TVK MLA Sethupathi : मद्रास हाईकोर्ट का तगड़ा झटका, क्या अयोग्य घोषित होंगे TVK विधायक सेतुपति?

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 में सबसे चर्चित जीत दर्ज करने वाले TVK विधायक सेतुपति की मुश्किलें बढ़ गई हैं। मद्रास हाईकोर्ट ने उनके निर्वाचन पर रोक लगा दी है। क्या दोबारा मतगणना (Recounting) होगी या रद्द होगा चुनाव? जानें उस एक वोट की कहानी जिसने थलपति विजय के विधायक को संकट में डाल दिया।

TVK MLA Sethupathi

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मई 12, 2026

TVK MLA Sethupathi :  तमिलनाडु की राजनीति में एक नाटकीय मोड़ आ गया है। मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) के विधायक आर श्रीनिवास सेतुपति को एक बड़ा झटका देते हुए उन्हें विधानसभा की कार्यवाही में शामिल होने से रोक दिया है। जस्टिस विक्टोरिया गौरी और जस्टिस सेंथिलकुमार की खंडपीठ ने यह आदेश मंगलवार (12 मई) को होने वाली महत्वपूर्ण कार्यवाही से ठीक पहले जारी किया। कोर्ट का यह फैसला तिरुप्पत्तूर निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव परिणामों पर उठे सवालों के बाद आया है, जिससे राज्य के सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है।

मात्र एक वोट का अंतर और विवादों का घेरा

तिरुप्पत्तूर विधानसभा सीट पर हुआ मुकाबला हालिया चुनावी इतिहास के सबसे करीबी मुकाबलों में से एक था। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, श्रीनिवास सेतुपति को कुल 83,365 वोट प्राप्त हुए थे, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के उम्मीदवार केआर पेरियाकरुप्पन को 83,364 वोट मिले। महज एक वोट की इस जीत ने शुरू से ही विवादों को जन्म दे दिया था। हारने वाले उम्मीदवार पेरियाकरुप्पन ने तुरंत चुनाव परिणाम को चुनौती देते हुए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

पोस्टल बैलेट में हेराफेरी का गंभीर आरोप: निर्वाचन क्षेत्र संख्या का फेरबदल

डीएमके नेता पेरियाकरुप्पन की याचिका में चुनाव प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। उनका मुख्य आरोप एक पोस्टल बैलेट (डाक मतपत्र) में की गई गड़बड़ी से जुड़ा है। याचिका के अनुसार, तिरुप्पत्तूर विधानसभा क्षेत्र (संख्या 185) के लिए डाला गया एक महत्वपूर्ण वोट गलत तरीके से वेल्लोर जिले के एक अन्य निर्वाचन क्षेत्र (संख्या 50) के खाते में जोड़ दिया गया। पेरियाकरुप्पन का दावा है कि यदि यह एक वोट सही तरीके से गिना जाता, तो चुनाव परिणाम उनके पक्ष में होता। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग को शिकायत करने के बावजूद उन्हें न्याय नहीं मिला, जिसके कारण उन्हें कानूनी शरण लेनी पड़ी।

हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी: प्रथम दृष्टया मामला बनता है

मद्रास हाईकोर्ट की बेंच ने याचिका पर सुनवाई के दौरान पाया कि शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत किए गए सबूतों में दम है। कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया’ (First Facie) यह मामला जांच के योग्य है। अदालत ने अपने अंतरिम आदेश में स्पष्ट किया कि जब तक मामले की पूरी सच्चाई सामने नहीं आ जाती, तब तक श्रीनिवास सेतुपति विधायक के रूप में सदन की किसी भी कार्यवाही या विश्वास मत (Confidence Vote) की प्रक्रिया में हिस्सा नहीं ले सकेंगे। यह आदेश सेतुपति की विधायक की शक्तियों को फिलहाल के लिए सीमित कर देता है।

चुनाव आयोग का बचाव और कोर्ट के कड़े निर्देश

दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने कोर्ट में अपनी दलील देते हुए कहा कि परिणामों की घोषणा के बाद केवल ‘चुनाव याचिका’ (Election Petition) के माध्यम से ही चुनौती दी जा सकती है। आयोग ने यह भी दावा किया कि कोई भी डाक मतपत्र किसी दूसरे क्षेत्र में स्थानांतरित नहीं हुआ था। हालांकि, कोर्ट ने आयोग की दलीलों पर असंतोष जताते हुए उन्हें हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।

अदालत द्वारा जारी किए गए मुख्य निर्देश:

  • निर्वाचन क्षेत्र संख्या 185 से संबंधित संदिग्ध डाक मतपत्रों को तुरंत सीलबंद और सुरक्षित किया जाए।
  • मतगणना और डाक मतपत्रों की जांच से संबंधित सभी वीडियो फुटेज को उनके मूल इलेक्ट्रॉनिक रूप और बैकअप प्रतियों के साथ संरक्षित किया जाए।
  • पुनर्सत्यापन और अस्वीकार किए गए मतपत्रों का पूरा रिकॉर्ड अदालत के अगले आदेश तक सुरक्षित रखा जाए।

इस कानूनी लड़ाई ने अब तमिलनाडु विधानसभा के शक्ति परीक्षण के समीकरणों को भी प्रभावित कर दिया है, क्योंकि एक-एक सीट का महत्व निर्णायक साबित हो सकता है।

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