Maharashtra Freedom of Religion Act: 28 अगस्त से लागू होगा नया धर्मांतरण कानून, बच्चे के धर्म पर बड़ा नियम

महाराष्ट्र में धर्मांतरण को लेकर नया कानून चर्चा में है। 28 अगस्त से लागू होने वाली व्यवस्था में जबरन, धोखे, दबाव या प्रलोभन से धर्म बदलवाने पर कड़ी कार्रवाई का प्रावधान है। लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा बच्चे के धर्म को लेकर बने नियम की हो रही है। आखिर कानून में क्या बदला है?

Maharashtra Freedom of Religion Act

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अगस्त 18, 2026

Maharashtra Freedom of Religion Act:  महाराष्ट्र में धर्म की स्वतंत्रता कानून, 2026 आगामी 28 अगस्त से लागू हो जाएगा। राज्य सरकार ने इसकी अधिसूचना राजपत्र में जारी कर दी है। नया कानून राज्य में सभी धर्मों के लोगों पर लागू होगा। इसके तहत किसी व्यक्ति का जबरन, धोखे से, दबाव डालकर या अनुचित प्रलोभन के जरिए धर्म परिवर्तन कराना अपराध माना जाएगा। कानून लागू होने के बाद धर्म परिवर्तन से जुड़े मामलों के लिए महाराष्ट्र में नई कानूनी व्यवस्था प्रभावी हो जाएगी।

जबरन धर्म परिवर्तन पर सात साल तक सजा

नए कानून में जबरन धर्म परिवर्तन के मामलों में कड़े दंड का प्रावधान किया गया है। ऐसे अपराध में दोषी पाए जाने पर सात साल तक की जेल हो सकती है। इसके अलावा अपराध को गैर-जमानती बनाया गया है। सरकार का कहना है कि कानून का उद्देश्य किसी व्यक्ति की धार्मिक स्वतंत्रता को प्रभावित करना नहीं, बल्कि धोखाधड़ी, जबरदस्ती और प्रलोभन के जरिए होने वाले अवैध धर्म परिवर्तन को रोकना है।

स्वेच्छा से धर्म बदलने के लिए 60 दिन पहले आवेदन

कानून में अपनी इच्छा से धर्म परिवर्तन करने वाले लोगों के लिए भी प्रक्रिया तय की गई है। अगर कोई व्यक्ति स्वेच्छा से अपना धर्म बदलना चाहता है, तो उसे निर्धारित प्राधिकारी के पास 60 दिन पहले आवेदन करना होगा। यानी धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया पूरी तरह व्यक्तिगत निर्णय होने के बावजूद उसे कानून में निर्धारित प्रशासनिक प्रक्रिया का पालन करना होगा।

विधानसभा के दोनों सदनों से पारित हुआ था विधेयक

इस कानून का आधार बना महाराष्ट्र धर्म की स्वतंत्रता विधेयक, 2026 कुछ दिन पहले महाराष्ट्र विधानसभा और विधान परिषद, दोनों सदनों से पारित हुआ था। हालांकि, कुछ संगठनों ने विधेयक का विरोध भी किया था। उनका आरोप था कि इससे नागरिकों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता और निजी फैसलों में सरकारी हस्तक्षेप बढ़ सकता है। राज्य सरकार ने इन आशंकाओं को खारिज करते हुए कानून को संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के उद्देश्य से जरूरी बताया।

अलग धर्म में शादी को लेकर भी विशेष प्रावधान

कानून में अंतरधार्मिक विवाह और उससे जुड़े धर्म परिवर्तन को लेकर भी विशेष प्रावधान किया गया है। इसके अनुसार, अगर किसी गैरकानूनी धर्म परिवर्तन के बाद शादी या रिश्ता होता है और उससे बच्चा पैदा होता है, तो बच्चे का धर्म उसकी मां के उस धर्म के आधार पर माना जाएगा, जिसे वह शादी या रिश्ते से पहले मानती थी। यह प्रावधान महाराष्ट्र के कानून को कुछ अन्य राज्यों के धर्म परिवर्तन संबंधी कानूनों से अलग बनाता है।

शादी के बहाने धर्म परिवर्तन पर जुर्माना

विधेयक में शादी के बहाने जबरन या गैरकानूनी धर्म परिवर्तन कराने पर भी सख्त सजा का प्रावधान है। ऐसे मामलों में दोषी व्यक्ति को सात साल तक की जेल और एक लाख रुपये तक का जुर्माना भुगतना पड़ सकता है। अगर मामला नाबालिग, मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति, महिला या अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के व्यक्ति से जुड़ा है, तो सात साल तक की सजा के साथ पांच लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

सामूहिक धर्म परिवर्तन पर भी कड़ी कार्रवाई

कानून में सामूहिक धर्म परिवर्तन के मामलों को भी गंभीर अपराध माना गया है। ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर सात साल तक की जेल और पांच लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। वहीं, अगर कोई व्यक्ति बार-बार इस तरह के अपराध में शामिल पाया जाता है, तो उसे 10 साल तक की जेल और पांच लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।

सरकार ने बताया कानून का उद्देश्य

महाराष्ट्र के गृह राज्य मंत्री पंकज भोयर के मुताबिक, इस कानून का मकसद संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करते हुए धोखाधड़ी, जबरदस्ती और प्रलोभन के जरिए होने वाले धर्म परिवर्तन पर रोक लगाना है। सरकार का कहना है कि कानून का केंद्र स्वैच्छिक धार्मिक स्वतंत्रता को रोकना नहीं, बल्कि अवैध तरीकों से धर्म परिवर्तन कराने वालों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करना है।

अमृता फडणवीस ने कानून का स्वागत किया

नागपुर में एक कार्यक्रम के दौरान अमृता फडणवीस ने कानूनों को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि देश का आने वाला समय युवाओं का है और महिलाओं की प्रगति के लिए सरकार की ओर से किए जा रहे प्रयासों का स्वागत किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि महिलाओं के हित और प्रगति के लिए उपयोगी कानूनों का समर्थन होना चाहिए।

वंदे मातरम और देवेंद्र फडणवीस पर भी बोलीं

अमृता फडणवीस ने वंदे मातरम से जुड़े विवाद पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि संसद में कानून बनने के बाद सभी नागरिकों को उसका पालन करना चाहिए। वहीं, जब उनसे देवेंद्र फडणवीस को केंद्र में बड़ी जिम्मेदारी मिलने की चर्चाओं के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र देश का अग्रणी राज्य है और देवेंद्र फडणवीस को राज्य में ही अपनी जिम्मेदारी निभाते रहना चाहिए।

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