आघाड़ी (MVA) सरकार के कार्यकाल के दौरान तैयार की गई एक रिपोर्ट में पहली कक्षा से हिंदी को अनिवार्य बनाने की सिफारिश की गई थी। मौजूदा सरकार ने शुरुआत में उसी रिपोर्ट के आधार पर आगे बढ़ने की कोशिश की, लेकिन जनता की प्रतिक्रिया के बाद कदम पीछे खींच लिए गए।

समिति गठित कर समाधान खोजने की कोशिश

मुख्यमंत्री ने बताया कि हिंदी को पहली कक्षा से अनिवार्य बनाने के मुद्दे पर विरोध बढ़ने के बाद नरेंद्र जाधव की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया। इस समिति का उद्देश्य सभी पक्षों की राय लेकर संतुलित समाधान निकालना है। उन्होंने दोहराया कि अंतिम फैसला भी इसी सिद्धांत पर आधारित होगा कि महाराष्ट्र में मराठी के अलावा कोई भाषा अनिवार्य नहीं होगी।

भारतीय भाषाओं के सम्मान की अपील

अपने भाषण के अंत में मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि भारतीय भाषाएं हमारी सांस्कृतिक पहचान हैं और उन्हें सम्मान मिलना चाहिए। विदेशी भाषाओं को सीखना गलत नहीं है, लेकिन भारतीय भाषाओं को नजरअंदाज करना उचित नहीं। सरकार का रुख साफ है कि मराठी की गरिमा बनी रहे और साथ ही अन्य भाषाओं को भी सम्मानजनक स्थान मिले।

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