LPG Crisis: तेल-गैस संकट पर PM मोदी की उच्च स्तरीय बैठक में बड़ा फैसला, ‘जनता पर ना पड़े कोई असर’

पीएम मोदी ने तेल और गैस संकट को लेकर उच्च स्तरीय बैठक की। बैठक में LPG और तेल आपूर्ति को सामान्य रखने के लिए विशेष दिशा-निर्देश दिए गए। सरकार ने जनता पर असर नहीं पड़ने देने का भरोसा दिया, और कमर्शियल व घरेलू सप्लाई को संतुलित रखने के उपाय तय किए।

तेल-गैस संकट पर PM मोदी की उच्च स्तरीय बैठक में बड़ा फैसला

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

मार्च 10, 2026

LPG Crisis: भारत में घरेलू गैस की आपूर्ति बाधित न हो, इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक आपातकालीन उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर मुख्य रूप से शामिल हुए। प्रधानमंत्री ने सख्त निर्देश दिए हैं कि अंतरराष्ट्रीय तनाव का असर आम आदमी की रसोई पर नहीं पड़ना चाहिए और सभी मंत्रालय मिलकर इस संकट का समाधान निकालें।

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ईरान-इजरायल युद्ध और ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’

वर्तमान गैस किल्लत का सबसे प्रमुख कारण ईरान द्वारा विश्व के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग, ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) से होने वाली सप्लाई को पूरी तरह बाधित करना है। यह समुद्री रास्ता वैश्विक ऊर्जा व्यापार की जीवनरेखा माना जाता है। आंकड़ों के अनुसार, भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का 85% और एलपीजी का लगभग 62% आयात इसी रास्ते से करता है। इस रणनीतिक मार्ग के बंद होने से न केवल भारत, बल्कि कई अन्य एशियाई देशों में ईंधन का हाहाकार मच गया है, जिससे घरेलू स्तर पर स्टॉक को बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन गया है।

एस्मा (ESMA) और प्राथमिकता का निर्धारण

संकट को देखते हुए केंद्र सरकार ने तत्काल प्रभाव से आवश्यक सेवा अनुरक्षण कानून (एस्मा) लागू कर दिया है। सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि गैस वितरण प्रणाली में किसी भी प्रकार की बाधा या हड़ताल न हो। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि घरेलू गैस उपभोक्ताओं की मांग को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। भारत में सालाना 31.3 मिलियन टन एलपीजी की खपत होती है, जिसमें से लगभग 87% हिस्सा विशुद्ध रूप से घरेलू उपयोग के लिए होता है। एस्मा लागू होने से गैस एजेंसियों और डिलीवरी चेन को चौबीसों घंटे सक्रिय रहने के आदेश दिए गए हैं।

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औद्योगिक कटौती और होटल-रेस्टोरेंट इंडस्ट्री की नाराजगी

घरेलू रसोई को निर्बाध गैस उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने एक कड़ा फैसला लेते हुए औद्योगिक इकाइयों और कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई में भारी कटौती कर दी है। इस निर्णय से होटल और रेस्टोरेंट संचालकों के बीच गहरा असंतोष और गुस्सा है। व्यापारियों का कहना है कि कमर्शियल गैस की किल्लत से उनका पूरा कारोबार ठप होने की कगार पर है, जिससे न केवल आर्थिक नुकसान होगा बल्कि इस क्षेत्र से जुड़े लाखों लोगों के रोजगार पर भी तलवार लटक जाएगी। हालांकि, आम जनता ने सरकार के इस कदम की सराहना की है क्योंकि इससे उनकी रसोई की सुरक्षा सुनिश्चित हुई है।

विकल्पों की खोज और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम

वर्तमान स्थिति ने भारत को अपनी ऊर्जा निर्भरता के प्रति सचेत कर दिया है। पेट्रोलियम मंत्रालय अब सऊदी अरब और ईरान जैसे पारंपरिक स्रोतों के बजाय अन्य देशों से वैकल्पिक गैस सप्लाई चेन तैयार करने पर तेजी से काम कर रहा है। आने वाले समय में सौर ऊर्जा (Solar Cooking), इलेक्ट्रिक कुकिंग और बायोगैस जैसे स्वदेशी विकल्पों को राष्ट्रीय स्तर पर अपनाने की गति तेज करनी होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए विदेशी आयात और अंतरराष्ट्रीय विवादों वाले क्षेत्रों पर निर्भर रहेगा, तब तक हमारी अर्थव्यवस्था और रसोई पर ऐसे प्रहार होते रहेंगे।

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