एक दशक में 17 अंकों की ऐतिहासिक कमी के साथ मध्यप्रदेश ने शिशु मृत्यु दर में उल्लेखनीय सुधार दर्ज

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिये किए गए सतत प्रयासों के परिणामस्वरूप मध्यप्रदेश ने शिशु स्वास्थ्य संकेतकों में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया है। भारत सरकार की सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (एसआरएस) रिपोर्ट 2024 के अनुसार प्रदेश की शिशु मृत्यु दर (आईएमआर) वर्ष 2014 के 52 प्रति 1000 जीवित जन्म से घटकर वर्ष 2024 में 35 प्रति 1000 जीवित जन्म हो गई है। पिछले एक दशक में 17 अंकों की ऐतिहासिक कमी के साथ मध्यप्रदेश ने शिशु मृत्यु दर में उल्लेखनीय सुधार दर्ज करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर

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Published On :

मई 22, 2026

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भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिये किए गए सतत प्रयासों के परिणामस्वरूप मध्यप्रदेश ने शिशु स्वास्थ्य संकेतकों में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया है। भारत सरकार की सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (एसआरएस) रिपोर्ट 2024 के अनुसार प्रदेश की शिशु मृत्यु दर (आईएमआर) वर्ष 2014 के 52 प्रति 1000 जीवित जन्म से घटकर वर्ष 2024 में 35 प्रति 1000 जीवित जन्म हो गई है। पिछले एक दशक में 17 अंकों की ऐतिहासिक कमी के साथ मध्यप्रदेश ने शिशु मृत्यु दर में उल्लेखनीय सुधार दर्ज करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर अपनी स्थिति को सशक्त बनाया है। यह उपलब्धि राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण, प्रभावी रणनीतियों एवं लक्षित हस्तक्षेपों की सफलता को प्रतिबिंबित करती है।

प्रदेश में नवजात एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिये 62 विशेष नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाइयों (एसएनसीयू), 200 नवजात शिशु स्थिरीकरण इकाइयों (एनबीएसयू) तथा मातृ-नवजात देखभाल इकाइयों (एमएनसीयू) का विस्तार किया गया है, जहाँ "ज़ीरो सेपरेशन" मॉडल के माध्यम से माँ एवं नवजात की संयुक्त देखभाल, शीघ्र स्तनपान एवं कंगारू मदर केयर (केएमसी) को बढ़ावा दिया जा रहा है।

डिजिटल नवाचारों के अंतर्गत ई-शिशु (ई-शिशु) पहल के माध्यम से मेडिकल कॉलेजों एवं जिला चिकित्सालयों की नवजात इकाइयों को विशेषज्ञ टेली-मेंटोरिंग से जोड़ा गया है। इस पहल को ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़, दिल्ली एवं ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़, रायपुर का तकनीकी एवं क्लिनिकल मेंटरिंग सहयोग प्राप्त हो रहा है। साथ ही अनमोल 2.0, एमपीसीडीएसआर, डीएसएस एवं एफबीएनसी सॉफ़्टवेयर जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से उच्च जोखिम मामलों की पहचान, नवजात निगरानी एवं डेटा आधारित निर्णय प्रणाली को मजबूत किया गया है।

 

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