Lucknow News: लखनऊ के एक प्रतिष्ठित सिनेमाघर से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। फिल्म देखने पहुंचे एक परिवार और थिएटर प्रबंधन के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि बात मारपीट तक पहुंच गई। यह पूरा विवाद 19 मार्च को रिलीज हुई आदित्य धर की नई फिल्म की स्क्रीनिंग के दौरान हुआ, जिसे सेंसर बोर्ड ने केवल वयस्कों (Adults Only) के लिए प्रमाणित किया है।
सेंसर बोर्ड के नियमों का उल्लंघन
बताते चले कि, घटना की शुरुआत तब हुई जब एक परिवार अपने छोटे बच्चे के साथ ‘ए’ (A) सर्टिफिकेट वाली फिल्म देखने पहुंचा। केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के अनुसार, 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को ऐसी फिल्मों के प्रदर्शन के दौरान हॉल में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा सकती। जब थिएटर के गेट पर तैनात सुरक्षाकर्मियों और कर्मचारियों ने नियमों का हवाला देते हुए बच्चे को अंदर ले जाने से मना किया, तो परिवार के सदस्य भड़क गए। स्टाफ ने कानूनी बाध्यताओं को समझाने की कोशिश की, लेकिन बहस बढ़ती चली गई।
वायरल वीडियो में दिखा हिंसक टकराव
सोशल मीडिया पर इस घटना का एक 24 सेकंड का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने लोगों को हैरत में डाल दिया है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि किस तरह मामूली बहस ने एक हिंसक रूप ले लिया। वहां मौजूद तीन लोग एक-दूसरे पर लात और घूंसे बरसाते नजर आ रहे हैं। इस हंगामे के दौरान थिएटर के अन्य दर्शक मूकदर्शक बने रहे, जबकि कुछ लोग इस पूरे घटनाक्रम को अपने मोबाइल कैमरों में कैद करते दिखे। बीच-बचाव की कोशिशों के बावजूद, वहां काफी देर तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।
सार्वजनिक स्थलों पर बढ़ता गुस्सा
इस वीडियो के इंटरनेट पर आने के बाद नेटिजन्स (Netizens) ने परिवार के आचरण पर कड़े सवाल उठाए हैं। अधिकांश उपयोगकर्ताओं का मानना है कि नियमों का पालन करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। कई लोगों ने टिप्पणी की कि जब फिल्म का कंटेंट बच्चों के लिए उपयुक्त नहीं है, तो माता-पिता का जिद करना और हिंसा पर उतर आना ‘गलत परवरिश’ और समाज में घटते धैर्य का प्रतीक है। आलोचकों का कहना है कि मनोरंजन के स्थान पर इस तरह की गुंडागर्दी न केवल माहौल खराब करती है, बल्कि बच्चों के मानस पर भी बुरा प्रभाव डालती है।
कानून का पालन और संयम की आवश्यकता
यह मामला एक बार फिर यह याद दिलाता है कि सिनेमाघरों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर बनाए गए नियमों का अपना महत्व होता है। ‘एडल्ट’ कैटेगरी की फिल्मों के लिए आयु सीमा का निर्धारण बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर किया जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में थिएटर प्रबंधन केवल अपनी ड्यूटी कर रहा होता है। नागरिकों को चाहिए कि वे कानून का सम्मान करें और विवाद की स्थिति में हिंसक होने के बजाय शालीनता से अपनी बात रखें। लखनऊ पुलिस को भी इस वायरल वीडियो के आधार पर संज्ञान लेने और उचित कार्रवाई करने की सलाह दी जा रही है।









