West Bengal Politics: डूब रही है ममता की नैया? मदन मित्रा का इस्तीफा और अभिषेक बनर्जी पर बड़ा हमला

बंगाल की राजनीति में बुधवार को बड़ा उलटफेर हुआ। पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बेहद करीबी माने जाने वाले दिग्गज विधायक मदन मित्रा ने 'कालीघाट तृणमूल' के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है। पाला बदलते हुए उन्होंने विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी का साथ पकड़ा है। इस दलबदल ने टीएमसी की आंतरिक कलह को और गहरा कर दिया है, जिससे ममता खेमे की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

West Bengal Politics

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

जुलाई 15, 2026

West Bengal Politics: पश्चिम बंगाल की राजनीति में बुधवार को एक अभूतपूर्व घटनाक्रम देखने को मिला। ममता बनर्जी के अत्यंत करीबी माने जाने वाले ‘कालीघाट तृणमूल’ के कद्दावर नेता और कमरहटी से विधायक मदन मित्रा ने पार्टी के सभी सांगठनिक पदों से इस्तीफा दे दिया है। इस इस्तीफे ने न केवल तृणमूल कांग्रेस (TMC) की आंतरिक कलह को उजागर कर दिया है, बल्कि राज्य की सत्ताधारी पार्टी के लिए एक गंभीर संकट भी खड़ा कर दिया है।

राजनीतिक पाला बदलकर ऋतब्रत बनर्जी के खेमे में शामिल

बताते चले कि, इस्तीफे की औपचारिकता पूरी करने के तुरंत बाद मदन मित्रा ने पाला बदलते हुए विधानसभा में विरोधी दल के नेता ऋतब्रत बनर्जी का दामन थाम लिया। यह दलबदल बंगाल की राजनीति में एक बड़े शिफ्ट के रूप में देखा जा रहा है। अपने सिग्नेचर काले चश्मे और सफेद पंजाबी में विधानसभा पहुंचे मदन मित्रा सीधे ऋतब्रत बनर्जी के कक्ष में दाखिल हुए और उनके साथ बैठकर अपनी नई राजनीतिक दिशा स्पष्ट कर दी।

‘आलीशान पलंग’ छोड़ ‘साधारण खाट’ का रास्ता चुना

आपको बता दे कि, इस नाटकीय बदलाव पर मदन मित्रा ने अपनी चिरपरिचित शैली में तीखा कटाक्ष किया। उन्होंने कहा, “मैं पहले भी तृणमूल में था, आज भी वहीं हूं। बस मैंने अपना कमरा बदल लिया है। उस कमरे (कालीघाट) में शायद सुख का कोई आलीशान पलंग था, जबकि इस कमरे (विपक्ष) में एक साधारण खाट है। मैंने अपने लिए खाट का रास्ता ही चुना है।” उनका यह बयान पार्टी के भीतर मची रस्साकशी और सत्ता के सुख-दुख की ओर सीधा इशारा है।

ममता बनर्जी के प्रति आभार

पाला बदलने के बावजूद मदन मित्रा ने ममता बनर्जी के प्रति सम्मान प्रकट किया। उन्होंने आभार जताते हुए कहा कि ‘दीदी’ लंबे समय तक उनके साथ खड़ी रहीं। मित्रा ने विनम्रता दिखाते हुए कहा कि उन्होंने भी पार्टी के लिए एक गिलहरी की भांति योगदान देने की भरपूर कोशिश की। उनके इस बयान को राजनीतिक विश्लेषक एक सम्मानजनक विदाई और पुरानी निष्ठाओं के प्रति एक अंतिम सलाम के रूप में देख रहे हैं।

भ्रष्टाचार के साये में बागी तेवर और ईडी का दबाव

सूत्रों के अनुसार, इस दलबदल की पटकथा पिछले 24 घंटों में ही लिखी गई थी। हाल ही में भ्रष्टाचार के एक मामले में ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) द्वारा मदन मित्रा की पत्नी और दोनों बेटों को नोटिस भेजे जाने के बाद से ही हलचल तेज थी। मंगलवार देर रात मदन मित्रा बागी गुट के विधायक संदीपन साहा के पिता स्वर्णकमल साहा के घर पहुंचे थे। वहां हुई लंबी बैठक ने उनकी नाराजगी को सार्वजनिक कर दिया था, जिसके बाद आज दोपहर उन्होंने औपचारिक रूप से ममता-शिविर से दूरी बना ली।

‘कैमक स्ट्रीट’ के खिलाफ कल्याण बनर्जी का विस्फोटक हमला

मदन मित्रा के इस्तीफे के साथ ही पार्टी के भीतर का असंतोष और गहरा गया है। तृणमूल सांसद कल्याण बनर्जी ने एक बार फिर पार्टी नेतृत्व पर निशाना साधा। उन्होंने ‘कैमक स्ट्रीट’ (अभिषेक बनर्जी का कार्यालय) का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि वहां बैठे लोगों ने पार्टी की जड़ें खोखली कर दी हैं और सब कुछ खत्म कर दिया है। यह आंतरिक कलह अब पार्टी की एकजुटता के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है।