Dimagi Naxal : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘दिमागी नक्सल’ वाले बयान को लेकर शुरू हुआ राजनीतिक विवाद अब और तेज हो गया है। कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम के बाद आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी खुद को ‘दिमागी नक्सल’ बताया है। केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो साझा करते हुए कहा कि वह प्रधानमंत्री की परिभाषा के अनुसार ‘दिमागी नक्सल’ हैं और उन्हें इस बात पर गर्व है। उन्होंने इसके पीछे अपनी राजनीतिक और सामाजिक सोच को वजह बताया।
केजरीवाल ने वीडियो जारी कर दी प्रतिक्रिया
अरविंद केजरीवाल ने अपने वीडियो संदेश में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अनुसार जो व्यक्ति देश में सवाल उठाने की हिम्मत करता है, उसे ‘दिमागी नक्सल’ कहा जा सकता है। उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति मौजूदा व्यवस्था में सुधार चाहता है और लोगों के लिए बेहतर सुविधाओं की मांग करता है, तो वह भी प्रधानमंत्री की परिभाषा के तहत इस श्रेणी में आता है। केजरीवाल ने इसी आधार पर खुद को ‘दिमागी नक्सल’ बताया।
अच्छे स्कूल और अस्पताल की मांग को लेकर सवाल
केजरीवाल ने कहा कि जो लोग बेहतर सरकारी स्कूल और अस्पताल चाहते हैं, वे भी प्रधानमंत्री के बयान के अनुसार ‘दिमागी नक्सल’ माने जाएंगे। उन्होंने बिजली, पानी, सीवर, ड्रेनेज और बेहतर सार्वजनिक व्यवस्था जैसी बुनियादी सुविधाओं की मांग करने वाले लोगों का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक जनता के लिए अच्छी व्यवस्था और सुविधाएं मांगना किसी भी लोकतांत्रिक समाज में गलत नहीं हो सकता।
भ्रष्टाचार मुक्त भारत का सपना देखने वालों पर टिप्पणी
आप संयोजक ने कहा कि जो व्यक्ति भ्रष्टाचार मुक्त भारत का सपना देखता है, उसे भी प्रधानमंत्री की परिभाषा में ‘दिमागी नक्सल’ कहा जा सकता है। उन्होंने अपने बयान के जरिए सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने और व्यवस्था में बदलाव की मांग करने वालों को लेकर चल रही बहस को राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश की। केजरीवाल ने कहा कि लोकतंत्र में सवाल पूछना और बदलाव की मांग करना नागरिकों का अधिकार है।
हाँ। मैं दिमाग़ी नक्सल हूँ। क्योंकि मैं देशभक्त हूँ। और मुझे इस पर गर्व है। pic.twitter.com/ADE3YRfvSJ
— Arvind Kejriwal (@ArvindKejriwal) August 17, 2026
BJP से नहीं डरने वालों पर भी साधा निशाना
केजरीवाल ने अपने बयान में कहा कि जो व्यक्ति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या भाजपा से डरता नहीं है और विकसित भारत का सपना देखता है, उसे भी मौजूदा परिभाषा के तहत ‘दिमागी नक्सल’ कहा जा सकता है। उन्होंने कहा कि देश के विकास के लिए बेहतर व्यवस्था की मांग करने वाले लोगों को किसी विशेष राजनीतिक नजरिए के आधार पर गलत ठहराना उचित नहीं है। उनके बयान का उद्देश्य प्रधानमंत्री की टिप्पणी पर विपक्ष का विरोध दर्ज कराना था।
भगत सिंह और अंबेडकर का भी किया जिक्र
अरविंद केजरीवाल ने अपने बयान में स्वतंत्रता सेनानी भगत सिंह और संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यदि भगत सिंह आज जीवित होते तो शायद प्रधानमंत्री उन्हें भी ‘दिमागी नक्सल’ कहते। इसी तरह उन्होंने दावा किया कि समानता के लिए संघर्ष करने वाले डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर को भी इस तरह की परिभाषा से नहीं बख्शा जाता। केजरीवाल ने इन ऐतिहासिक व्यक्तित्वों का उदाहरण देकर अपने तर्क को सामने रखा।
बोले- मैं देशभक्त हूं और मुझे गर्व है
केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित करते हुए कहा कि वह उनकी परिभाषा के अनुसार ‘दिमागी नक्सल’ हैं, क्योंकि वह देशभक्त हैं और उन्हें इस बात पर गर्व है। उन्होंने कहा कि देश के खिलाफ यदि कोई व्यक्ति कुछ करता या बोलता है, तो वह उसका पूरी ताकत से विरोध करेंगे। अपने वीडियो संदेश के अंत में केजरीवाल ने देशभक्ति का संदेश देते हुए ‘जय हिंद’ कहा।
पीएम मोदी के बयान से शुरू हुआ विवाद
दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले से दिए अपने संबोधन में हथियारबंद नक्सलवाद का जिक्र किया था। उन्होंने कहा था कि सशस्त्र नक्सलवाद कमजोर हो चुका है, लेकिन ‘दिमागी नक्सल’ अब भी मौजूद हैं और अवसर की तलाश में रहते हैं। प्रधानमंत्री की इस टिप्पणी के बाद विपक्षी दलों ने सवाल उठाए। इसके बाद पी. चिदंबरम ने खुद को ‘दिमागी नक्सल’ बताते हुए प्रतिक्रिया दी थी।
विपक्षी नेताओं के बयानों से बढ़ा सियासी घमासान
चिदंबरम के बाद अब केजरीवाल के इस बयान से विवाद और गहरा गया है। विपक्षी नेताओं द्वारा खुद को ‘दिमागी नक्सल’ बताकर प्रधानमंत्री के बयान पर व्यंग्य करने की रणनीति अपनाई जा रही है। वहीं भाजपा की ओर से इस मुद्दे पर विपक्ष पर पलटवार किया जा रहा है। आने वाले दिनों में यह शब्द राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बन सकता है और दोनों पक्ष एक-दूसरे पर हमले तेज कर सकते हैं।
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