Ujjain Archeology : महाकाल मंदिर परिसर की खुदाई में निकला प्राचीन शिवलिंग, पुरातत्व विभाग करेगा गहन जांच

उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर मंदिर परिसर में जारी विस्तार कार्य के दौरान उस वक्त सब दंग रह गए जब जमीन के नीचे से एक अत्यंत प्राचीन शिवलिंग और कुछ ऐतिहासिक अवशेष बरामद हुए। पुरातत्व विभाग की प्रारंभिक रिपोर्ट ने प्राचीन भारतीय वास्तुकला के ऐसे रहस्यों की ओर इशारा किया है जो इतिहास बदल सकते हैं। जानिए आखिर यह शिवलिंग कितना पुराना है और ज़मीन के नीचे क्या छिपा है?

Ujjain Archeology

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मई 1, 2026

Ujjain Archeology :  मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग बाबा महाकालेश्वर के आंगन में शुक्रवार की अलसुबह एक विस्मयकारी घटना घटी। मंदिर परिसर के गेट नंबर चार के समीप जब पोकलेन मशीन से टनल के लिए खुदाई की जा रही थी, तभी जमीन के भीतर से एक प्राचीन शिवलिंग और शिव परिवार की आकृतियां प्रकट हुईं। सुबह करीब 4 बजे हुई इस घटना ने वहां मौजूद कर्मचारियों और श्रद्धालुओं को अचंभित कर दिया। जैसे ही मशीन का पंजा जमीन की गहराई में गया, वहां से पत्थर की ठोस मूर्तियां बाहर आईं, जिसके बाद खुदाई का कार्य तुरंत रोक दिया गया।

टनल निर्माण के दौरान मिलीं ऐतिहासिक प्रतिमाएं

महाकालेश्वर मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए वर्तमान में अंडरपास और टनल का निर्माण कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है। पिछले एक महीने से यहाँ खुदाई जारी है। शुक्रवार को जब पोकलेन मशीन ने जमीन में पंजा मारा, तो वहां से एक भव्य शिवलिंग के साथ-साथ शिव परिवार का हिस्सा मानी जाने वाली दो अन्य कलाकृतियां भी बाहर निकलीं। मौके पर मौजूद इंजीनियर सतीश राजपूत ने तत्परता दिखाते हुए काम रुकवाया और मंदिर प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी सूचना दी। जानकारी मिलते ही मंदिर के पुजारी और प्रशासनिक अधिकारी घटनास्थल पर पहुँचे और विधि-विधान से पूजन अर्चन किया।

एक हजार वर्ष पुराना होने का अनुमान: नीचे हो सकता है मंदिर

इंजीनियर सतीश राजपूत ने घटना का विवरण देते हुए बताया कि खुदाई के दौरान जैसे ही मशीन किसी ठोस चीज से टकराई, उन्होंने सावधानी से जाँच की। मिट्टी हटाने पर वहां स्पष्ट रूप से शिवलिंग दिखाई दिया। प्रारंभिक दृष्टि में यह शिवलिंग और इसके साथ मिले पत्थर करीब एक हजार वर्ष पुराने प्रतीत हो रहे हैं। विशेषज्ञों और प्रत्यक्षदर्शियों का मानना है कि जिस स्थान पर ये प्रतिमाएं मिली हैं, वहां प्राचीन काल में कोई बड़ा मंदिर रहा होगा जो समय के साथ जमीन में समा गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तहसीलदार और मंदिर प्रबंध समिति के अधिकारियों ने निर्माण कार्य पर फिलहाल पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है।

पुरातत्व विभाग की जांच और सुरक्षा के कड़े इंतजाम

इस महत्वपूर्ण खोज के बाद अब पुरातत्व विभाग (Archaeological Survey of India) को आधिकारिक तौर पर सूचित कर दिया गया है। विभाग की टीम जल्द ही मौके पर पहुँचकर इन प्रतिमाओं की ऐतिहासिकता, बनावट और समय काल की वैज्ञानिक जांच करेगी। जब तक पुरातत्व विभाग की विस्तृत रिपोर्ट नहीं आ जाती, तब तक टनल का निर्माण कार्य बाधित रहेगा। खुदाई स्थल के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और बैरिकेडिंग लगा दी गई है ताकि प्राचीन धरोहर को कोई नुकसान न पहुँचे और वैज्ञानिक साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ न हो।

श्रद्धालुओं की आस्था और विशेषज्ञों का मत

जमीन से प्राचीन शिवलिंग निकलने की खबर फैलते ही उज्जैन के स्थानीय निवासियों और बाहर से आए श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है। लोग इसे बाबा महाकाल का चमत्कार और साक्षात उपस्थिति मानकर दर्शन के लिए उत्सुक हैं। ज्योतिषाचार्य अक्षत व्यास के अनुसार, महाकाल मंदिर का पूरा परिक्षेत्र प्राचीन काल से ही तंत्र और अध्यात्म का केंद्र रहा है। यहाँ पहले भी खुदाई के दौरान कई प्राचीन अवशेष और मूर्तियां मिलती रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह खोज उज्जैन के प्राचीन इतिहास और मंदिर स्थापत्य कला के छिपे हुए रहस्यों को उजागर करने में मील का पत्थर साबित हो सकती है।

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