X Corp FIR Kerala: केरल पुलिस की बड़ी कार्रवाई, PM मोदी के खिलाफ भ्रामक AI वीडियो पर मुकदमा, X और यूजर फंसे

केरल पुलिस की साइबर शाखा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चुनाव आयोग के खिलाफ एक भ्रामक एआई-जनित वीडियो प्रसारित करने के आरोप में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' और एक यूजर 'लक्ष्मी एन राजू' के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। 77 सेकंड का यह वीडियो क्या वाकई चुनाव प्रक्रिया को बाधित करने की बड़ी साजिश थी?

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मार्च 26, 2026

X Corp FIR Kerala: केरल पुलिस की साइबर विंग ने डिजिटल दुनिया में गलत सूचनाओं के प्रसार को रोकने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। पुलिस ने दुनिया के प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) और उसके एक विशिष्ट हैंडल के खिलाफ औपचारिक मामला दर्ज किया है। आरोप है कि इस प्लेटफॉर्म पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से तैयार किया गया एक बेहद आपत्तिजनक वीडियो साझा किया गया था। इस वीडियो में देश के प्रधानमंत्री और भारत निर्वाचन आयोग (ECI) को बेहद ‘भ्रामक और मानहानिपूर्ण’ तरीके से चित्रित किया गया है। पुलिस का कहना है कि अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर संवैधानिक संस्थाओं की छवि धूमिल करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

डीपफेक और एआई का चुनावी प्रक्रिया में बढ़ता खतरा

पुलिस द्वारा की गई प्रारंभिक जांच के अनुसार, यह कथित वीडियो पूरी तरह से एआई तकनीक द्वारा निर्मित है, जिसे तकनीकी भाषा में ‘डीपफेक’ भी कहा जाता है। केरल पुलिस को इस भ्रामक कंटेंट की जानकारी आधिकारिक खुफिया माध्यमों और स्वयं चुनाव आयोग की ओर से प्राप्त हुई थी। चुनाव आयोग ने इस वीडियो को लेकर गंभीर आपत्ति जताई थी, क्योंकि इसमें चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाने वाले दृश्य और संवाद शामिल थे। वर्तमान डिजिटल युग में इस तरह के वीडियो न केवल किसी व्यक्ति विशेष की गरिमा को ठेस पहुंचाते हैं, बल्कि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को भी अस्थिर करने की क्षमता रखते हैं।

जनता को गुमराह करने और संवैधानिक साख को गिराने की साजिश

पुलिस अधिकारियों का स्पष्ट मानना है कि इस वीडियो का मुख्य उद्देश्य आम जनता को गुमराह करना है। जांच के बाद साइबर विंग ने निष्कर्ष निकाला कि इस प्रकार का कंटेंट संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को आम जनमानस की नजरों में कमजोर कर सकता है। वीडियो को इस तरह से वायरल किया गया ताकि मतदाता भ्रमित हो सकें और सरकार व चुनाव आयोग के प्रति उनके मन में अविश्वास पैदा हो। पुलिस का कहना है कि डिजिटल माध्यमों का ऐसा दुरुपयोग सामाजिक शांति और राजनीतिक स्थिरता के लिए एक गंभीर चेतावनी है।

स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने का आरोप

केरल पुलिस की एफआईआर में इस बात का विशेष उल्लेख किया गया है कि इस तरह का आपत्तिजनक कंटेंट स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया के मार्ग में एक बड़ी बाधा है। चुनाव के समय किसी भी प्रकार का भ्रामक प्रचार मतदाताओं के निर्णय को गलत तरीके से प्रभावित कर सकता है। चुनाव आयोग के कड़े निर्देशों के बाद, पुलिस ने इसे ‘आईटी एक्ट’ और मानहानि से जुड़ी धाराओं के तहत गंभीरता से लेते हुए कानूनी कार्रवाई तेज कर दी है। अधिकारियों ने ‘X’ को नोटिस जारी कर संबंधित हैंडल की विस्तृत जानकारी मांगी है ताकि इस वीडियो के असली सूत्रधार तक पहुंचा जा सके।

डिजिटल निगरानी और भविष्य के लिए कड़े सुरक्षा मानक

इस मामले ने एक बार फिर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही पर बहस छेड़ दी है। केरल सरकार और पुलिस प्रशासन अब ऐसे एआई-जनित कंटेंट पर कड़ी निगरानी रख रहे हैं जो समाज में विद्वेष फैला सकते हैं। पुलिस ने जनता से भी अपील की है कि वे बिना जांचे-परखे किसी भी संदिग्ध वीडियो या खबर को आगे साझा न करें। साइबर सेल अब अत्याधुनिक टूल्स का उपयोग कर रही है ताकि डीपफेक वीडियो को तुरंत पहचाना और हटाया जा सके। यह कार्रवाई भविष्य के लिए एक उदाहरण है कि तकनीक का इस्तेमाल यदि लोकतंत्र को नुकसान पहुँचाने के लिए किया गया, तो कानून अपना काम सख्ती से करेगा।

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