7 दिन, 8 टाइम जोन और हजारों किलोमीटर का सफर! जानें दुनिया की सबसे लंबी ट्रेन यात्रा

मॉस्को  ट्रेन के जरिए एक जगह से दूसरी जगह जाने में आसानी होती है और लंबी दूरी भी कम समय में तय कर लेते हैं. भारत में कई तरह की ट्रेन में बैठे होंगे. आपने लंबी से लंबी ट्रेन जर्नी की होगी, लेकिन क्या आप जानते हैं दुनिया की सबसे लंबी ट्रेन यात्रा कौन-सी है. इस सफर में लोगों को 3-4 नहीं बल्कि पूरे 7 दिन लगते हैं।  जी हां, यह जर्नी पूरे दिन 7 दिनों की होती है और 8 टाइम जोन को पार करती है.   इस दौरान ट्रेन हजारों किलोमीटर की दूरी तय करती है, हालांकि इस सफर

Wrriten By :

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Published On :

अगस्त 31, 2026

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मॉस्को 
ट्रेन के जरिए एक जगह से दूसरी जगह जाने में आसानी होती है और लंबी दूरी भी कम समय में तय कर लेते हैं. भारत में कई तरह की ट्रेन में बैठे होंगे. आपने लंबी से लंबी ट्रेन जर्नी की होगी, लेकिन क्या आप जानते हैं दुनिया की सबसे लंबी ट्रेन यात्रा कौन-सी है. इस सफर में लोगों को 3-4 नहीं बल्कि पूरे 7 दिन लगते हैं। 

जी हां, यह जर्नी पूरे दिन 7 दिनों की होती है और 8 टाइम जोन को पार करती है.   इस दौरान ट्रेन हजारों किलोमीटर की दूरी तय करती है, हालांकि इस सफर में कई शानदार नजारे देखने को मिलते हैं. आइए आपको बताते हैं कि यह ट्रेन यात्रा के बारे में बताते हैं। 

9,289 किलोमीटर का लंबा सफर

यह शानदार सफर रूस की मशहूर ट्रांस-साइबेरियन रेलवे पर होता है. ट्रांस-साइबेरियन रेलवे को दुनिया की सबसे लंबी लगातार चलने वाली रेलवे लाइनों में गिना जाता है. इसका क्लासिक रूट रूस की राजधानी मॉस्को से व्लादिवोस्तोक तक जाता है. दोनों शहरों के बीच की दूरी करीब 9,289 किलोमीटर है, पूरी यात्रा ट्रेन से करने में लगभग 7 दिन लग सकते हैं। 

हालांकि, ट्रेन के शेड्यूल और सेवा के अनुसार यात्रा का समय थोड़ा कम या ज्यादा हो सकता है. इस दौरान यात्री रूस के अलग-अलग हिस्सों को ट्रेन की खिड़की से देख सकते हैं और इसलिए 7 दिनों की जर्नी कुछ लोगों के लिए यादगार बन जाती है। 

8 टाइम जोन होते हैं पार
इस ट्रेन यात्रा की सबसे खास बात यह है कि रास्ते में 8 टाइम जोन बदलते हैं. यानी मॉस्को से सफर शुरू करने वाले यात्रियों और व्लादिवोस्तोक पहुंचने वाले यात्रियों के स्थानीय समय में काफी फर्क होता है. इतने लंबे सफर में बदलता समय इस यात्रा को और दिलचस्प बना देता है। 

1891 में शुरू हुआ था निर्माण
ट्रांस-साइबेरियन रेलवे का इतिहास भी काफी पुराना है. इसका निर्माण 1891 में रूसी साम्राज्य के दौर में शुरू हुआ था, जबकि मुख्य रेलवे लाइन का निर्माण 1916 में पूरा हुआ. ट्रांस-साइबेरियन रेलवे को रूस के पश्चिमी हिस्से को देश के दूर-दराज पूर्वी क्षेत्रों से जोड़ने के मकसद से बनाया गया था। 

रास्ते में दिखते हैं खूबसूरत नजारे
रूस बेहद सुंदर देश है और मॉस्को से व्लादिवोस्तोक के रास्ते में ट्रेन कई बड़े शहरों से गुजरती है. इनमें येकातेरिनबर्ग, ओम्स्क, नोवोसिबिर्स्क, क्रास्नोयार्स्क, इरकुत्स्क, उलान-उदे और खाबरोव्स्क शामिल हैं. इस सफर के दौरान यात्रियों को घने जंगल, नदियां, खुले मैदान और साइबेरिया के खूबसूरत प्राकृतिक नजारे देखने को मिलते हैं। 

रास्ते में दिखती है मीठे पानी की झील
बैकाल झील देखना इस सफर का सबसे बड़ा अट्रैक्शन है. रूस के दक्षिणी साइबेरिया में स्थित दुनिया की सबसे गहरी, सबसे पुरानी और सबसे बड़ी मीठे पानी की झील है. इरकुत्स्क से लेक बैकाल की यात्रा करना भी काफी पॉपुलर है। आज ट्रांस-साइबेरियन रेलवे दुनिया भर के लोगों के लिए एक बकेट-लिस्ट ट्रैवल एक्सपीरियंस बन चुकी है।