US Iran Conflict : ट्रंप ने होर्मुज को अमेरिकी क्षेत्र बताया, ईरान ने मांगें पूरी होने तक रास्ता बंद रखा

अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर तनाव फिर चरम पर पहुंच गया है। डोनाल्ड ट्रंप ने इसे “न्यू यूएस टेरिटरी” बताया, जबकि ईरान ने अमेरिकी शर्तें पूरी होने तक रास्ता बंद रखने का ऐलान किया। आखिर तेहरान की वे कौन-सी मांगें हैं, जिन पर दुनिया की नजर टिकी है?

US Iran Conflict

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अगस्त 18, 2026

US Iran Conflict : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म सोशल ट्रुथ पर बड़ा दावा किया है। ट्रंप ने अपने पोस्ट में होर्मुज को अमेरिका का क्षेत्र बताते हुए कहा कि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर अब अमेरिकी नियंत्रण है। उनके इस बयान से मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के और बढ़ने की आशंका पैदा हो गई है। यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बना हुआ है।

ईरान ने भी साफ कर दिया अपना रुख

ट्रंप की टिप्पणी से पहले ईरान के शीर्ष वार्ताकार मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने होर्मुज स्ट्रेट को खोलने को लेकर अपना रुख स्पष्ट कर दिया था। उन्होंने कहा कि जब तक अमेरिका समझौते के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा नहीं करता, तब तक यह समुद्री मार्ग नहीं खोला जाएगा। ईरान का दावा है कि उसकी मांगें जून में अमेरिका और ईरान के बीच हुए सीजफायर समझौते का हिस्सा थीं, लेकिन बाद में वह समझौता टूट गया।

ईरान ने अमेरिका के सामने रखीं तीन प्रमुख मांगें

ईरान की ओर से अमेरिका के सामने कई प्रमुख शर्तें रखी गई हैं। इनमें सबसे पहले अमेरिकी समुद्री नाकेबंदी समाप्त करने की मांग शामिल है। इसके अलावा ईरान अपने तेल पर लगाए गए प्रतिबंधों को हटाने की मांग कर रहा है। ईरान की तीसरी बड़ी मांग विदेशों में जब्त की गई उसकी संपत्तियों और फंड को वापस बहाल करने से जुड़ी है। इन मांगों को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद बरकरार हैं।

दुनिया के लिए क्यों अहम है होर्मुज स्ट्रेट?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा और समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और आगे अरब सागर से जोड़ता है। वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री रास्ते से होकर गुजरता है। इसलिए यहां किसी भी तरह की सैन्य गतिविधि, नाकेबंदी या जहाजों की आवाजाही में रुकावट का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।

जहाजों की आवाजाही पर ईरान का नियंत्रण

रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी में संघर्ष शुरू होने के बाद ईरान ने होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर नियंत्रण बढ़ा दिया है। यहां से गुजरने वाले जहाजों को ईरान से अनुमति लेने और ट्रांजिट फीस देने की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने ईरान की इस व्यवस्था का विरोध किया है। इससे समुद्री मार्ग को लेकर तनाव और बढ़ गया है।

ओमान के साथ ईरान की बातचीत आगे बढ़ी

होर्मुज स्ट्रेट से ईरान और ओमान दोनों की सीमाएं जुड़ी हुई हैं। दोनों देशों के बीच समुद्री आवाजाही और नेविगेशन को लेकर बातचीत भी चल रही है। ईरान ने 17 अगस्त को कहा कि ओमान के साथ संयुक्त बयान और नए नेविगेशन रूट से जुड़े भौगोलिक बिंदुओं पर सहमति बनी है। तेहरान के मुताबिक, दोनों देशों के बीच बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है।

ट्रंप ने परमाणु हथियार का मुद्दा उठाया

अमेरिकी राष्ट्रपति का कहना है कि ईरान वॉशिंगटन के साथ समझौता करना चाहता है, लेकिन वह ऐसी डील स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है, जिसे अमेरिका जरूरी मानता है। ट्रंप के मुताबिक, दोनों पक्षों के बीच बातचीत के लिए तय 60 दिन की अवधि भी पूरी हो चुकी है। उन्होंने कहा कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना अमेरिका की प्राथमिकता बनी हुई है।

होर्मुज पर नियंत्रण को लेकर ट्रंप का दावा

ट्रंप ने कहा कि अमेरिका नाकेबंदी के जरिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को नियंत्रित कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें इस क्षेत्र को अमेरिकी इलाका घोषित करने का विचार पसंद है। उनके इस बयान ने पहले से तनावपूर्ण स्थिति में नई राजनीतिक और रणनीतिक बहस को जन्म दे दिया है। ईरान की ओर से होर्मुज को लेकर सख्त रुख अपनाए जाने के बीच ट्रंप का बयान आने वाले दिनों में हालात को और संवेदनशील बना सकता है।

अमेरिका-ईरान तनाव के बीच बढ़ी चिंता

होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच जारी टकराव का असर केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं रहने की आशंका है। यह मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इसलिए यदि यहां लंबे समय तक जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है, तो अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और समुद्री व्यापार पर दबाव बढ़ सकता है। फिलहाल दोनों पक्ष अपनी-अपनी शर्तों पर कायम हैं और तनाव कम होने के बजाय बढ़ता नजर आ रहा है।

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