UP Politics : मोदी-योगी पर मौलाना रजवी का बदला सुर, मुसलमानों से की बड़ी अपील

मोदी और योगी को लेकर मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी के बयान ने सियासी हलचल बढ़ा दी है। उन्होंने मुसलमानों से प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को गाली न देने की अपील की। साथ ही कहा कि बीजेपी को हराने का ठेका सिर्फ मुस्लिमों का नहीं है। आखिर उन्होंने ऐसा क्यों कहा?

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Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अगस्त 18, 2026

UP Politics : बरेली में ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी ने मुसलमानों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल नहीं करने की अपील की है। प्रेस को जारी बयान में उन्होंने कहा कि समुदाय को लगातार नकारात्मक राजनीति में उलझने के बजाय सकारात्मक सोच के साथ अपने भविष्य और नई पीढ़ी के विकास पर ध्यान देना चाहिए।

भाजपा विरोध को लेकर मौलाना ने कही बड़ी बात

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने कहा कि पिछले कई वर्षों से मुसलमानों के बीच भाजपा के विरोध की राजनीति को लेकर लगातार चर्चा होती रही है। उनके मुताबिक, अब इस तरीके को बदलने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि मुसलमानों ने भाजपा को हराने का कोई ठेका नहीं लिया है और समुदाय को अपने सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक विकास के मुद्दों को प्राथमिकता देनी चाहिए।

सपा और अन्य दलों पर लगाए राजनीतिक इस्तेमाल के आरोप

मौलाना ने अपने बयान में समाजवादी पार्टी और अन्य कथित धर्मनिरपेक्ष दलों पर मुसलमानों को राजनीतिक रूप से प्रभावित करने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि लंबे समय से समुदाय को भाजपा के खिलाफ लामबंद किया जाता रहा, जिसका राजनीतिक फायदा संबंधित दलों को मिलता रहा। वहीं, उनके अनुसार इसका नुकसान मुस्लिम समाज को उठाना पड़ा और विकास के कई महत्वपूर्ण मुद्दे पीछे छूट गए।

मुसलमानों को नजरिया बदलने की सलाह

उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि मुस्लिम समाज अपने राजनीतिक दृष्टिकोण पर दोबारा विचार करे। मौलाना के मुताबिक, हर जगह भाजपा का विरोध करने के बजाय लोगों को अपने परिवार, बच्चों की शिक्षा, रोजगार और भविष्य से जुड़े सवालों पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि सकारात्मक सोच के जरिए नई पीढ़ी के लिए बेहतर सामाजिक और आर्थिक वातावरण तैयार किया जा सकता है।

शादी समारोह में भाजपा नेताओं को बुलाने पर विवाद का जिक्र

मौलाना ने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दलों के समर्थक मुसलमानों को भाजपा नेताओं से दूरी बनाए रखने के लिए प्रेरित करते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर कोई मुस्लिम परिवार अपने बेटे या बेटी की शादी में भाजपा के किसी मंत्री या विधायक को आमंत्रित करता है तो कई बार उसका विरोध और बहिष्कार तक किया जाता है। उन्होंने इसे राजनीतिक दबाव की रणनीति बताया।

सपा के पुराने राजनीतिक रिश्तों का हवाला

अपने बयान में मौलाना ने समाजवादी पार्टी के पुराने राजनीतिक घटनाक्रमों का उल्लेख करते हुए पार्टी के कथित दोहरे राजनीतिक रवैये पर सवाल उठाए। उन्होंने मुलायम सिंह यादव और भाजपा के नेताओं के बीच रहे राजनीतिक संबंधों का उदाहरण दिया। साथ ही उन्होंने मुस्लिम समाज से अपील की कि वह राजनीतिक दलों के बयानों और रणनीतियों को समझकर अपने हितों के आधार पर निर्णय ले।

विरोध प्रदर्शनों से विकास प्रभावित होने का दावा

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने कहा कि लंबे समय तक चली विरोध की राजनीति ने मुस्लिम समाज के विकास को प्रभावित किया है। उन्होंने दावा किया कि कई मौकों पर समुदाय के लोगों को प्रदर्शन और आंदोलन के लिए आगे किया गया, जबकि राजनीतिक दलों के नेताओं को उसका प्रत्यक्ष नुकसान नहीं उठाना पड़ा। उनके मुताबिक, ऐसे मामलों में आम लोगों को कानूनी और सामाजिक परेशानियों का सामना करना पड़ा।

भविष्य और नई पीढ़ी पर ध्यान देने की अपील

मौलाना ने मुस्लिम समाज से राजनीतिक दलों के प्रभाव से बाहर निकलकर अपने भविष्य की योजना बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि शिक्षा, रोजगार, कारोबार और सामाजिक प्रगति जैसे मुद्दों पर गंभीरता से काम करने की जरूरत है। उनका कहना है कि सकारात्मक सोच अपनाकर ही नई पीढ़ी के लिए बेहतर अवसर तैयार किए जा सकते हैं और समुदाय को आगे बढ़ाया जा सकता है।

मौलाना मदनी का बयान भी रहा था चर्चा में

गौरतलब है कि इससे पहले मौलाना मदनी का बयान भी चर्चा में आया था। उन्होंने वंदे मातरम् बिल को लेकर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि मुसलमान केवल एक अल्लाह की इबादत करता है। ऐसे में धार्मिक मान्यताओं और राष्ट्रीय प्रतीकों से जुड़े मुद्दों पर मुस्लिम संगठनों और धर्मगुरुओं की प्रतिक्रियाएं लगातार राजनीतिक बहस का हिस्सा बन रही हैं।

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