Kolkata DCP : फरार होने की फिराक में डीसीपी शांतनु सिन्हा? ईडी ने जारी किया लुकआउट नोटिस

कोलकाता के डीसीपी शांतनु सिन्हा बिस्वास के खिलाफ ईडी ने लुकआउट नोटिस जारी कर दिया है। 'सोना पप्पू' और जॉय कामदार से जुड़े 40 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में फंसे डीसीपी के विदेश भागने की आशंका जताई जा रही है। क्या खाकी की आड़ में चल रहा था सिंडिकेट का खेल?

Kolkata DCP

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मई 5, 2026

Kolkata DCP : पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता से एक बड़ी प्रशासनिक और कानूनी खबर सामने आ रही है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कोलकाता पुलिस के उपायुक्त (DCP) शांतनु सिन्हा बिस्वास के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी कर दिया है। यह कार्रवाई एक महत्वपूर्ण वित्तीय जांच के सिलसिले में की गई है। केंद्रीय जांच एजेंसी को पुख्ता अंदेशा है कि डीसीपी शांतनु सिन्हा कानूनी कार्यवाही से बचने के लिए देश छोड़कर विदेश भाग सकते हैं। इसी संभावित खतरे को देखते हुए, ईडी ने देश के सभी प्रमुख हवाई अड्डों, बंदरगाहों और सीमा चौकियों को अलर्ट पर रख दिया है ताकि उनकी किसी भी संदिग्ध आवाजाही को रोका जा सके।

पांच बार समन जारी होने के बावजूद जांच से बचते रहे डीसीपी

ईडी के आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, शांतनु सिन्हा को इस मामले में पूछताछ के लिए एक या दो बार नहीं, बल्कि पूरे पांच बार नोटिस भेजकर तलब किया गया था। जांचकर्ताओं का आरोप है कि इतने महत्वपूर्ण पद पर तैनात होने के बावजूद, उन्होंने कानून का सम्मान नहीं किया और एक बार भी केंद्रीय एजेंसी के समक्ष पेश नहीं हुए। बार-बार समन की अनदेखी करने के बाद ईडी ने सख्त रुख अपनाने का फैसला किया। जांच एजेंसी का मानना है कि उनकी अनुपस्थिति जांच में बाधा डाल रही है और वे जानबूझकर महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाने की कोशिश कर रहे हैं, जिसके कारण अब उनके खिलाफ लुकआउट नोटिस अनिवार्य हो गया था।

विदेश भागने की प्रबल आशंका: हवाई अड्डों पर हाई अलर्ट

जांच एजेंसी के भीतर यह चर्चा तेज है कि डीसीपी शांतनु सिन्हा शायद पहले ही देश की सीमा पार कर चुके हैं या भागने की योजना को अंतिम रूप दे रहे हैं। ईडी के जांचकर्ताओं का मानना है कि जिस तरह से उन्होंने लगातार पांच समन को नजरअंदाज किया, वह उनके विदेश भागने की मंशा को दर्शाता है। लुकआउट नोटिस जारी होने का मतलब है कि अब वे कानूनी रूप से किसी भी अधिकृत रास्ते से देश से बाहर नहीं जा पाएंगे। हवाई अड्डा प्राधिकरण और आव्रजन विभाग को उनकी तस्वीरें और विवरण साझा किए गए हैं, ताकि यदि वे कहीं भी दिखाई दें, तो उन्हें तुरंत हिरासत में लिया जा सके।

जांच के घेरे में पुलिस अधिकारी: भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं का मामला

शांतनु सिन्हा बिस्वास के खिलाफ यह कार्रवाई किसी सामान्य मामले में नहीं हुई है। सूत्रों का कहना है कि ईडी कुछ बड़े वित्तीय लेन-देन और भ्रष्टाचार के मामलों की जांच कर रही है, जिसके तार कोलकाता पुलिस के इस वरिष्ठ अधिकारी से जुड़े होने की संभावना है। एक आईपीएस रैंक या वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के खिलाफ इस तरह का सख्त कदम उठाना यह संकेत देता है कि केंद्रीय एजेंसी के पास उनके खिलाफ कुछ ठोस सबूत या महत्वपूर्ण सुराग हाथ लगे हैं। इस मामले ने न केवल कोलकाता पुलिस विभाग के भीतर हड़कंप मचा दिया है, बल्कि राज्य की राजनीति में भी सुगबुगाहट तेज कर दी है।

आगे की कानूनी राह और प्रशासनिक चुनौतियां

लुकआउट नोटिस जारी होने के बाद अब शांतनु सिन्हा के पास कानूनी विकल्प सीमित होते जा रहे हैं। यदि वे जल्द ही जांच एजेंसी के सामने आत्मसमर्पण नहीं करते हैं, तो ईडी उनकी संपत्ति कुर्क करने या उनकी गिरफ्तारी के लिए गैर-जमानती वारंट हासिल करने की दिशा में कदम बढ़ा सकती है। राज्य सरकार और गृह विभाग के लिए भी यह एक असहज स्थिति है कि उनका एक सेवारत डीसीपी केंद्रीय जांच एजेंसी की रडार पर है और लापता बताया जा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या शांतनु सिन्हा जांच में सहयोग करते हैं या यह मामला एक लंबी कानूनी और राजनीतिक लड़ाई का रूप ले लेता है।

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