Krishna Janmashtami 2026: कब मनाई जाएगी जन्माष्टमी? जानें सही तारीख और मुहूर्त

इस साल जन्माष्टमी की तारीख को लेकर 4 और 5 सितंबर के बीच असमंजस बना हुआ है। पंचांग के अनुसार जानें श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की सही तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त और व्रत पारण का समय।

Krishna Janmashtami 2026

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

अगस्त 29, 2026

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Krishna Janmashtami 2026: हिन्दू सनातन धर्म में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पावन पर्व भगवान श्री विष्णु के आठवें अवतार भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में अत्यंत हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं और पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने द्वापर युग में भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र के संयोग में मध्यरात्रि के समय धरती पर अवतार लिया था।

यही कारण है कि जन्माष्टमी के पर्व पर अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र के मिलन को अत्यधिक महत्व दिया जाता है। हालांकि, हर वर्ष पंचांग की गणना के अनुसार इन दोनों का सटीक संयोग एक ही दिन बने, यह अनिवार्य नहीं होता। इस वर्ष भी तारीख को लेकर लोगों के मन में असमंजस की स्थिति बनी हुई है कि व्रत किस दिन रखा जाए। आइए वैदिक पंचांग के आधार पर जानते हैं सही तिथि, निशीथ काल पूजा का समय और व्रत पारण की सटीक जानकारी।

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कब है श्रीकृष्ण जन्माष्टमी?

वैदिक पंचांग की गणना के अनुसार, इस वर्ष भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की शुरुआत 4 सितंबर को रात्रि 2 बजकर 25 मिनट पर होगी और इसका समापन 5 सितंबर को रात्रि 12 बजकर 13 मिनट पर होगा। उदयातिथि के दृष्टिकोण से देखा जाए तो 4 सितंबर को पूरे दिन अष्टमी तिथि का प्रभाव रहेगा। इसके साथ ही, इस दिन रोहिणी नक्षत्र भी रात्रि 11 बजकर 04 मिनट तक विद्यमान रहेगा।

चूंकि हमारे शास्त्रों में भगवान श्रीकृष्ण का प्राकट्य उत्सव मध्यरात्रि (निशीथ काल) में मनाने का विधान है, इसलिए यह अनिवार्य है कि पूजा के समय अष्टमी तिथि उपस्थित हो। इस खगोलीय और पंचांगीय गणना के आधार पर वर्ष 2026 में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का यह महान पर्व शुक्रवार, 4 सितंबर को मनाना पूर्णतः शास्त्रसम्मत और उचित रहेगा।

जन्माष्टमी पर बन रहे विशेष योग और नक्षत्र

पंचांग के अनुसार 4 सितंबर को भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के पावन अवसर पर ग्रहों और नक्षत्रों का एक विशेष संयोग देखने को मिलेगा। इस दिन सूर्योदय से लेकर रात्रि 11 बजकर 04 मिनट तक रोहिणी नक्षत्र रहेगा, जिसके उपरांत मृगशिरा नक्षत्र का आरंभ हो जाएगा।

यदि योग की बात करें तो, इस दिन हर्षण योग सुबह से लेकर दोपहर 3 बजकर 44 मिनट तक प्रभावी रहेगा। इसके बाद वज्र योग की शुरुआत होगी, जो अगले दिन यानी 5 सितंबर को दोपहर 12 बजकर 47 मिनट तक निरंतर बना रहेगा। इस प्रकार, जन्माष्टमी की मध्यरात्रि को होने वाली बाल गोपाल की जन्मोत्सव पूजा के समय मृगशिरा नक्षत्र और वज्र योग का दुर्लभ संयोग देखने को मिलेगा।

पूजा का शुभ मुहूर्त

इस वर्ष जन्माष्टमी पर लड्डू गोपाल की जन्म पूजा के लिए मध्यरात्रि का समय सबसे मुख्य और फलदायी रहेगा। पूजा का आधिकारिक और अत्यंत शुभ मुहूर्त रात्रि 11:57 बजे से लेकर 12:43 बजे तक रहेगा। कुल 46 मिनट की इस पावन अवधि में श्रद्धालु अपने घरों और मंदिरों में बाल गोपाल का जन्मोत्सव धूमधाम से मना सकेंगे और षोडशोपचार विधि से पूजा-अर्चना कर सकते हैं।

इसके अतिरिक्त, साधकों के लिए ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:30 बजे से 5:15 बजे तक रहेगा, जिसमें स्नान आदि से निवृत्त होकर व्रत का संकल्प लिया जा सकता है। दिन में अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:55 बजे से दोपहर 12:45 बजे तक तथा अमृत काल रात्रि 8:03 बजे से 9:33 बजे तक रहेगा।

व्रत पारण का सही समय और नियम

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का व्रत रखने वाले श्रद्धालु सामान्यतः भगवान के जन्मोत्सव (रात्रि 12:43 बजे के बाद) चरणामृत और पंजीरी का प्रसाद ग्रहण करके अपना व्रत खोल सकते हैं। हालांकि, जिन परिवारों और संप्रदायों में सूर्योदय के पश्चात ही पारण करने की पारंपरिक परंपरा है, वे लोग 5 सितंबर को सूर्योदय के बाद नियमानुसार अपना व्रत पूर्ण करेंगे।

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