Kharge vs Rijiju: संसद के मौजूदा मानसून सत्र के दौरान केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच टकराव लगातार और अधिक तीखा होता जा रहा है। विपक्षी दलों ने सरकार के कामकाज, विभिन्न मुद्दों पर उसकी चुप्पी और नीतियों के खिलाफ अपना विरोध पूरी ताकत से सड़क से लेकर संसद तक तेज कर दिया है। इसी कड़ी में राज्यसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने एक बार फिर आक्रामक रुख अपनाते हुए देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को सीधे तौर पर चुनौती दी है कि वे सदन के भीतर आएं, अपना बयान दें और महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दों पर खुली चर्चा में शामिल हों।
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प्रधानमंत्री और गृह मंत्री सदन में आएं और चर्चा करें: खरगे
राज्यसभा में अपनी आक्रामक शैली में बोलते हुए मल्लिकार्जुन खरगे ने सरकार पर सदन की गरिमा को ठेس पहुंचाने और गंभीर मुद्दों पर चर्चा से भागने का सीधा आरोप लगाया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पूरा विपक्ष हर मुद्दे पर चर्चा करने के लिए पूरी तरह से तैयार है, लेकिन सरकार खुद इस प्रक्रिया से कतरा रही है।
संसद की गरिमा का सवाल: खरगे ने सवाल उठाते हुए कहा, “हमारी स्पष्ट मांग है कि प्रधानमंत्री और देश के गृह मंत्री सदन में आएं, अपना आधिकारिक बयान दें और इस पर विस्तृत चर्चा हो। यदि सदन के भीतर सार्थक चर्चा होगी, तभी किसी समस्या का समाधान निकलेगा।”
सदन से दूरी पर नाराजगी: उन्होंने सरकार को घेरते हुए आगे कहा कि यदि वे सदन में आकर अपनी बात नहीं रखेंगे और केवल बाहर ही बयान देते रहेंगे या चुप बैठेंगे, तो इससे देश की सबसे बड़ी पंचायत यानी संसद का अपमान हो रहा है। सत्र शुरू हुए इतने दिन बीत चुके हैं, लेकिन शीर्ष नेतृत्व का सदन में न आना गंभीर चिंता का विषय है। खरगे ने दो टूक कहा कि जब विपक्ष हर विषय पर बहस के लिए तैयार है, तो आखिर सरकार चर्चा से क्यों भाग रही है?
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू पर साधा निशाना
संसद के भीतर चर्चा के दौरान मल्लिकार्जुन खरगे ने अपनी तीखी बयानबाजी का दायरा बढ़ाते हुए केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू को भी अपने निशाने पर लिया। उनकी कार्यशैली और स्वतंत्रता पर सवाल उठाते हुए खरगे ने सीधा कटाक्ष किया।
स्वतंत्र फैसले की हिम्मत पर सवाल: खरगे ने किरेन रिजिजू को संबोधित करते हुए कहा, “आप जैसे लोग वही सुनेंगे और बोलेंगे जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या गृह मंत्री अमित शाह आपको कहेंगे। क्या आपमें इतनी भी हिम्मत है कि आप अपनी तरफ से कोई स्वतंत्र और निष्पक्ष फैसला ले सकें?” * उनके इस बयान के बाद सदन का सियासी पारा काफी हाई हो गया और सत्ता पक्ष तथा विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली।
संसद परिसर में जोरदार प्रदर्शन और अन्य ज्वलंत मुद्दे
संसद के भीतर खरगे के इन तीखे तेवरों के अलावा, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के सांसदों ने संसद भवन परिसर में भी केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया। विपक्षी सांसदों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ नारेबाजी की और विभिन्न घटनाओं को लेकर प्रशासनिक कार्रवाई की जवाबदेही तय करने की पुरजोर मांग उठाई।
इस दौरान विपक्ष ने केवल एक मामले तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े मुद्दों, ऐतिहासिक अनुच्छेद 370 के प्रभावों और कथित पुलिस व प्रशासनिक कार्रवाई जैसे कई संवेदनशील विषयों को उठाकर सरकार को चौतरफा घेरने की कोशिश की। विपक्ष के इस आक्रामक रुख ने साफ कर दिया है कि मानसून सत्र के बाकी बचे दिनों में भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जबरदस्त सियासी घमासान देखने को मिलेगा।










