Lucknow News: संसद भवन परिसर के भीतर साधु का भेष धारण कर और भगवा कपड़े पहनकर राम मंदिर के कथित चढ़ावे व चोरी के मुद्दों पर विरोध प्रदर्शन करने वाले पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव की मुश्किलें अब लगातार बढ़ती जा रही हैं। संसद की दीवारों से शुरू हुआ यह राजनीतिक और धार्मिक विवाद अब सड़कों पर आ चुका है। शनिवार (1 अगस्त, 2026) को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में ‘सनातन रक्षा संगठन’ के बैनर तले पप्पू यादव के खिलाफ एक अत्यंत उग्र और आक्रामक प्रदर्शन किया गया। इस विरोध प्रदर्शन के दौरान संगठन और हिंदू समाज के लोगों में भारी गुस्सा देखने को मिला।
लखनऊ में निकाली गई प्रतीकात्मक शवयात्रा और चप्पलों से विरोध
सैकड़ों की संख्या में सड़कों पर उतरे ‘सनातन रक्षा संगठन’ के कार्यकर्ताओं ने सांसद पप्पू यादव के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और उनकी प्रतीकात्मक शवयात्रा निकाली। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं का गुस्सा इस कदर फूटा कि उन्होंने केवल पप्पू यादव ही नहीं, बल्कि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी की तस्वीरों पर भी चप्पलें मारकर अपना तीखा विरोध दर्ज कराया।
राजधानी की सड़कों पर ‘पप्पू यादव मुर्दाबाद’, ‘पप्पू यादव होश में आओ’ और ‘सनातन से जो टकराएगा, चूर-चूर हो जाएगा’ जैसे नारों से माहौल गूंज उठा। प्रदर्शनकारियों का साफ तौर पर आरोप था कि देश के सबसे बड़े और सर्वोच्च लोकतांत्रिक मंच (संसद) पर भगवा वस्त्र पहनकर इस तरह का नाटक और प्रदर्शन करना सनातन परंपरा, साधु-संतों और अखाड़ों का घोर अपमान है। उनका कहना है कि राम मंदिर के कथित मुदों की आड़ में भगवा का इस्तेमाल जानबूझकर एक एजेंडे के तहत किया गया, जिससे दुनिया भर के करोड़ों सनातनियों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।
सिर काटने पर 51 लाख रुपये का विवादित ऐलान
इस उग्र प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे सनातन रक्षा संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुरोध राय ने सांसद पप्पू यादव पर बेहद तीखा और आक्रामक हमला बोला। मीडिया और प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए उन्होंने एक बेहद विवादित और बड़ा ऐलान किया। अनुरोध राय ने खुले तौर पर घोषणा की कि “जो भी व्यक्ति सांसद पप्पू यादव का सिर काटकर लाएगा, उसे संगठन की तरफ से 51 लाख रुपये का नकद इनाम दिया जाएगा।”
अनुरोध राय ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि भगवा कोई राजनीतिक वेशभूषा या फैशन का साधन नहीं है, बल्कि यह त्याग, तपस्या, बलिदान और सनातन संस्कृति का सर्वोच्च प्रतीक है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि पप्पू यादव पर पहले से ही कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं, ऐसे में दागदार छवि वाले व्यक्ति को सनातन के पवित्र भगवा वस्त्र पहनने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि क्या ये नेता कभी दूसरे धर्मों के धार्मिक प्रतीकों और पहनावे के साथ ऐसा मजाक करने की हिम्मत दिखा सकते हैं? फिर बार-बार सिर्फ सनातन धर्म को ही क्यों निशाना बनाया जाता है?
अखिलेश और राहुल गांधी पर भी साधा निशाना
सनातन रक्षा संगठन के अध्यक्ष ने इस पूरे विवाद के लिए विपक्षी दलों के शीर्ष नेतृत्व को भी कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि संसद में पप्पू यादव ने यह नाटक पूरी तरह से अखिलेश यादव और राहुल गांधी के इशारे और उनकी मौजूदगी में किया था। उन्होंने कहा कि ये लोग हमेशा से सनातन संस्कृति का मजाक उड़ाते आए हैं। इनका राम मंदिर या धार्मिक मुद्दों से कोई वास्तविक लेना-देना नहीं है, बल्कि ये इस तरह के कृत्यों के जरिए केवल हिंदू धर्म को अपमानित करने का एजेंडा चला रहे हैं।
क्या है पूरा विवाद?
यह पूरा बड़ा बवाल एक दिन पहले संसद परिसर में हुए नाटकीय प्रदर्शन के बाद भड़का था। सांसद पप्पू यादव ने भगवा वस्त्र पहनकर और साधु का रूप धरकर राम मंदिर में कथित चोरी के मुद्दे पर अनोखा विरोध दर्ज कराया था। इस दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी और सपा के कई अन्य सांसद भी उनके साथ मौजूद थे। आरोप है कि इस वेशभूषा के जरिए यह दर्शाने का प्रयास किया गया कि मंदिर में गड़बड़ी किसी संत द्वारा की गई है, जिसके बाद से देश भर के संत समाज, अखाड़ों और विभिन्न हिंदू संगठनों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
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