Kiren Rijiju Statement: अमेरिका के न्यूयॉर्क में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के एक कार्यक्रम के दौरान प्रदर्शन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कार्यक्रम स्थल के पास प्रदर्शनकारियों द्वारा भारतीय राष्ट्रीय ध्वज के कथित अपमान पर कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर प्रदर्शन से जुड़ा कथित वीडियो साझा करते हुए प्रदर्शनकारियों को कड़ा संदेश दिया।
रिजिजू ने कहा कि भारत में किसी भी व्यक्ति या संगठन की आलोचना करने की आजादी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि RSS, बीजेपी या सरकार के खिलाफ विरोध और आलोचना लोकतांत्रिक अधिकार हैं, लेकिन देश और राष्ट्रीय ध्वज के अपमान को स्वीकार नहीं किया जा सकता।
जमीन के नीचे से सीधे महाकाल लोक! 700 मीटर की टनल और अंडरपास
‘देश का अपमान बर्दाश्त नहीं’
केंद्रीय मंत्री ने अपने पोस्ट में प्रदर्शनकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि भारतीय झंडे और देश का अपमान नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने इस तरह की कथित गतिविधियों पर सख्त प्रतिक्रिया व्यक्त की और कहा कि राष्ट्रीय सम्मान के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता। रिजिजू द्वारा साझा किए गए वीडियो में न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन के बाहर एक प्रदर्शनकारी को कथित तौर पर भारतीय ध्वज का अपमान करते हुए देखा जा सकता है। वीडियो में कुछ प्रदर्शनकारियों द्वारा खालिस्तान समर्थक नारे लगाए जाने का दावा भी किया गया है।
मोहन भागवत के कार्यक्रम के बाहर प्रदर्शन
यह पूरा विवाद उस समय सामने आया जब RSS प्रमुख मोहन भागवत न्यूयॉर्क के प्रसिद्ध मैडिसन स्क्वायर गार्डन स्थित इंफोसिस थिएटर में भारतीय-अमेरिकी समुदाय के एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। शनिवार को आयोजित इस कार्यक्रम में 6,000 से अधिक भारतीय-अमेरिकी समुदाय के लोगों के साथ अलग-अलग धर्मों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की जानकारी सामने आई। भागवत ने अपने संबोधन में भारत की विविधता और एकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अलग-अलग विचार, भाषाएं, परंपराएं और संस्कृतियां भारत की पहचान का हिस्सा हैं और विविधता में एकता देश के स्वभाव में शामिल है।
RSS को लेकर बनी धारणाओं पर भी बोले भागवत
अपने संबोधन के दौरान मोहन भागवत ने RSS को लेकर लोगों के बीच बनी कुछ धारणाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि संगठन ने लंबे समय तक अपने कामों का व्यापक प्रचार नहीं किया, जिसके कारण लोगों के बीच उसके बारे में अलग-अलग राय बनी। भागवत ने लोगों से अपील की कि किसी संगठन के बारे में अंतिम राय बनाने से पहले उसके काम को करीब से समझना चाहिए और उसके बारे में स्वयं जानकारी हासिल करनी चाहिए।
प्रदर्शन में लगाए गए नारे
कार्यक्रम के बाहर हुए प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर भारतीय तिरंगे को फाड़ने और उसके अपमान का वीडियो सामने आने के बाद विवाद बढ़ गया। प्रदर्शनकारियों पर खालिस्तान समर्थक और भारत विरोधी नारे लगाने के आरोप भी लगाए गए हैं।
इस मामले में केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू की प्रतिक्रिया सामने आने के बाद राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान और विदेशों में होने वाले विरोध प्रदर्शनों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। हालांकि, वायरल वीडियो से जुड़े दावों और प्रदर्शन की पूरी परिस्थितियों की स्वतंत्र पुष्टि अलग-अलग स्तर पर की जानी बाकी है।
गांवों में श्वेत क्रांति की नई कहानी, 3.88 लाख महिलाओं ने संभाला 5,716 करोड़ का










