Lucknow News: लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) प्रशासन ने परिसर के भीतर बनी अवैध मज़ारों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। सोमवार को प्रशासन की ओर से पांच मज़ार कमेटियों को दूसरा नोटिस जारी किया गया। इन मज़ारों को विश्वविद्यालय परिसर में नियमों के खिलाफ बनाए जाने का आरोप है। पहले नोटिस के बावजूद जवाब न मिलने पर अब प्रशासन ने अंतिम चेतावनी दी है।
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पहले नोटिस के बाद भी नहीं मिला संतोषजनक जवाब
KGMU प्रशासन ने इससे पहले 22 जनवरी को कुल छह मज़ारों को नोटिस जारी किया था। इनमें से केवल न्यू ऑर्थोपेडिक परिसर स्थित मज़ार कमेटी ने ही अपना पक्ष रखते हुए जवाब दाखिल किया। शेष पांच मज़ार कमेटियों की ओर से कोई प्रतिक्रिया न मिलने पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने अब दोबारा नोटिस जारी कर कार्रवाई की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया है।
28 फरवरी तक दिया गया अंतिम अवसर
प्रशासन ने साफ कर दिया है कि संबंधित पांचों मज़ार कमेटियों को 28 फरवरी को कुलसचिव के समक्ष उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने का अंतिम मौका दिया जाएगा। यदि तय तिथि तक संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो प्रशासन आगे की कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होगा। विश्वविद्यालय प्रबंधन का कहना है कि नियमों का उल्लंघन किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
पूर्व कर्मचारियों की कब्रों से जुड़ा है मामला

KGMU के प्रवक्ता डॉ. के.के. सिंह के अनुसार, ये सभी मज़ार विश्वविद्यालय के पूर्व कर्मचारियों से जुड़ी हैं। बताया गया है कि संबंधित कर्मचारियों के निधन के बाद परिजनों ने परिसर की खाली ज़मीन पर उन्हें दफन किया था। बाद में इन स्थानों पर बिना किसी आधिकारिक अनुमति के मज़ार का निर्माण कर दिया गया, जो विश्वविद्यालय के नियमों के खिलाफ है।
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विश्वविद्यालय भूमि पर अवैध निर्माण का आरोप
प्रशासन का कहना है कि KGMU की जमीन का उपयोग केवल शैक्षणिक, चिकित्सा और प्रशासनिक उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है। किसी भी प्रकार का धार्मिक या निजी निर्माण बिना अनुमति के अवैध माना जाता है। इसी आधार पर इन मज़ारों को हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
इन स्थानों पर चिन्हित की गई हैं मज़ारें
KGMU प्रशासन ने जिन स्थानों पर अवैध मज़ारों की पहचान की है, उनमें कई प्रमुख परिसर शामिल हैं। इनमें क्वीन मैरी हॉस्पिटल परिसर, माइक्रोबायोलॉजी विभाग, न्यू बॉयज हॉस्टल, रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग और शताब्दी फेज-2 अस्पताल परिसर शामिल हैं। प्रशासन का कहना है कि इन स्थानों पर मज़ार होने से विकास कार्य और अस्पताल संचालन प्रभावित हो रहा है।
प्रशासन का दावा, नियमों के तहत हो रही कार्रवाई
विश्वविद्यालय प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई किसी विशेष समुदाय या भावना के खिलाफ नहीं है। यह पूरी प्रक्रिया कानूनी नियमों और संस्थागत मर्यादाओं के तहत की जा रही है। सभी संबंधित पक्षों को पूरा अवसर दिया जा रहा है ताकि वे अपना पक्ष रख सकें।
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आगे की कार्रवाई पर टिकी नजरें
अब सबकी निगाहें 28 फरवरी की सुनवाई पर टिकी हैं। अगर मज़ार कमेटियां संतोषजनक जवाब देने में विफल रहती हैं, तो KGMU प्रशासन अवैध निर्माण हटाने की दिशा में ठोस कदम उठा सकता है। यह मामला विश्वविद्यालय परिसरों में अवैध निर्माण और भूमि उपयोग को लेकर एक अहम उदाहरण माना जा रहा है।










