Ketan Murder Case: केतन हत्याकांड में पीड़ित पिता ने राष्ट्रपति से लगाई गुहार, निष्पक्ष न्याय की मांग दोहराई

केतन हत्याकांड मामले में पीड़ित पिता ने राष्ट्रपति से निष्पक्ष न्याय की मांग करते हुए गुहार लगाई है। परिवार का कहना है कि मामले की जांच और कानूनी प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता होनी चाहिए। पीड़ित पक्ष ने न्याय की उम्मीद जताते हुए अपनी मांग दोहराई है, जबकि मामले से जुड़े तथ्यों की जांच जारी है।

Ketan Murder Case

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जुलाई 10, 2026

Ketan Murder Case:  देश को झकझोर देने वाले केतन अग्रवाल हत्याकांड ने अब एक बेहद संवेदनशील और गंभीर मोड़ ले लिया है। न्याय की अपनी लड़ाई को एक निर्णायक स्तर पर ले जाते हुए, पीड़ित पिता विशाल अग्रवाल ने भारत की महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक मार्मिक ई-मेल भेजा है। एक बेबस पिता के रूप में उन्होंने राष्ट्रपति से व्यक्तिगत हस्तक्षेप की प्रार्थना की है। इस पत्र का उद्देश्य किसी प्रभाव का उपयोग करना नहीं, बल्कि उस पीड़ा को व्यक्त करना है जो एक परिवार को तब झेलनी पड़ती है जब वह कानून के गलियारों में इंसाफ के लिए भटकता है। विशाल अग्रवाल की मुख्य मांग है कि उनके बेटे की निर्मम हत्या के मामले को फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाया जाए ताकि दोषियों को बिना देरी के कठोर दंड मिल सके।

’20 दिनों में दो अर्थियां’: एक परिवार की खौफनाक त्रासदी

विशाल अग्रवाल ने अपने पत्र में उस असहनीय पीड़ा का वर्णन किया है जिसने उनके परिवार को बिखरने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने अपनी व्यथा साझा करते हुए लिखा कि केतन की हत्या के बाद से उनका पूरा परिवार मानसिक और शारीरिक रूप से टूट चुका है। पत्र का सबसे हृदयविदारक हिस्सा वह है जहाँ उन्होंने अपने पिता (केतन के दादा) के निधन का उल्लेख किया। उन्होंने लिखा, “मेरे पिता अपने पोते केतन से अगाध प्रेम करते थे। केतन की बेरहमी से हत्या का सदमा वे बर्दाश्त नहीं कर सके। महज 20 दिनों के भीतर मैंने अपने जवान बेटे और अपने बुजुर्ग पिता, दोनों को खो दिया।” इस घटना ने न केवल एक परिवार को उजाड़ दिया, बल्कि समाज के भीतर भी गहरा आक्रोश पैदा कर दिया है।

वीआईपी व्यवहार नहीं, केवल कानून की त्वरित प्रक्रिया की दरकार

राष्ट्रपति के समक्ष अपनी बात रखते हुए विशाल अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि उन्हें कानून से ऊपर कुछ भी नहीं चाहिए। उनका परिवार किसी भी विशेष रियायत या वीआईपी ट्रीटमेंट की मांग नहीं कर रहा है। उनकी मांगें अत्यंत तार्किक और बुनियादी हैं: पहली, मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में हो ताकि लंबी अदालती प्रक्रिया में परिवार को और अधिक मानसिक प्रताड़ना न झेलनी पड़े। दूसरी, अपराधी कानून के दांवपेंचों का लाभ उठाकर बच न सकें। तीसरी, दोषियों को ऐसी कड़ी सजा मिले जो समाज के लिए एक नजीर बने और अपराधियों के मन में कानून का भय पैदा हो।

‘सरकारी फाइल’ बनकर न रह जाए बेटे की इंसाफ की पुकार

पत्र के अंतिम भाग में विशाल अग्रवाल की हताशा साफ झलकती है। उन्होंने राष्ट्रपति से विनम्र निवेदन किया है कि केतन की हत्या के मामले को केवल एक ‘सरकारी फाइल’ मानकर धूल फांकने के लिए न छोड़ दिया जाए। उन्होंने लिखा, “महामहिम, इस केस की फाइल के पीछे एक बदनसीब परिवार खड़ा है जिसका वजूद लगभग खत्म हो चुका है। दोषियों को सजा मिलने से शायद हमारे दुखी मन को थोड़ी शांति मिल सके।” यह पत्र न केवल एक पिता का दर्द है, बल्कि देश की न्याय प्रणाली से एक आम नागरिक की अपेक्षाओं का प्रतिनिधित्व भी करता है।

न्याय की राह पर बढ़ता जन-दबाव

विशाल अग्रवाल के इस भावुक पत्र ने देश के गृह मंत्रालय और न्यायपालिका पर नैतिक दबाव बढ़ा दिया है। सोशल मीडिया से लेकर आम जनता के बीच इस मामले को लेकर जिस तरह से आवाज उठाई जा रही है, उससे स्पष्ट है कि समाज अब दोषियों के लिए त्वरित न्याय चाहता है। अब सबकी निगाहें राष्ट्रपति भवन पर टिकी हैं कि इस पत्र पर क्या संज्ञान लिया जाता है। केतन अग्रवाल के परिवार का संघर्ष देश के हर उस व्यक्ति की आवाज बन गया है जो न्याय में हो रही देरी से निराश है। उम्मीद है कि यह अपील न्याय प्रक्रिया में तेजी लाएगी और पीड़ित परिवार को समय रहते इंसाफ मिल सकेगा।

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