Kerala Election 2026: शशि थरूर की राहुल गांधी से नाराजगी? केरल चुनाव से पहले कांग्रेस में कलह

केरल विधानसभा चुनाव 2026 की तैयारियों के बीच कांग्रेस में 'गृहयुद्ध' जैसे हालात हैं। कोच्चि के कार्यक्रम में प्रोटोकॉल टूटने और राहुल गांधी द्वारा नाम न लिए जाने से आहत शशि थरूर ने हाईकमान की दिल्ली बैठक से किनारा कर लिया है। क्या थरूर का यह कदम केरल में कांग्रेस की जीत का सपना तोड़ देगा?

Kerala Election 2026

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जनवरी 23, 2026

Kerala Election 2026:  केरल विधानसभा चुनाव की आहट के साथ ही कांग्रेस के भीतर अंतर्कलह की खबरें तेज हो गई हैं। आज दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी ने केरल के वरिष्ठ नेताओं के साथ दोपहर 2:30 बजे एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई थी। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य चुनाव की रणनीति तैयार करना था, लेकिन इसमें दिग्गज नेता शशि थरूर की गैरहाजिरी ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। सूत्रों के मुताबिक, थरूर ने इस बैठक से दूरी बना ली है और वे फिलहाल केरल में ही मौजूद हैं। पार्टी के इतने बड़े चेहरे का चुनावी चर्चा से गायब रहना कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

अपमान का आरोप: राहुल गांधी की ‘महापंचायत’ में भाषण रुकवाने से बढ़ा विवाद

मीडिया रिपोर्ट्स और सूत्रों के हवाले से यह दावा किया जा रहा है कि शशि थरूर हाल ही में कोच्चि में आयोजित राहुल गांधी की ‘महापंचायत’ के दौरान हुए एक घटनाक्रम से खासे नाराज हैं। बताया जा रहा है कि कार्यक्रम में जब थरूर मंच पर बोल रहे थे, तब उन्हें राहुल गांधी के आगमन का हवाला देकर अपना भाषण बीच में ही खत्म करने का निर्देश दिया गया। थरूर ने इसे ‘उचित सम्मान न मिलने’ और प्रोटोकॉल के उल्लंघन के रूप में लिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एक वैश्विक कद वाले नेता के साथ ऐसा व्यवहार उनकी नाराजगी का मुख्य कारण बना है, जिसके चलते उन्होंने दिल्ली की बैठक में न जाने का फैसला किया।

थरूर के कार्यालय की सफाई: ‘नाराजगी नहीं, साहित्य महोत्सव में व्यस्तता है वजह’

विवाद बढ़ता देख शशि थरूर के कार्यालय ने एक आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी किया है। कार्यालय के मुताबिक, थरूर की अनुपस्थिति के पीछे कोई राजनीतिक नाराजगी नहीं बल्कि पूर्व-निर्धारित कार्यक्रम हैं। बयान में कहा गया कि वे इस समय कालीकट में ‘केरल लिटरेचर फेस्टिवल’ (KLF) में व्यस्त हैं, जो एशिया का सबसे बड़ा साहित्य महोत्सव है। यहाँ वे श्री नारायण गुरु पर आधारित अपनी नवीनतम पुस्तक पर व्याख्यान दे रहे हैं। थरूर के कार्यालय ने यह भी स्पष्ट किया कि इस व्यस्तता के बारे में पार्टी नेतृत्व को पहले ही लिखित रूप में सूचित कर दिया गया था।

नेहरू बनाम मोदी सरकार: लोकतंत्र और इतिहास पर थरूर के तीखे बोल

बैठक से दूरी के बीच शशि थरूर अपने वैचारिक बयानों को लेकर भी चर्चा में हैं। हाल ही में उन्होंने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि वर्तमान सरकार ‘नेहरू-विरोधी’ है। उन्होंने कहा, “मैं यह नहीं कहूंगा कि मोदी सरकार लोकतंत्र के खिलाफ है, लेकिन वह नेहरू को बलि का बकरा बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ती।” नेहरू के प्रशंसक होने के नाते उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि नेहरू की हर नीति का आंख बंद कर समर्थन नहीं किया जा सकता और उनकी गलतियों को स्वीकार करना जरूरी है, लेकिन देश की हर समस्या के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराना पूरी तरह गलत और अनुचित है।

कांग्रेस की चुनौती: क्या थरूर की नाराजगी पड़ सकती है केरल चुनाव पर भारी?

शशि थरूर केवल एक सांसद नहीं बल्कि केरल के शहरी मध्यम वर्ग और युवाओं के बीच एक बेहद लोकप्रिय चेहरा हैं। ऐसे में चुनाव से ठीक पहले उनकी कथित नाराजगी पार्टी के लिए रणनीतिक संकट पैदा कर सकती है। यदि कांग्रेस आलाकमान समय रहते इस असंतोष को दूर नहीं करता, तो इसका असर चुनावी नतीजों पर पड़ सकता है। फिलहाल कांग्रेस नेतृत्व भीतरखाने इस विवाद को शांत करने और थरूर को मनाने की कोशिशों में जुटा है। यह देखना दिलचस्प होगा कि आगामी दिनों में क्या थरूर और राहुल गांधी के बीच की दूरियां कम हो पाती हैं या केरल कांग्रेस की यह दरार और गहरी होगी।

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